प्रोफेसर सुमन: सड़क सुरक्षा पुलिस की नहीं, सबकी जिम्मेदारी

एससीईआरटी दिल्ली के क्षमता निर्माण कार्यक्रम में प्रोफेसर हंसराज सुमन ने शिक्षकों को सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों और विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने के उपाय बताए।

प्रोफेसर सुमन: सड़क सुरक्षा में जनभागीदारी जरूरी

HIGHLIGHTS

  • प्रोफेसर सुमन बोले: सुरक्षित यातायात सबकी जिम्मेदारी
  • प्रोफेसर सुमन: सड़क सुरक्षा पुलिस की नहीं, सबकी जिम्मेदारी
  • प्रोफेसर सुमन ने जगाई सड़क सुरक्षा की अलख
  • प्रोफेसर सुमन: जिम्मेदार नागरिक ही बनाएंगे सुरक्षित सड़कें

नई दिल्ली, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), दिल्ली के तत्वावधान में राजकीय सर्वोदय कन्या विद्यालय, विश्वास नगर, शाहदरा, दिल्ली में पीजीटी अंग्रेजी शिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक कौशल को और अधिक प्रभावी बनाना तथा उन्हें शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों के प्रति जागरूक करना रहा।

सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों पर विशेष सत्र का आयोजन

इसी क्रम में कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों की जानकारी देने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के अरबिंदो कॉलेज में प्रोफेसर हंसराज सुमन को विशिष्ट वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया। उन्होंने सुरक्षित यातायात व्यवहार को अपने जीवन का हिस्सा बनाने के लिए शिक्षकों को प्रेरित किया।

कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के शिक्षकों को सड़क पर सुरक्षित आवागमन, यातायात नियमों के पालन और सड़क सुरक्षा के प्रति व्यक्तिगत एवं सामाजिक जिम्मेदारी के बारे में विस्तार से बताया गया। प्रोफेसर सुमन ने शिक्षकों को समझाया कि सड़क सुरक्षा केवल यातायात पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। सड़क पर वाहन चलाते समय अथवा पैदल चलते समय छोटी-सी असावधानी भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। ऐसे में यातायात नियमों का पालन करना न केवल स्वयं की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि दूसरे सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

शिक्षक समाज के मार्गदर्शक, सड़क सुरक्षा के प्रति भी निभाएं जिम्मेदारी

कार्यशाला में आए शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रोफेसर हंसराज सुमन ने सड़क सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सड़क पर हमारी एक छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। इसलिए उनका दायित्व केवल कक्षा में विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण व्यवहारों और जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक करना है।

प्रोफेसर सुमन ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे स्वयं यातायात नियमों का पूरी गंभीरता से पालन करें और अपने व्यवहार के माध्यम से विद्यार्थियों के सामने उदाहरण प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक स्वयं हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने, यातायात संकेतों का सम्मान करने और सड़क पार करते समय सावधानी बरतने जैसे नियमों का पालन करेंगे, तो विद्यार्थी भी उनसे प्रेरणा लेंगे। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को सड़क पर जिम्मेदारी से चलने तथा दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखने के लिए प्रेरित करने की अपील की।

सड़क दुर्घटनाओं से बचने के लिए यातायात नियमों का पालन जरूरी

कार्यशाला के दौरान प्रोफेसर हंसराज सुमन द्वारा सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। शिक्षकों को बताया गया कि वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना, तेज गति से वाहन चलाना, बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाना, सीट बेल्ट का उपयोग न करना और यातायात संकेतों की अनदेखी करना दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शामिल हो सकते हैं। ऐसे व्यवहार से बचने के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करना आवश्यक है।

शिक्षकों को यह भी समझाया गया कि सड़क पर थोड़ी-सी सावधानी और धैर्य बरतकर दुर्घटनाओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों को विशेष रूप से विद्यार्थियों की भूमिका के बारे में भी जागरूक किया। विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थी सड़क सुरक्षा संबंधी संदेशों को अपने परिवार और आसपास के लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि विद्यार्थियों को छोटी उम्र से ही सड़क सुरक्षा के नियमों की जानकारी दी जाए और उन्हें नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया जाए, तो भविष्य में जिम्मेदार और जागरूक नागरिक तैयार किए जा सकते हैं। इस दृष्टि से विद्यालय सड़क सुरक्षा जागरूकता का एक प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

सड़क सुरक्षा पर असरदार स्लोगन से विद्यार्थियों को किया जाएगा जागरूक

प्रोफेसर सुमन ने शिक्षकों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न असरदार स्लोगन भी बताए। उन्होंने कहा कि इन स्लोगनों के माध्यम से विद्यालयों में पोस्टर तैयार करके विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा सकता है।

सड़क सुरक्षा के प्रमुख स्लोगन:

  • जल्दबाजी नहीं, जिंदगी प्यारी।
  • फोन बाद में, जीवन पहले।
  • धीरे चलो, सुरक्षित चलो।
  • नशे में ड्राइविंग, मौत को इनवाइटिंग।
  • आपका इंतजार कोई घर पर कर रहा है।
  • स्टाइल नहीं, सुरक्षा चुनो।
  • सड़क सुरक्षा, सबकी सुरक्षा।
  • सड़क सुरक्षा, जीवन रक्षा।
  • धीरे चलो, सुरक्षित चलो।
  • हेलमेट पहनो, सुरक्षित रहो।

इसके अलावा प्रश्नोत्तरी व वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के माध्यम से भी विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा के नियमों और उनके महत्व से परिचित कराना शिक्षकों का कर्तव्य है।

विद्यालयों में पोस्टर, स्लोगन और प्रश्नोत्तरी से बढ़ेगी सड़क सुरक्षा जागरूकता

कार्यशाला में प्रोफेसर हंसराज सुमन ने इस बात पर भी जोर दिया कि सड़क सुरक्षा को केवल एक विषय के रूप में देखने के बजाय इसे दैनिक जीवन के व्यवहार से जोड़ना चाहिए। विद्यार्थियों को सड़क पार करते समय जेब्रा क्रॉसिंग या सुरक्षित स्थानों का इस्तेमाल करने, ट्रैफिक सिग्नल का पालन करने और चलते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करने जैसे व्यवहारों के बारे में जागरूक किया जा सकता है।

इसी प्रकार दोपहिया वाहन चलाने वाले विद्यार्थियों और उनके परिवारों को हेलमेट के महत्व के बारे में जानकारी देना भी जागरूकता अभियान का हिस्सा बनाया जा सकता है। एससीईआरटी दिल्ली द्वारा आयोजित क्षमता निर्माण कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों के ज्ञान और कौशल को विकसित करने के साथ-साथ उन्हें बदलते सामाजिक परिवेश और नागरिक जिम्मेदारियों से जोड़ना भी रहा।

शिक्षकों के लिए आयोजित ऐसी कार्यशाला / कार्यक्रम उनके व्यावसायिक विकास के साथ सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार, संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनाना भी है।

सड़क सुरक्षा जागरूकता में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण

प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया कि सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता पैदा करने में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक अपने विद्यालयों में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को यातायात नियमों की जानकारी दे सकते हैं। सड़क सुरक्षा विषय पर चर्चा, पोस्टर एवं स्लोगन प्रतियोगिता, जागरूकता रैली, प्रश्नोत्तरी और विशेष कक्षा गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में सड़क सुरक्षा के प्रति रुचि और जिम्मेदारी की भावना विकसित की जा सकती है।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने सड़क सुरक्षा से जुड़े विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं और विचार भी साझा किए। चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि सड़क सुरक्षा के संदेश को केवल विद्यालय परिसर तक सीमित न रखते हुए समाज के व्यापक स्तर तक पहुंचाने की आवश्यकता है। शिक्षक विद्यार्थियों के माध्यम से परिवारों तक भी जागरूकता का संदेश पहुंचा सकते हैं। इससे सड़क सुरक्षा के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी।

यातायात नियमों का पालन अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए जरूरी

प्रोफेसर हंसराज सुमन ने यह संदेश भी दिया कि यातायात नियमों का पालन किसी मजबूरी के कारण नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। सड़क पर हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह अपने व्यवहार से दुर्घटना की संभावना को कम करे।

पैदल यात्री, साइकिल चालक, दोपहिया वाहन चालक और कार चालक सभी सड़क सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं और सभी को एक-दूसरे की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रोफेसर सुमन ने कहा कि जागरूकता तभी प्रभावी होती है जब वह व्यवहार में दिखाई दे। इसलिए शिक्षकों को स्वयं सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करते हुए विद्यार्थियों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक शिक्षक द्वारा दिया गया सड़क सुरक्षा का संदेश कई विद्यार्थियों तक पहुंच सकता है और विद्यार्थी उस संदेश को अपने परिवार और समाज तक ले जा सकते हैं।

शिक्षकों ने सड़क सुरक्षा नियमों के पालन का लिया संकल्प

कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों ने सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने तथा विद्यार्थियों और समाज के बीच इसके प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के द्वारा यह संदेश स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा केवल यातायात व्यवस्था से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकार है।

यदि शिक्षक, विद्यार्थी, अभिभावक और समाज के सभी वर्ग मिलकर यातायात नियमों का पालन करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें, तो सड़क दुर्घटनाओं को कम करने की दिशा में सार्थक प्रयास किए जा सकते हैं। इस प्रकार एससीईआरटी दिल्ली का यह क्षमता निर्माण कार्यक्रम शिक्षकों के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास के साथ-साथ उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति संवेदनशील बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा।

कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा को लेकर दिया गया संदेश शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों और व्यापक समाज तक पहुंचाने की उम्मीद जताई गई। इस कार्यक्रम का सम्पूर्ण आयोजन सहायक प्रोफेसर डॉ. राघव आचार्य ने किया।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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