Farmers’ Delhi March:वर्तमान समय में दिल्ली में राजनीतिक और सामाजिक माहौल गर्माया हुआ है, जहां एक ओर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के पेपर लीक के मुद्दे ने जनता का ध्यान भटका दिया है, वहीं दूसरी ओर किसान आंदोलन ने देश की राजनीति को गरम कर दिया है। इन सबके बीच पंजाब से दिल्ली की ओर किसानों का विशाल हुजूम रवाना हो चुका है, जो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध करने के लिए राजधानी का रुख कर रहे हैं। यह आंदोलन किसानों की आक्रोश और सरकार के खिलाफ उनके असंतोष का प्रतीक बन चुका है।
किसानों का दिल्ली की ओर कूच और सरकार की तैनाती
बता दें कि पंजाब से दिल्ली की ओर किसानों का काफिला लगातार बढ़ रहा है। किसान संगठनों का कहना है कि वे इस व्यापार समझौते का विरोध कर रहे हैं, जिसे वे किसान विरोधी मानते हैं। किसानों का आरोप है कि यह समझौता देश की कृषि व्यवस्था, फसलों की कीमतें और स्वदेशी उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। किसान नेताओं का मानना है कि यदि इस समझौते को लागू किया गया, तो इससे घरेलू बाजार में विदेशी वस्तुओं की कीमतें कम हो जाएंगी, जिससे देश के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
वहीं, हरियाणा पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए हैं। शंभू बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात कर दी गई है, और पुलों पर बैरिकेडिंग लगाई गई है। किसानों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं और किसी भी तरह से अपने आंदोलन को रोकने नहीं देंगे। किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने हरियाणा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि नायब सिंह सैनी जैसे नेता किसानों को महापंचायत में भाग लेने से रोक रहे हैं, जो उनके खिलाफ एक स्पष्ट संदेश है। उनका आरोप है कि सरकार किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
किसानों का विरोध और महापंचायत का आह्वान
पंजाब के किसान ‘देश बचाओ मोर्चा’ के तहत एक दिन की किसान महापंचायत करने का निर्णय लिया है। इस महापंचायत का उद्देश्य सरकार को अपने विरोध का स्पष्ट संदेश देना है। किसान घाट पहुंचकर अपने हक की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। उनका दावा है कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौता किसान विरोधी है और इससे देश की आत्मनिर्भरता पर खतरा मंडरा रहा है। किसान नेताओं का कहना है कि वे इस समझौते को पूरी तरह रद्द करने की मांग कर रहे हैं और इसके खिलाफ लगातार आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों का दिल्ली पहुंचने का सिलसिला जारी है। पंजाब के विभिन्न हिस्सों से बसों में सवार होकर किसान दिल्ली की तरफ रवाना हो चुके हैं। फतेहगढ़ साहिब में पत्रकारों से बात करते हुए किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री ने अपना असली चेहरा दिखा दिया है। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद ये नेता जनता से किए गए वादों को भूल जाते हैं और दमनकारी नीति अपनाते हैं। उनका कहना है कि किसानों का सपना है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को रद्द किया जाए, ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।
शंभू बॉर्डर पर किसानों का जत्था पहुंचने के बाद बातचीत की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस जत्थे में 1000 से अधिक किसान शामिल हैं, जो पहले सरहिंद पहुंचे और फिर शंभू बॉर्डर की ओर कूच कर गए। किसानों का कहना है कि वे अपनी आवाज को दबने नहीं देंगे और अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहेंगे।
कृषि आंदोलन में गिरफ्तारी और सरकार का रवैया
इस आंदोलन के दौरान हरियाणा पुलिस ने किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया है। भारतीय किसान यूनियन के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी को कुरुक्षेत्र में हिरासत में लिया गया है, जब वे दिल्ली की ओर कूच कर रहे थे। किसानों का आरोप है कि पुलिस बड़ी संख्या में लोगों को जबरदस्ती हिरासत में ले रही है, ताकि उनके आंदोलन को कमजोर किया जा सके। किसानों का कहना है कि यह दबाव और दमनपूर्ण रवैया उनके आंदोलन को कमजोर नहीं कर सकेगा।
विपक्ष और किसान संगठनों की भूमिका
किसानों का विरोध केवल सरकार के खिलाफ ही नहीं है, बल्कि वह देश की आर्थिक नीतियों और विदेशी व्यापार समझौतों के खिलाफ भी है। उनका मुख्य तर्क है कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौता देश के किसानों की फसलों की कीमतों को गिरा देगा और घरेलू बाजार को विदेशी वस्तुओं से भर देगा। इससे न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि देश की स्वावलंबी कृषि व्यवस्था को भी खतरा पैदा हो जाएगा।
किसान संगठनों ने सरकार से यह अपील की है कि वे इस समझौते को तुरंत रद्द करें और किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करें। उनका कहना है कि यदि सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है, और सरकार को भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।


























