चूहा या असली हीरो? मगावा की कहानी जानकर चौंक जाएंगे

मगावा को 'क्लिकर ट्रेनिंग' (Clicker Training) और खाने के इनाम के जरिए ट्रेन किया गया था। उसे सिखाया गया कि जैसे ही उसे जमीन के अंदर छिपे विस्फोटकों में मौजूद रासायनिक यौगिकों की गंध आए, उसे तुरंत वहां रुक जाना है और जमीन को अपने पंजों से खरोंचना है। इस काम में चूहों की सबसे बड़ी ताकत उनका वजन होता है।

सरकारी नौकरी कर गोल्ड मेडल जीतने वाला अनोखा चूहा मगावा

HIGHLIGHTS

  • 20 फुटबॉल मैदान साफ करने वाले इस चूहे की कहानी
  • लैंडमाइन खोजकर लाखों लोगों की जान बचाने वाला वो चूहा
  • पांच साल तक लैंडमाइन ढूंढने वाले चूहे ने ली रिटायरमेंट
  • गोल्ड मेडल विजेता इस चूहे ने खोजे 71 खतरनाक लैंडमाइन

The story of the rat (Magawa): आमतौर पर जब हम चूहे का नाम सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में एक छोटा, कीटाणु फैलाने वाला और डरा हुआ जानवर उभरता है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसे चूहे के बारे में सुना है जिसने एक ‘सरकारी अफसर’ की तरह काम किया हो, देश की सेवा की हो और लाखों लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई हो? सोशल मीडिया और इंटरनेट पर इन दिनों ‘मगावा’ (Magawa) नाम के एक चूहे की कहानी काफी वायरल हो रही है, जिसने अपनी जिंदगी में वो कर दिखाया है जो आधुनिक तकनीक और मशीनों के लिए भी मुश्किल था।

मगावा कोई साधारण चूहा नहीं था। यह एक विशेष रूप से प्रशिक्षित ‘अफ्रीकन जायंट पाउच्ड रैट’ (African Giant Pouched Rat) था, जिसने दक्षिण-पूर्व एशिया के देश कम्बोडिया (Cambodia) में दफन लैंडमाइन्स (Landmines) और अनफटे विस्फोटकों का पता लगाने का काम किया। पांच साल के अपने लंबे करियर में इसने लगभग 20 फुटबॉल मैदान के बराबर इलाके को खतरे से मुक्त कराया। आइए जानते हैंं इस अनोखे हीरो की पूरी कहानी:

एपोपो (APOPO) और ‘हीरो रैट्स’ की अवधारणा

मगावा का जन्म पूर्वी अफ्रीका के देश तंजानिया (Tanzania) में हुआ था। बेल्जियम (Belgium) की एक गैर-लाभकारी संस्था ‘एपोपो’ (APOPO) ने उसे बचपन से ही विशेष तरीके से प्रशिक्षित किया। एपोपो का उद्देश्य ऐसे जानवरों को तैयार करना था जो इंसानों के लिए गंभीर खतरा बने हुए विस्फोटकों को बिना किसी नुकसान के ढूंढ सकें। इन खास चूहों को ‘हीरो रैट्स’ (HeroRATs) के नाम से पुकारा जाता है।

मगावा को ‘क्लिकर ट्रेनिंग’ (Clicker Training) और खाने के इनाम के जरिए ट्रेन किया गया था। उसे सिखाया गया कि जैसे ही उसे जमीन के अंदर छिपे विस्फोटकों में मौजूद रासायनिक यौगिकों की गंध आए, उसे तुरंत वहां रुक जाना है और जमीन को अपने पंजों से खरोंचना है। इस काम में चूहों की सबसे बड़ी ताकत उनका वजन होता है। ये चूहे काफी हल्के होते हैं, जिसकी वजह से भले ही ये सीधा लैंडमाइन पर चले जाएं, तब भी उसका ट्रिगर नहीं दबता और विस्फोट नहीं होता।

कम्बोडिया में दबे थे लाखों बम

साल 2016 में मगावा को कम्बोडिया के सिएम रीप (Siem Reap) इलाके में तैनात किया गया। दरअसल, कम्बोडिया में 1970 और 1980 के दशक के गृहयुद्ध और आंतरिक संघर्षों के दौरान लाखों लैंडमाइनें बिछाई गई थीं। दशकों बाद भी वहां की जमीन में लाखों बम और विस्फोटक दबे पड़े हैं। ये दफन विस्फोटक किसानों, ग्रामीणों और खासकर बच्चों के लिए काल का साबित हो रहे थे।

मगावा जैसे हीरो रैट्स ने इस समस्या को हल करने में अहम भूमिका निभाई। मगावा हर दिन सुबह करीब आधे घंटे काम करता था। उसकी स्पीड और सटीकता अद्भुत थी। वह एक टेनिस कोर्ट के बराबर के इलाके को महज 30 मिनट में पूरी तरह से स्कैन कर लेता था। अगर इसी काम के लिए किसी इंसान को मेटल डिटेक्टर (Metal Detector) के साथ उतारा जाता, तो उसे कई दिन लग जाते।

अद्भुत और जानलेवा आंकड़े

अपने 5 साल के कार्यकाल में मगावा ने जो कमाल किया, वह बेहद प्रशंसनीय है। उसने अपनी असाधारण सूंघने की क्षमता से 71 लैंडमाइन्स और 38 अन्य बिना विस्फोट हुए खतरनाक हथियारों (Unexploded ordnance) का पता लगाया। कुछ अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार उसने कुल 100 से अधिक खतरनाक चीजों की पहचान की।

इतना ही नहीं, मगावा ने लगभग 1.41 लाख से 2.25 लाख वर्ग मीटर जमीन को बिल्कुल सुरक्षित घोषित कराने में मदद की। यह इलाका लगभग 20 से 40 फुटबॉल मैदानों के बराबर है। उसकी इस मेहनत से सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान बची और वो जमीनें फिर से खेती और रहने लायक बन पाईं।

गोल्ड मेडल से नवाजा गया पहला चूहा

मगावा की इस अनोखी और जानलेवा सेवा को देखते हुए साल 2020 में ब्रिटेन की एक प्रतिष्ठित पशु कल्याण संस्था ‘पीडीएसए’ (PDSA) ने उसे ‘गोल्ड मेडल’ (PDSA Gold Medal) से सम्मानित किया। यह पुरस्कार जानवरों की असाधारण बहादुरी और उनकी ड्यूटी के प्रति समर्पण को देखकर दिया जाता है।

इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी चूहे को यह बेहद सम्मानजनक पुरस्कार दिया गया। इससे पहले यह मेडल कुत्तों, घोड़ों, बिल्लियों और सिर्फ एक कबूतर को ही प्राप्त हुआ था। उसके मेडल पर अंग्रेजी में लिखा था– “For animal gallantry or devotion to duty” (जानवरों की बहादुरी या ड्यूटी के प्रति समर्पण के लिए)।

एक शांतिपूर्ण सेवानिवृत्ति (Retirement) और अंतिम समय

साल 2021 में, जब मगावा 7 साल का हो गया, तो संस्था एपोपो ने उसे सेवानिवृत्ति (रिटायर) दे दिया। हालांकि मगावा पूरी तरह से स्वस्थ था, लेकिन उम्र बढ़ने के कारण वह धीमा पड़ गया था। उसने अपनी पूरी जिंदगी मानवता की सेवा में लगा दी थी, इसलिए अब उसे आराम करने का पूरा हक था।

रिटायरमेंट के बाद मगावा ने एक मेंटर के रूप में काम किया। वह नए और युवा चूहों को लैंडमाइन खोजने की ट्रेनिंग देने में जुट गया। अब उसकी जिंदगी में कोई तनाव नहीं था। उसे उसके पसंदीदा खाने—केले, मूंगफली और मौसमी फल खिलाए जाते और वह अपना समय आराम से बिताता।

जनवरी 2022 की शुरुआत में यह दुनिया का सबसे मशहूर चूहा शांतिपूर्ण तरीके से इस दुनिया से विदा हो गया। उसके निधन के समय उसकी उम्र लगभग 8 वर्ष थी, जो इस प्रजाति के चूहों के लिए एक सामान्य जीवनकाल माना जाता है।

Sandhya Samay News

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