Inflation’s Double Attack: पश्चिम बंगाल और असम समेत कई राज्यों के चुनावी समाप्त होते ही सरकारी तेल कंपनियों ने महंगाई का ऐसा बम फोड़ा है, जिसका असर सीधा आम आदमी की प्लेट पर दिखेगा। 1 मई 2026 से कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर के दामों में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम में ₹993 और 5 किलो वाले सिलेंडर के दाम में ₹261 का जबरदस्त इजाफा किया गया है।
हालांकि, आम जनता के लिए राहत भरी खबर यह है कि घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कितना पहुंचा दाम? (19kg कमर्शियल सिलेंडर)
दिल्ली की बात करें तो 1 अप्रैल को 19 किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर ₹2078.50 में मिल रहा था। लेकिन मई माह की शुरुआत में ₹993 की बढ़ोतरी के बाद अब यह ₹3071.50 का हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली, मुंबई समेत देश के तमाम प्रमुख शहरों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत ₹3000 के पार चली गई है।
5 किलो वाला सिलेंडर भी हुआ महंगा
कामगारों और छोटे व्यवसायियों के लिए बनाए गए 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडर का बोझ भी बढ़ गया है। इसमें ₹261 की बढ़ोतरी की गई है। पहले जो सिलेंडर ₹549 में मिलता था, अब वह ₹810 का हो गया है।
आम आदमी की थाली पर पड़ेगा असर
गैस के दाम बढ़ने का सीधा मतलब है कि होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और फूड स्टॉल्स का खर्च बढ़ेगा। जिसे वे ग्राहकों पर डालेंगे। इसका असर सड़क किनारे बिकने वाले स्ट्रीट फूड पर भी पड़ेगा। माना जा रहा है कि अब चाय, समोसे और अन्य छोटे नाश्ते की चीजों के दामों में जल्द ही इजाफा देखने को मिल सकता है।
घरेलू गैस सिलेंडर पर नहीं पड़ा असर
तेल कंपनियों ने आम उपभोक्ताओं को राहत देते हुए 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर के दामों को यथावत रखा है।
- दिल्ली: ₹913
- मुंबई: ₹912.50
- चेन्नई: ₹928.50
- कोलकाता: ₹939
(इन दामों में आखिरी बार 7 मार्च 2026 को बदलाव किया गया था)।
क्या है इस भारी बढ़ोतरी की असली वजह?
सूत्रों के अनुसार, इस महंगाई के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव सबसे बड़ी वजह है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण ‘हॉरमुज का रास्ता’ (Strait of Hormuz) अवरुद्ध हो गया है। भारत को तेल और गैस का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता था।
सप्लाई चेन में आई इस कमी के कारण भारत को अन्य देशों से तेल और गैस का आयात बढ़ाना पड़ रहा है, जिससे लागत में भारी इजाफा हुआ है। यही कारण है कि कंपनियों को कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा है।



























