Delhi News: राजनीति और साहित्य के क्षेत्र में आज एक अनूठा और ऐतिहासिक अवसर सामने आया, जब देश के दिग्गज नेताओं ने एक मंच पर एकत्रित होकर एक ऐसी कृति को जन्म दिया, जो केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि भावनाओं और समर्पण का अद्भुत संगम है। आज पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा जैसे दिग्गजों की गरिमामयी उपस्थिति में, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी की अत्यंत प्रतीक्षित पुस्तक ‘अपनापन’ का विमोचन संपन्न हुआ। इस गौरवशाली आयोजन का साक्षी बनना हर उपस्थित व्यक्ति के लिए एक सुखद और स्मरणीय अवसर था।
‘अपनापन’: एक नाम, जिसमें छिपा है रिश्तों का आधार
पुस्तक का नाम ‘अपनापन’ स्वयं में बहुत कुछ कह जाता है। यह शब्द केवल किसी संबंध को नहीं दर्शाता, बल्कि यह आत्मीयता, विश्वास और गहरी समझ का प्रतीक है। यह कृति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अतुलनीय व्यक्तित्व को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। शिवराज सिंह चौहान ने इस पुस्तक के माध्यम से उन अनछुए पहलुओं को शब्दों में पिरोया है, जो आम जनता से कई बार दूर रह जाते हैं। यह कोई साधारण जीवनी नहीं है, बल्कि यह एक साथी की नजर से देखा गया एक दूरदर्शी नेता का सच्चा चित्रण है।
निष्काम सेवा और अनवरत साधना का गाथा
इस कृति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के प्रति निष्काम सेवा भाव और उनकी अनवरत साधना को अत्यंत निकटता से प्रस्तुत करती है। शिवराज सिंह चौहान ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से बताया है कि किस प्रकार मोदी जी के जीवन में ‘राष्ट्र’ ही परमात्मा का स्थान रखता है। यह पुस्तक उस सेवा भाव और राष्ट्र कल्याण का जीवंत दस्तावेज है, जो आज के भारत को नए शिखरों पर पहुंचा रहा है। पुस्तक के पन्नों में गूंजता मोदी जी का वह दृढ़ संकल्प और कठिन परिश्रम, हर पाठक को प्रेरित करने के लिए पर्याप्त है।
आज माननीय पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू जी एवं माननीय पूर्व प्रधानमंत्री श्री एच. डी. देवेगौड़ा जी की गरिमामयी उपस्थिति में माननीय केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी की पुस्तक ‘अपनापन’ का विमोचन संपन्न हुआ। इस गौरवशाली आयोजन का साक्षी बनने का सुखद अवसर प्राप्त… pic.twitter.com/Q9DABPhvHp
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) May 26, 2026
लोक-कल्याण: जहां नेतृत्व बनता है जनता की ताकत
जब लोक-कल्याण और जनभागीदारी किसी नेतृत्व की शक्ति बन जाती है, तब राष्ट्र निर्माण का एक नया इतिहास रचा जाता है। यह पुस्तक इसी सत्य को स्थापित करती है। आज का भारत विकास के उस पथ पर अग्रसर है, जहां सरकार की नीतियां और जनता की भागीदारी एक दूसरे के पूरक हैं। इस कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा और पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू की उपस्थिति ने इस बात को सिद्ध कर दिया कि राष्ट्रहित से बड़ा कोई राजनीतिक दल या विचारधारा नहीं होती। जब बात देश की उन्नति और नेतृत्व की महत्ता की आती है, तो सभी सीमाएं लुप्त हो जाती हैं।
शिवराज सिंह चौहान: एक समर्पित शिल्पकार के रूप में
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपने अनुभवों को शब्दों में पिरोने हेतु हृदय से बधाई। एक ऐसे नेता, जिन्होंने खुद दशकों तक जनसेवा की है और कार्यक्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है, द्वारा यह पुस्तक लिखा जाना अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस पुस्तक में मोदी जी को न केवल एक प्रधानमंत्री के रूप में, बल्कि एक आदर्श, एक गुरु और एक कर्मयोगी के रूप में चित्रित किया है। उनकी लेखनी ने साधारण घटनाओं को भी असाधारण बना दिया है, जो पाठक को बांधे रखता है।
करोड़ों कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत
निस्संदेह, यह पुस्तक करोड़ों कार्यकर्ताओं तथा सार्वजनिक जीवन में सक्रिय प्रत्येक राष्ट्रसेवक के लिए महान प्रेरणा सिद्ध होगी। यह उन्हें सिखाएगी कि कैसे जीवन की चुनौतियों का सामना करते हुए भी मानवता की सेवा में जुटे रहना संभव है। यह किताब नए पीढ़ी के नेताओं के लिए एक प्रामाणिक मार्गदर्शक (Guidebook) का काम करेगी। इसमें व्यक्तिगत संघर्षों से लेकर राष्ट्रीय निर्णयों तक की यात्रा का वर्णन है, जो हर उस व्यक्ति के लिए प्रासंगिक है जो समाज को बदलने का सपना देखता है।
समापन: राष्ट्र निर्माण का नया अध्याय
अंत में, ‘अपनापन’ पुस्तक का विमोचन केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण के उस संकल्प का पुनर्प्रमाणन था, जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। यह कृति याद दिलाती है कि राजनीति सिर्फ सत्ता का खेल नहीं, बल्कि जनता के साथ भावनात्मक जुड़ाव ‘अपनापन’ का नाम है। देश के वरिष्ठतम नेताओं द्वारा इस कार्यक्रम को समृद्ध करना, इस पुस्तक के महत्व को और भी बढ़ा देता है। यह निश्चित रूप से प्रत्येक भारतवासी के पुस्तकालय में शामिल होने योग्य है, ताकि वे ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना को और गहराई से समझ सकें।





















