संदिप कुमार गर्ग
नोएडा। श्रीमद् भागवत कथा का दूसरा दिन भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। कथा वाचन करते हुए पंडित राकेश कृष्णा शास्त्री ने पांडवों के जीवन में भगवान श्रीकृष्ण की कृपा और उनके संरक्षण का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत महापुराण के महत्व से भी अवगत कराया।
कथा के दौरान पंडित राकेश कृष्णा शास्त्री ने बताया कि राजा परीक्षित कलियुग के प्रभाव के कारण एक ऋषि के श्राप से प्रभावित हो जाते हैं। इसके पश्चात वे पश्चाताप करते हुए शुकदेव जी की शरण में पहुंचते हैं। इसी प्रसंग के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत कथा के महत्व और उसके आध्यात्मिक प्रभाव के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि कलियुग में श्रीमद् भागवत महापुराण का श्रवण कल्पवृक्ष से भी बढ़कर है। कल्पवृक्ष से मनुष्य को अर्थ, धर्म और काम की प्राप्ति हो सकती है, लेकिन भक्ति और मुक्ति की प्राप्ति नहीं होती। वहीं श्रीमद् भागवत को दिव्य कल्पतरु बताते हुए उन्होंने कहा कि यह अर्थ, धर्म और काम के साथ-साथ भक्ति और मुक्ति भी प्रदान करता है तथा जीव को परम पद की ओर ले जाता है।
कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में भाव-विभोर नजर आए। कथा के समापन पर सभी भक्तों ने मिलकर श्रीमद् भागवत भगवान की आरती की। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर कमेटी अध्यक्ष श्री सुखबीर प्रधान, बाबूराम चौहान, रोहताश चौहान, मनोज चौहान, महावीर बोहरा, दयाराम सिंह रावत, जितेंद्र चौहान, बीर सिंह, जयवीर, उधम टाइगर, तंवर, हरिकिशन, विकास पंडित, निक्की भाटी, सुंदर भाटी, उमेश चौहान और रामवीर सहित अनेक भक्त मौजूद रहे।
श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का श्रवण किया और भक्ति एवं आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ उठाया।


























