राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे की गिनती के दौरान हुई चोरी का मामला पुलिस की चार्जशीट में विस्तार से दर्ज है। दस्तावेजों के मुताबिक, चोरी की जानकारी एक वीडियो और संदेश के जरिए ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय तक पहुंची थी। गणना कक्ष में जांच के दौरान बाथरूम से 2 लाख 25 हजार रुपये मिले।
बाद में आरोपियों के पास बची नकदी, दूसरी मुद्राएं और आभूषण चंपत राय, गोपाल तथा ट्रस्ट के अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी में सौंपे गए। चार्जशीट के अनुसार, पुलिस द्वारा माल कब्जे में लेने से पहले यह सामान 21 दिन तक ट्रस्ट की सुपुर्दगी में रहा।
वीडियो से मिली चोरी की जानकारी
चार्जशीट में दिए बयान के अनुसार, चंपत राय 4 जून को दिल्ली से ट्रेन से अयोध्या लौट रहे थे। रात करीब पौने दस बजे उनके मोबाइल पर आनंद चौधरी का वीडियो और लिखित संदेश आया। वीडियो में गणना कक्ष के बाथरूम में नोटों की गड्डियां दिखाई दे रही थीं। संदेश में बताया गया था कि बाथरूम से यह रकम मिली है और कुछ लोग कई दिनों से चोरी कर रहे हैं।
अगले दिन, 5 जून को अनिल मिश्रा, गोपालराव और नरेंद्र चंपत राय के आवास पर पहुंचे। उन्होंने लैपटॉप पर कुछ वीडियो दिखाए। चार्जशीट के मुताबिक, संबंधित लोगों ने भी इस मुलाकात और वीडियो दिखाए जाने की पुष्टि की।
गणना कक्ष में कैसे पकड़ी गई चोरी?
गवाह आनंद चौधरी ने पुलिस को बताया कि घर जाने के समय गणना कक्ष में मौजूद कर्मचारियों ने उन्हें रोक लिया था। उस वक्त बैंक की ओर से सत्या और ट्रस्ट की ओर से विनय श्रीवास्तव समेत अन्य कर्मचारी वहां मौजूद थे। इसी दौरान बाथरूम से 2 लाख 25 हजार रुपये बरामद हुए।

आनंद चौधरी के बयान के अनुसार, गिनती के दौरान करुणेश पाण्डेय, अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा पर शक हुआ। उन्होंने कथित तौर पर कुछ कर्मचारियों को दान में आए नोटों की गड्डियां उठाकर मेज के नीचे कमर में छिपाते देखा था। चार्जशीट में संत वर्मा का भी जिक्र है। बताया गया है कि 4 जून को अविनाश शुक्ला को नोटों की गड्डी लेते हुए संत वर्मा ने देखा और इसकी सूचना विनय श्रीवास्तव तथा एसबीआई कर्मचारी सत्य प्रकाश को दी।
इसके बाद गणना कक्ष के बाहर जांच शुरू की गई। चार्जशीट के मुताबिक, गेट पर चेकिंग की जानकारी मिलने पर कथित तौर पर चोरी की रकम बाथरूम में छिपाई गई। तलाशी के दौरान वहीं से 2 लाख 25 हजार रुपये मिले।
चोरी का माल चंपत राय और गोपाल को सौंपा गया
मामले में ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और राम जन्मभूमि परिसर का निरीक्षण किया। चार्जशीट के अनुसार, छह आरोपियों ने पूछताछ में गणना कक्ष से चढ़ावे की रकम चोरी करने की बात स्वीकार की।
पुलिस दस्तावेजों में यह भी दर्ज है कि चोरी पकड़े जाने के बाद बची हुई नकदी, अन्य मुद्रा और आभूषण चंपत राय, गोपाल तथा ट्रस्ट के अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी में सौंपे गए थे। इसके लिए सहमति पत्र और सुपुर्दगी से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए। बाद में सामान ट्रस्ट के लॉकर में रखवाया गया।
21 दिन बाद पुलिस ने लॉकर से लिया कब्जे में
चार्जशीट के मुताबिक, एफआईआर दर्ज होने और पुलिस की विवेचना शुरू होने के बाद आरोपियों से पूछताछ की गई। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने ट्रस्ट के लॉकर कक्ष से चोरी का माल अपने कब्जे में लिया। इस तरह बरामदगी और पुलिस के कब्जे में आने के बीच सामान 21 दिन तक ट्रस्ट की सुपुर्दगी में रहा।
पुलिस जांच में बरामद माल को दर्ज करने और कब्जे में लेने की प्रक्रिया भी अहम रही। चोरी का सामान किसी व्यक्ति या संस्था के पास मिले, तो आम तौर पर उसकी सूचना पुलिस को देकर नियमानुसार सुपुर्दगी और जब्ती की कार्रवाई की जाती है। इस मामले में माल पहले ट्रस्ट के कर्मचारियों को सौंपे जाने और बाद में लॉकर से पुलिस द्वारा लिए जाने का विवरण चार्जशीट में शामिल है।
चार्जशीट में दर्ज बयान और आरोप
चार्जशीट में दर्ज गवाहों के बयान चोरी की जानकारी मिलने, गणना कक्ष में जांच होने और रकम बाथरूम से बरामद होने की घटनाओं का क्रम बताते हैं। इसमें चंपत राय का बयान भी शामिल है, जिसमें उन्होंने वीडियो और संदेश मिलने तथा अगले दिन वीडियो दिखाए जाने का जिक्र किया है। आनंद चौधरी और अन्य गवाहों के बयान में गणना कक्ष के कर्मचारियों पर शक, चेकिंग और नकदी की बरामदगी का विवरण है।
यह मामला चढ़ावे की गिनती के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, नकदी के प्रबंधन और बरामद सामान की औपचारिक सुपुर्दगी जैसे सवालों को भी सामने लाता है। हालांकि, आरोपों और बयानों का अंतिम निष्कर्ष अदालत की सुनवाई तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगा। चार्जशीट में दर्ज विवरण पुलिस जांच का हिस्सा हैं; इन्हें अदालत के अंतिम फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।























