सत्य ऋषी
होली का त्योहार नजदीक है, लेकिन इस बार होलिका दहन की सही तिथि और मुहूर्त को लेकर लोगों में काफी दुविधा है। कई ज्योतिष 02 मार्च को प्रदोष काल या भद्रा के पुच्छ काल में होलिका दहन कराने की बात कह रहे हैं, जबकि शास्त्रीय मान्यताओं और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति को देखते हुए यह समय अशुभ माना गया है। हमारा दावा है कि शास्त्र सम्मत विधि के अनुसार होलिका दहन 03 मार्च की शाम को ही किया जाना चाहिए और रंगों वाली होली 04 मार्च को खेली जानी चाहिए। आइए जानते हैं इसके पीछे के ठोस कारण।
02 मार्च: भद्राकाल का प्रकोप और धरती लोक का डर
02 मार्च को होलिका दहन करना शास्त्रों के विरुद्ध हो सकता है। ज्योतिष गणना के अनुसार, 02 मार्च की शाम 05 बजकर 58 मिनट पर भद्रा काल प्रारंभ हो जाएगा। यही समय प्रदोष काल का भी होगा। शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि भद्रा काल में किसी भी शुभ कार्य या होलिका दहन करना अशुभ फलदायक होता है। हालांकि, कुछ लोग भद्रा के ‘पुच्छ काल’ (रात 01:25 से 02:35 बजे तक) में दहन करने की बात कर रहे हैं, लेकिन इस बार एक बड़ी बाधा यह है कि भद्रा इस समय ‘धरती लोक’ में है। शास्त्रों के अनुसार, जब भद्रा धरती लोक में होती है, तब किसी भी प्रकार का पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान करना वर्जित माना गया है। ऐसे में सलाह दी जाती है कि यदि जरूरी न हो तो इस दिन दहन से बचना ही बेहतर है।
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03 मार्च: सूतक काल और चंद्र ग्रहण की समस्या
अब सवाल उठता है कि यदि 02 मार्च को नहीं किया गया दहन, तो क्या 03 मार्च को सुबह-दोपहर धुलेंडी खेली जा सकती है? जवाब है—नहीं। 03 मार्च को प्रातः 09:36 बजे से ही चंद्र ग्रहण का ‘सूतक काल’ प्रारंभ हो जाएगा। सूतक काल के दौरान रंग डालना, पूजा करना या उत्सव मनाना शास्त्र सम्मत नहीं है। ऐसे में 03 मार्च को सुबह और दोपहर होली खेलना उचित नहीं होगा।
सही समाधान: 03 मार्च शाम को दहन, 04 मार्च को होली
शास्त्रों में दिए गए नियमों के अनुसार, जब पहले दिन भद्रा का साया हो और दूसरे दिन ग्रहण जैसी बाधाएं हों, तो ‘निर्णय सिंधु’ और ‘धर्मसिंधु’ ग्रंथों के अनुसार सबसे उत्तम उपाय यही है कि होलिका दहन स्थगित कर दिया जाए।
सही मुहूर्त:
03 मार्च को शाम 06:46 बजे के बाद चंद्र ग्रहण समाप्त हो जाएगा। इसके बाद प्रदोष काल में या जब भी समय मिले, होलिका दहन किया जा सकता है। चूंकि दहन रात होगा, इसलिए रंगों वाली होली अगले दिन यानी 04 मार्च को मनाई जानी चाहिए।
























