दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में आज रविवार को AISA और आप पार्टी (AAP) के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। AISA ने इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक मार्च निकालने की कोशिश की, जबकि आप पार्टी (AAP) कार्यकर्ता भी इंडिया गेट की ओर बढ़े।
पुलिस ने दोनों संगठनों के प्रदर्शनकारियों को आगे जाने से रोकने के लिए कई जगह बैरिकेडिंग की। इस दौरान AISA कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। आप पार्टी (AAP) ने आरोप लगाया कि उसके कई कार्यकर्ताओं को अशोक रोड के पास हिरासत में लिया गया। पुलिस ने दोनों संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया।
प्रदर्शन में SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के नियमों, पुलिस कार्रवाई और महिला पत्रकार से जुड़ी शिकायत का मुद्दा भी उठा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मतदाता सूची में नाम हटाए जाने को लेकर लोगों के मन में सवाल हैं और संबंधित अधिकारियों को उनका जवाब देना चाहिए।
इंडिया गेट से जंतर-मंतर मार्च
AISA कार्यकर्ताओं ने इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक मार्च निकालने की योजना बनाई थी। संगठन के कार्यकर्ता अशोक रोड और आंध्र भवन की ओर से जंतर-मंतर की तरफ बढ़े। रास्ते में पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाकर आगे जाने का प्रयास किया, जिसके दौरान कई बार धक्का-मुक्की हुई।
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा समेत संगठन के कई कार्यकर्ता मौके पर मौजूद थे। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने SIR के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए। संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना था कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता जरूरी है। उन्होंने मांग की कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें इसकी वजह और शिकायत दर्ज कराने का तरीका बताया जाए।
पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया और प्रदर्शन में शामिल कई लोगों को हिरासत में ले लिया। AISA की ओर से पुलिस की कार्रवाई और बैरिकेडिंग पर आपत्ति जताई गई।
अशोक रोड पर आप पार्टी (AAP) कार्यकर्ताओं को रोका गया
आप पार्टी (AAP) कार्यकर्ता भी इंडिया गेट की ओर बढ़े। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए। AAP का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने अशोक रोड के पास ही उन्हें रोक दिया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
सौरभ भारद्वाज ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए पुलिसकर्मियों के व्यवहार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान बदसलूकी की गई और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। भारद्वाज ने कहा कि अगर पुलिस नेताओं और पत्रकारों के साथ ऐसा व्यवहार करती है, तो आम लोगों के साथ उसके रवैये को लेकर भी चिंता हो सकती है।
आप पार्टी (AAP) ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर भी सवाल उठाया। पार्टी का कहना था कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए निकले कार्यकर्ताओं को रास्ते में रोकना और हिरासत में लेना उचित नहीं है। हालांकि, पुलिस की ओर से कार्रवाई को लेकर इस मामले में अलग से कोई विस्तृत पक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया।
महिला पत्रकार की शिकायत का मुद्दा उठा
प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार के साथ कथित यौन उत्पीड़न की शिकायत का मामला भी उठाया गया। सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा कि तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत की है। उन्होंने सवाल किया कि यदि शिकायत की जांच पुलिस अपने ही विभाग के अधिकारियों के खिलाफ करेगी, तो जांच की स्वतंत्रता और निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित होगी।
योगेंद्र यादव ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं, खासकर तब जब सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस पर ही आरोप लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर चिंता है और ऐसे मामलों में शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
माकपा नेता ब्रिंदा करात ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिला पत्रकार के साथ कथित छेड़छाड़ के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी, लेकिन पुलिस की ओर से कथित तौर पर वीडियो सबूत मांगा गया। करात ने कहा कि किसी महिला की शिकायत मिलने पर पुलिस को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने इस मामले को केवल एक पत्रकार तक सीमित न मानते हुए महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया।
प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस की कथित कार्रवाई की जांच और जवाबदेही की मांग भी की। इन आरोपों पर संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
वोटर लिस्ट में नाम हटने पर SIR को लेकर सवाल
प्रदर्शन में शामिल दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में NSUI की सचिव पद की उम्मीदवार रहीं नम्रता चौधरी ने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उनके माता-पिता और बड़े भाई के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए, जबकि परिवार के अन्य सदस्य का वोटर आईडी मौजूद है।
चौधरी ने कहा कि उनके माता-पिता हर चुनाव में मतदान करते रहे हैं, इसलिए उनके नाम मतदाता सूची से हटने की वजह स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने ऐसे मामलों की जांच और प्रभावित मतदाताओं को जानकारी देने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि मतदाता सूची में नाम हटने या दर्ज न होने से नागरिकों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
SIR के दौरान नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की मांग प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा रही। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मतदाताओं को यह जानने का अवसर मिलना चाहिए कि उनका नाम क्यों हटाया गया और उसे दोबारा सूची में शामिल कराने के लिए क्या प्रक्रिया अपनानी होगी।
महिला प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर भी आपत्ति
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शाम के बाद महिला प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। उन्होंने पुलिस के रवैये पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रदर्शन में शामिल महिलाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। इन आरोपों पर पुलिस की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
दिल्ली में हुए इस SIR विरोध प्रदर्शन में मतदाता सूची की प्रक्रिया, पुलिस की कार्रवाई और महिला पत्रकार की शिकायत—तीनों मुद्दे साथ-साथ उठे। AISA और आप पार्टी (AAP) ने अपने-अपने तरीके से मार्च निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से रोका। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए SIR प्रक्रिया पर जवाब और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की।

























