Severe Sankashti Chaturthi : हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। मासिक चतुर्थी व्रत और संकष्टी चतुर्थी का प्रत्येक महीने आयोजन किया जाता है, लेकिन वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का अपना एक अलग ही महत्व है। यह तिथि भगवान गणेश के अष्टविनायक रूपों में से एक ‘विकट स्वरूप’ को समर्पित होती है।
विशेषज्ञ सत्य ऋषि कहते है कि विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन गवान गणेश की सही विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के विकट से विकट संकट (ज्ञात-अज्ञात भय, रोग, शोक एवं दुर्घटनाएं) दूर हो जाते हैं। यदि आप भी इस दिन व्रत रखने जा रहे हैं, तो पूजा से पहले सामग्री की पूरी तैयारी कर लें। यहां जानिए विकट संकष्टी चतुर्थी की पूजा की पूरी लिस्ट:
विकट संकष्टी चतुर्थी पूजन सामग्री
पूजा आरंभ करने से पहले एक थाली तैयार करें जिसमें निम्नलिखित सामग्री होना अनिवार्य है:
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- मूर्ति/चित्र: भगवान गणेश की धातु, मिट्टी या कागज की प्रतिमा या चित्र।
- अक्षत: टूटे हुए नहीं, पूरे अनाज (चावल)।
- रोली और कुमकुम: पूजा के लिए सिंदूर और रोली।
- चंदन: पूजा में तिलक लगाने के लिए चंदन का पेस्ट।
- दूर्वा: गणेश जी को दूर्वा (डूब घास) बेहद प्रिय है।
- धूप और अगरबत्ती: पूजा के दौरान धूपबत्ती और अगरबत्ती जलाने के लिए।
- दीपक: शुद्ध घी से भरा दीपक (सामने की ओर मुंह किया हुआ)।
- कलश: तांबे का कलश जिसमें गंगाजल भरा हो।
- मौली: लाल रंग का धागा (कलश और मूर्ति को बांधने के लिए)।
- सुपारी और नारियल: पूजन के लिए सुपारी और जल से भरा नारियल।
- कपूर: आरती के बाद कपूर दिखाने के लिए।
- आरती की थाली: घंटी, थाली और गणेश आरती की पुस्तिका।
- फूल और पत्ते: लाल और पीले रंग के फूल (गुलाब, गेंदा) तथा पत्ते।
- फल: सेब, केला, संतरा, अनार आदि फल।
- मिठाई (भोग): बप्पा को सबसे प्रिय लड्डू और मोदक।
बप्पा को प्रसन्न करने के लिए करें ये ‘विशेष’ अर्पण:
अगर आप चाहते हैं कि इस शुभ दिन पर गवान गणेश आपकी हर मनोकामना जल्दी पूर्ण करें, तो पूजा में उनकी कुछ विशेष प्रिय चीजों को शामिल करना न भूलें:
- 21 दूर्वा और लाल सिंदूर: गणेश जी को तीन तरीकों से 21 दूर्वा अर्पित करना का विशेष नियम है। इसके साथ ही उनकी मूर्ति पर लाल सिंदूर का तिलक जरूर करें। माना जाता है कि लाल सिंदूर गणेश जी को अत्यंत प्रिय है।
- लाल या पीले वस्त्र: पूजा के दौरान गणपति जी को लाल या पीले रंग का वस्त्र (धोती/कपड़ा) और जनेऊ अर्पित करें।
- हल्दी की गांठ: पूजा की थाली में एक हल्दी की गांठ अवश्य रखें, इसे सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
- पसंदीदा भोग: भोग लगाने के बाद जब आरती हो जाए, तो बप्पा को मोदक और बेसन के लड्डुओं का भोग जरूर लगाएं।
पूजा का संकल्प और पारण:
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आज सुबह स्नान के बाद साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर पूजा स्थल पर बैठें। सर्वप्रथम गणेश जी का ध्यान, आवाहन और संकल्प लें। इसके बाद उपरोक्त सामग्री से पूजन करें। व्रत रखने वाले भक्तों को चांद निकलने के बाद ही जल अर्पित कर व्रत का पारण करना चाहिए।
























