गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में दशहरा समारोह की तैयारियों के दौरान बड़ा हादसा हो गया। शनि चौक स्थित लाजपत नगर सामुदायिक केंद्र में रावण का पुतला तैयार करते समय आग लगने के बाद विस्फोट हुआ। घटना में पांच लोग घायल हो गए। घायलों में से दो को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल और तीन को गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आग लगने के कारणों की शुरुआती जांच की। अधिकारियों के मुताबिक, विस्फोट इतना तेज था कि सामुदायिक केंद्र की दो दीवारें गिर गईं। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

पुतले में सामग्री भरने के दौरान लगी आग
शुरुआती जानकारी के अनुसार, सामुदायिक केंद्र में दशहरे के लिए रावण का पुतला बनाया जा रहा था। इसी दौरान पुतले के भीतर पटाखे या आतिशबाजी से जुड़ी सामग्री भरी जा रही थी। प्रक्रिया के बीच अचानक आग लगी और उसके बाद विस्फोट हो गया। आग और धमाके की चपेट में वहां काम कर रहे लोग आ गए, जिससे पांच लोग घायल हुए।
स्थानीय जानकारी के मुताबिक, रामलीला समिति ने रावण का पुतला बनाने का काम अनिल सिंह को सौंपा था। उनके साथ काम करने वाले मजदूर पुतले में सामग्री भर रहे थे। हालांकि, घटना के कारण और पुतले में इस्तेमाल की गई सामग्री को लेकर अलग-अलग शुरुआती विवरण सामने आए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही विस्फोट की वजह स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस और दमकल विभाग ने शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस के साथ मुख्य अग्निशमन अधिकारी गाजियाबाद, साहिबाबाद के अग्निशमन अधिकारी और फायर स्टेशन साहिबाबाद की टीम मौके पर पहुंची। दमकल विभाग के अनुसार, सुबह 9:26 बजे कंट्रोल रूम को आरटी सेट के जरिए सूचना मिली थी। शुरुआती संदेश में रामलीला मैदान, शनि चौक स्थित पटाखों की दुकान में आग लगने की जानकारी दी गई थी।
सूचना के बाद साहिबाबाद फायर स्टेशन से तीन दमकल गाड़ियां घटनास्थल के लिए रवाना की गईं। टीम ने मौके पर पहुंचकर परिसर और आसपास के हिस्सों का बारीकी से निरीक्षण किया। अग्निशमन विभाग ने अपने शुरुआती आकलन में कहा कि पुतला तैयार करने में आतिशबाजी या किसी अन्य विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी सामग्री में विस्फोट के बाद आग लगी हो सकती है। विभाग ने यह भी बताया कि धमाके से भवन की दो दीवारें क्षतिग्रस्त होकर गिर गईं।
पटाखे बनाने की बात गलत: एसीपी
एसीपी साहिबाबाद अमित सक्सेना के मुताबिक, सामुदायिक केंद्र में पटाखे बनाने की बात सही नहीं है। वहां दशहरा कार्यक्रम के लिए रावण का पुतला तैयार किया जा रहा था। उनके अनुसार, काम के दौरान आग लगी और उसके बाद विस्फोट हुआ। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पुतले में किस तरह की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था तथा आग कैसे शुरू हुई।
दमकल विभाग की शुरुआती सूचना में घटनास्थल को पटाखों की दुकान बताया गया था, जबकि पुलिस अधिकारी ने वहां पटाखे बनाए जाने की बात से इनकार किया है। फिलहाल अधिकारियों ने घटना को पुतला तैयार करने के दौरान हुए हादसे के रूप में देखा है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों से यह स्पष्ट होगा कि विस्फोट का कारण आतिशबाजी की सामग्री थी या कोई अन्य ज्वलनशील अथवा विस्फोटक पदार्थ।

घायलों का अस्पताल में इलाज
हादसे में घायल पांच लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। दो घायलों को सफदरजंग अस्पताल और तीन को जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी चोटों और स्वास्थ्य की स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी अधिकारियों की ओर से साझा नहीं की गई है। पुलिस और प्रशासन घायलों के उपचार से जुड़ी जानकारी जुटा रहे हैं।
घटना के बाद सुरक्षा और निर्माण प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। अधिकारी यह देखेंगे कि पुतला तैयार करने के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं, काम के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम मौजूद थे या नहीं और परिसर में विस्फोटक या आतिशबाजी सामग्री रखने के नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
दशहरा तैयारियों के बीच सुरक्षा पर सवाल
दशहरा से पहले कई जगहों पर रावण के पुतले तैयार किए जाते हैं। इस प्रक्रिया में ज्वलनशील और आतिशबाजी से जुड़ी सामग्री का इस्तेमाल जोखिम पैदा कर सकता है, खासकर जब काम बंद या सीमित जगह में हो। साहिबाबाद की घटना ने पुतला निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था, सामग्री के सुरक्षित भंडारण और प्रशिक्षित कर्मचारियों की मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
पुलिस और दमकल विभाग की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल के निरीक्षण और उपलब्ध जानकारी के आधार पर विस्फोट के कारणों का पता लगाया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि हादसे के लिए कौन-सी सामग्री जिम्मेदार थी और सुरक्षा में कोई चूक हुई थी या नहीं।























