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पिता बनने के अनुभव पर खुलकर बोले अली फज़ल

अली फज़ल ने बच्चों की मासूमियत पर एक बहुत ही गहरी बात की। उन्होंने कहा, "जब भी मैं अपनी बेटी को देखता हूं, तो मुझे लगता है कि अगर किसी कमरे में कोई बच्चा खेल रहा हो, तो सबका ध्यान अपने आप उसकी तरफ चला जाता है। मैंने हमेशा यह महसूस किया है।"

अली फज़ल का बड़ा खुलासा: पिता बनने के बाद पूरी तरह बदल गई जिंदगी

HIGHLIGHTS

  • बेटी की मासूमियत ने बदल दी अली फज़ल की जिंदगी
  • ‘शेखर टुनाइट’ में भावुक हुए अली फज़ल
  • बेटी को बताया जिंदगी का सबसे खूबसूरत एहसास
  • पितृत्व पर अली फज़ल की दिल छू लेने वाली बातें वायरल
  • पिता बनने के बाद बदल गई अली फज़ल की सोच और जिंदगी

Entertainment News: मनोरंजन जगत में अपनी बहुमुखी प्रतिभा और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं से सभी का दिल जीतने वाले अभिनेता अली फज़ल इन दिनों अपनी निजी जिंदगी के एक ऐसे अध्याय से गुजर रहे हैं, जिसने उन्हें भीतर से बदल दिया है। पितृत्व (Fatherhood) का यह अनुभव किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे बड़ा बदलाव होता है, और जब यह बदलाव किसी कलाकार के जीवन में आता है, तो उसकी कला और दृष्टिकोण दोनों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। हाल ही में पॉपुलर टॉक शो ‘शेखर टुनाइट’ (Shekhar Tonight) के एक एपिसोड में अली फज़ल ने इसी बदलाव के बारे में खुलकर बात की।

बॉबी देओल के साथ शो के पिछले भावुक एपिसोड की सफलता के बाद, ‘शेखर टुनाइट’ ने अपने तीसरे एपिसोड में अली फज़ल को लाकर एक बार फिर साबित कर दिया है कि यह शो सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि भावनाओं का एक गहरा सागर है। इस एपिसोड में अली ने अपने पेशे से इतर, एक पिता, एक पति और एक साधारण इंसान के रूप में अपने अनुभव साझा किए।

पिता बनना: एक अवर्णनीय एहसास

जब शो के मेजबान वरिष्ठ अभिनेता शेखर सुमन ने अली से पूछा, “ज़िंदगी कैसी चल रही है?”, तो मंच पर एक सौम्य सन्नाटा पसर गया। अली का जवाब सिर्फ शब्दों का समूह नहीं था, बल्कि उनके दिल की धड़कनों का अनुवाद था। अली ने कहा, “मुझे लगता है कि मेरी ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई है। पिता बनना ऐसा एहसास है जिसे शब्दों में पूरी तरह समझाना मुश्किल है।”

अक्सर लोग पिता बनने को एक सामान्य जीवनचक्र की तरह देखते हैं, लेकिन अली के अनुसार यह दुनिया का सबसे सच्चा और पवित्र एहसास है। उन्होंने बताया कि बेटी के आने के बाद उनकी दुनिया ही बदल गई। अब वे जिस तरह से दुनिया को देखते हैं, वह पहले से बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि सिनेमा को देखने का उनका नजरिया (Perspective) और लोगों की भावनाओं को समझने का उनका तरीका, दोनों ही बदल चुके हैं। जहां पहले वह एक कलाकार की नज़र से फिल्मों को देखते थे, वहीं अब वह एक पिता की संवेदनशीलता के साथ कहानियों को जीते हैं।

मासूमियत और प्रकृति का अद्भुत संगम

अली फज़ल ने बच्चों की मासूमियत पर एक बहुत ही गहरी बात की। उन्होंने कहा, “जब भी मैं अपनी बेटी को देखता हूं, तो मुझे लगता है कि अगर किसी कमरे में कोई बच्चा खेल रहा हो, तो सबका ध्यान अपने आप उसकी तरफ चला जाता है। मैंने हमेशा यह महसूस किया है।”

यह एक मनोवैज्ञानिक सत्य है, जिसे अली ने बड़ी ही खूबसूरती से समझाया। उनके मुताबिक, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बच्चों की मासूमियत बहुत सच्ची होती है और वे प्रकृति के बहुत करीब होते हैं। एक बच्चे के होने भर से कमरे का माहौल (Vibe) कैसे बदल जाता है, यह अली ने बड़ी सरलता से समझाया। बच्चों में कोई झूठ नहीं होता, कोई पाखंड नहीं होता। वह जो हैं, वही सामने आते हैं, और यही उन्हें सबसे आकर्षक बनाता है। अली के इन विचारों ने यह दर्शाया कि वह अपनी बेटी से किता कुछ सीख रहे हैं—वह सीख रहे हैं कि जीवन को बिना किसी फ़िल्टर के जीना कैसा होता है।

जीवन और सिनेमा का नया ‘एडिट’

शो का सबसे यादगार और काव्यात्मक पल तब आया, जब अली ने अपनी बेटी की हरकतों को सिनेमा से जोड़ा। उन्होंने अपनी बेटी के बदलते मिजाज और हर पल की नई खोज को फिल्म एडिटिंग की तरह व्यक्त किया।

अली ने कहा, “हर पल और हर सोच एक पलक झपकते ही बदल जाती है। जैसे कोई नया एडिट हो गया हो। वह बस पलक झपकाती है और सब कुछ बदल जाता है।”

यह कथन किसी अभिनेता के लिए बेहद मायने रखता है। जहां सिनेमा में एडिटर सीन्स को काटकर और जोड़कर कहानी तैयार करता है, वहीं असल जिंदगी में एक बच्चा हर पल नई कहानी रच देता है। अली ने आगे कहा, “यह बहुत आसान और सच्चा एहसास है। तब मुझे लगा कि यही असली फोकस है। यही असली सिनेमा है, क्योंकि यह पूरी तरह अनजान और अलग होता है।”

उन्होंने बच्चों की दुनिया का वर्णन करते हुए कहा कि इसमें अपनी एक मासूमियत होती है, अपनी एक धुन होती है और अपनी एक छोटी सी दुनिया होती है… और कभी-कभी काफी शोर भी। एक पिता के तौर पर अली उस ‘शोर’ को भी संगीत की तरह महसूस करते हैं। उनकी यह बात साबित करती है कि सच्ची कहानियां फिल्मों की कैनवास पर नहीं, बल्कि हमारे घरों में लिखी जाती हैं।

एक भावनात्मक सफर

अली फज़ल की यह बातचीत सिर्फ एक साक्षात्कार नहीं थी, बल्कि एक भावनात्मक सफर था। उनके शब्दों ने शेखर सुमन और वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया। एक साधारण बातचीत ज़िंदगी को समझने वाले खूबसूरत पल में बदल गई। अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में काम करने वाले अली फज़ल ने यह साबित कर दिया कि सफलता के शिखर पर होने के बाद भी मानवीय भावनाओं और रिश्तों का महत्व सबसे ऊपर होता है।

देखिए अली फज़ल का खास अंदाज

‘शेखर टुनाइट’ का यह एपिसोड उन सभी लोगों के लिए प्रेरणादायक होने वाला है जो जीवन के नए पड़ाव पर हैं या जो सिनेमा और जीवन के बीच के संबंध को समझना चाहते हैं। अली फज़ल की यह दिल से जुड़ी खास बातचीत दर्शकों को काफी प्रभावित करेगी।

तो देर किस बात की? अगर आप भी जानना चाहते हैं कि एक स्टार कैसे एक ‘पापा’ बनकर अपनी दुनिया बदल लेता है और जीवन को सिनेमा की नज़र से कैसे देखता है, तो यह शो आपके लिए है।

देखिए अली फज़ल की यह दिल से जुड़ी खास बातचीत ‘शेखर टुनाइट’ में, जो 29 मई 2026 शाम 6 बजे यूट्यूब पर स्ट्रीम होगी।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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