आज, राष्ट्रीय खेल परिषद ऑफ इंडिया (NSCI), प्रगति मैदान में रामायण रिसर्च काउंसिल द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य “रामायणी सम्मान 2026” के आयोजन की तिथियों, उद्देश्य और समर्पित परियोजनाओं की जानकारी साझा करना था। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश के प्रख्यात विद्वानों, राजनीतिक नेताओं, धर्मगुरुओं और मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अनेक महत्वपूर्ण जानकारियों का आदान-प्रदान किया गया।
“रामायणी सम्मान 2026”: महत्व और आयोजन की तिथियां
काउंसिल ने घोषणा की कि “रामायणी सम्मान 2026” का आयोजन 19 अगस्त 2026 को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी में किया जाएगा। यह आयोजन भगवान श्रीराम की जयंती के शुभ अवसर पर आयोजित किया जाएगा, जिसे पूरे देश में रामायण के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। इस खास अवसर पर, देशभर से चुने गए 28 विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा।
यह सम्मान उन व्यक्तियों को दिया जाएगा जिन्होंने रामायण और भगवान श्रीराम के जीवन और आदर्शों को प्रचार-प्रसार में विशेष योगदान दिया है। इनमें साहित्यकार, संगीतकार, सामाजिक कार्यकर्ता, धार्मिक शिक्षाविद और संस्कृतिकर्मी शामिल हैं। काउंसिल का मानना है कि इस सम्मान से भारतीय संस्कृति और रामायण के मूल्यों का प्रसार और संरक्षण किया जा सकेगा।
बिहार में मां सीता मंदिर का निर्माण: एक भव्य परियोजना
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि बिहार सरकार द्वारा सीतामढ़ी जिले में एक भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल का निर्माण किया जा रहा है। यहाँ 12 एकड़ भूमि पर माता सीता (शक्ति स्थल) मंदिर का निर्माण हो रहा है। इस परियोजना का भूमि पूजन अप्रैल 2026 में बिहार के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में किया गया था। यह मंदिर भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक स्मारकों का प्रतीक होगा, जो आने वाली पीढ़ियों को रामायण के मूल संदेशों से जोड़ने में सहायक साबित होगा।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता का महत्वपूर्ण सुझाव: रामायण फिल्में और उनकी सत्यता
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. भारत नागर ने मीडिया के सामने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने हाल ही में रिलीज हुई “रामायण” फिल्म के ट्रेलर को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की और कहा कि इस ट्रेलर को देखकर यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि यह रामायण है या महाभारत।
डॉ. नागर ने कहा, “मैंने ट्रेलर देखा, लेकिन मुझे यह समझ में नहीं आया कि यह रामायण है या महाभारत। भगवान श्रीराम का स्वरूप पारंपरिक मर्यादा और सौम्यता के अनुरूप नहीं दिखाया गया है। यह दर्शाता है कि फिल्म का निर्माण पूरी तरह से शोध और सही जानकारी के बिना किया गया है।”
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सेंसर बोर्ड को इस फिल्म को प्रमाणित करने से पहले रामायण रिसर्च काउंसिल के विद्वानों को फिल्म दिखानी चाहिए ताकि किसी भी तरह की त्रुटियों को पहले ही सुधार लिया जाए। “आदिपुरुष” फिल्म का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गलत प्रस्तुतियों से न केवल धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, बल्कि नई पीढ़ी के मन में गलत संदेश भी जाता है।
सामाजिक और धार्मिक संगठनों का रुख: सही जानकारी और मर्यादा का महत्व
अजय भट्ट, जो कि सांसद और पूर्व रक्षा राज्य मंत्री हैं, ने कहा कि रामायण रिसर्च काउंसिल की स्थापना का मुख्य उद्देश्य है कि रामायण से जुड़ी सही और सटीक जानकारियां जनता तक पहुंचे। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि फिल्म निर्माता पूरी रिसर्च के बाद ही फिल्म बनाएं ताकि गलत जानकारियों का प्रसार न हो। हमारे संस्कार और धार्मिक मूल्यों को सुरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।”
साध्वी प्रज्ञा भारती का बयान: माता सीता का चरित्र
साध्वी प्रज्ञा भारती ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अक्सर फिल्मों में माता सीता का चरित्र गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने कहा, “माता सीता को कमजोर या अबला के रूप में दिखाना पूरी तरह से गलत है। वह एक सशक्त और आदर्श नारी हैं, जिन्होंने अपने धर्म, मर्यादा और संस्कारों का पालन करते हुए हर परिस्थिति का सामना किया।” उन्होंने आश्वस्त किया कि भारतीय संस्कृति में माता सीता का चरित्र बहुत ही सम्मानित है और इसे सही रूप में प्रस्तुत करना चाहिए।
“रामायणी सम्मान”: उद्देश्य और लक्ष्य
काउंसिल के पदाधिकारियों ने अंत में कहा कि “रामायणी सम्मान” का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति, रामायण परंपरा, नैतिक मूल्यों और धार्मिक जागरूकता को समाज में मजबूत करना है। उनका मानना है कि यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों को रामायण के मूल संदेशों से जोड़ने का एक माध्यम है।
उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि बच्चे, युवा और वयोवृद्ध सभी रामायण की शिक्षाओं को समझें और अपने जीवन में अपनाएं। यह सम्मान न केवल एक सम्मान है, बल्कि एक मिशन है, जो भारतीय संस्कृति और संस्कारों को संरक्षित करने के लिए समर्पित है।”
आगे की योजनाएं और उम्मीदें
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में, काउंसिल ने बताया कि आगामी महीनों में वे विभिन्न राज्यों में रामायण से संबंधित वर्कशॉप, सेमिनार, और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेंगे। साथ ही, नई पुस्तकों, डॉक्यूमेंट्री और वीडियो प्रोजेक्ट्स के माध्यम से रामायण के संदेशों को जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
उनका यह भी लक्ष्य है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का बेहतर इस्तेमाल कर युवा पीढ़ी को रामायण और भारतीय संस्कृति के मूल्यों से जोड़ा जाए।

























