संध्या समय न्यूज संवाददाता
जौनपुर। तहसील मछलीशहर के बनकट गांव की ऐतिहासिक रामलीला इस वर्ष अपने 53वें वर्ष में प्रवेश कर गई है। ग्रामवासियों द्वारा हर्ष और उल्लास के साथ आयोजित की जा रही यह पारंपरिक रामलीला आज भी लोगों की आस्था और सामाजिक एकता का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। श्री रामलीला समिति बनकट के तत्वावधान में आयोजित होने वाली इस रामलीला में गांव के सभी वर्गों और बिरादरियों के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
स्वर्गीय पंडित राधाकृष्ण तिवारी ने रखी थी नींव
बनकट की रामलीला की शुरुआत स्वर्गीय पंडित राधाकृष्ण तिवारी द्वारा की गई थी। वे पूर्व न्यायपीठ सचिव, उच्च न्यायालय प्रयागराज रहे। उनके प्रयासों से स्थापित श्री रामलीला समिति बनकट आज भी प्रभु श्री राम की कृपा से निरंतर रामलीला का आयोजन करती आ रही है।
पांच दशक से अधिक समय से चली आ रही यह रामलीला अब बनकट गांव की ऐतिहासिक और पारंपरिक पहचान बन चुकी है। हर वर्ष ग्रामीण पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रामलीला के आयोजन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हैं।
समाजसेवी अतुल तिवारी की अध्यक्षता में आयोजन
इस वर्ष बनकट की रामलीला का आयोजन समाजसेवी अतुल तिवारी की अध्यक्षता में किया जा रहा है। रामलीला के आयोजन को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह है। आयोजन समिति और ग्रामवासी मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटे हुए हैं।

रामलीला के साथ-साथ ग्रामवासियों की ओर से नौ दिनों तक दुर्गा पूजा का भी आयोजन किया जाता है। धार्मिक आयोजनों के इस क्रम से पूरे गांव में भक्तिमय वातावरण बना रहता है।
सभी बिरादरियों की सहभागिता से कायम है सौहार्द
बनकट गांव की रामलीला की सबसे खास बात यह है कि इसके प्रारंभ से ही सभी बिरादरियों के लोग इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेते रहे हैं। ग्रामीणों की सामूहिक सहभागिता से गांव में आपसी प्रेम, भाईचारा और सामाजिक सौहार्द की भावना मजबूत होती है।
रामलीला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों को एक मंच पर लाने और आपसी रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम भी बनी हुई है। यही कारण है कि पांच दशक से अधिक समय बाद भी इस परंपरा की लोकप्रियता बनी हुई है।
दूर-दूर से रामलीला देखने पहुंचते हैं लोग
मछलीशहर क्षेत्र की यह ऐतिहासिक रामलीला आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज के क्षेत्रों में भी अपनी पहचान रखती है। रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का मंचन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग बनकट पहुंचते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पुरानी इस परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। श्री रामलीला समिति बनकट और ग्रामवासियों के सामूहिक प्रयासों से यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन लगातार आगे बढ़ रहा है।
53वें वर्ष में पहुंची बनकट की रामलीला आज आस्था, परंपरा, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन चुकी है। प्रभु श्री राम की भक्ति के साथ आयोजित होने वाला यह आयोजन आने वाले वर्षों में भी इसी तरह निरंतर चलता रहे, यही ग्रामवासियों की कामना है।


























