Gurugram News: गुरुग्राम के व्यस्ततम इलाकों में गुजरने वाले ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के पहले चरण के निर्माण को लेकर एक बार फिर से निराशा का माहौल है। जिस परियोजना को शहर के ट्रैफिक बोझ को कम करने का जरिया माना जा रहा था, वह अब तमाम चुनौतियों के बीच अटकी हुई नजर आ रही है। सबसे बड़ी परेशानी इस मेट्रो मार्ग और स्टेशनों के निर्माण स्थल पर बने 10 आवासीय मकान हैं, जिन्हें हटाने के लिए अभी तक कोई ठोस निकास नहीं निकल पाया है।
10 मकानों का अड़चनदार सिलसिला
गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) के सामने सबसे पेचीदा मसला ये 10 मकान हैं। जानकारी के अनुसार, हीरो होंडा चौक से लेकर उमंग भारद्वाज चौक के बीच के मेट्रो कॉरिडोर पर करीब छह मकान सीधे तौर पर आ रहे हैं। इन छह मकानों में सेक्टर-10 मेट्रो स्टेशन के निर्माण स्थल पर दो मकान शामिल हैं। यह सभी मकान ‘सरस्वती इंक्लेव कॉलोनी’ में स्थित हैं और इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यह मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
इसी तरह, सेक्टर-37 में जिस स्थान पर मेट्रो स्टेशन बनाने की योजना है, वहां आसपास के बसई गांव के चार मकान और कुछ दुकानें मेट्रो ट्रैक के रास्ते में बाधा बन रही हैं। जब तक इन मकानों के मालिकों के साथ मुआवजे या बेदखली का कोई निस्तारण नहीं होता, तब तक यहां मशीनों को चलाना नामुमकिन है।
यूटिलिटी शिफ्टिंग का अड़चनदार चक्रव्यूह
मकानों के अलावा तमाम सरकारी और प्राइवेट यूटिलिटीज भी मेट्रो निर्माण की रफ्तार को धीमा कर रही हैं। जीएमडीए (गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी) के सेक्टर-10 स्थित बस डिपो, सेक्टर-37 से लेकर बसई तालाब तक का क्षेत्र और सेक्टर-नौ में बिछी ‘हरियाणा सिटी गैस’ (HCG) की पाइपलाइनें इसकी जिंदानी मिसाल हैं।
हालांकि, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने हरियाणा सिटी गैस को इन गैस लाइनों को हटाने का कई बार आग्रह किया है, लेकिन कंपनी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। दरअसल, हरियाणा सिटी गैस ने एक नया सीएनजी स्टेशन विकसित करने और पुराने स्टेशन को हटाने के बदले में मुआवजे की मांग रखी है। इस विवाद को लेकर कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है, जिसकी अगली सुनवाई 24 अगस्त को होने वाली है। कानूनी उलझनों के चलते गैस लाइन शिफ्ट नहीं हो पा रही, जिससे पूरी परियोजना पर पड़े प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बिजली, पानी और जमीन अधिग्रहण की पेचीदगियां
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो मार्ग पर एक बड़ी तकनीकी बाधा 66 केवी (kV) क्षमता के बिजली घर और ऊपर गुजर रही बिजली की तारों के रूप में सामने आई है। इन तारों को हटाने के लिए बिजली विभाग को कुल 17 इंडीपेंडेंट फीडर (Independent Feeders) को अन्यत्र शिफ्ट करना होगा, जो एक लंबा और जटिल काम है। इसके अलावा, 1600 एमएम (MM) चौड़ी पानी की सप्लाई पाइपलाइन भी अभी तक अपने नए स्थान पर स्थानांतरित नहीं हो पाई है।
वहीं, जमीन अधिग्रहण का मसला भी हल्का नहीं है। मेट्रो कॉरिडोर के लिए कन्हेई, इस्लामपुर और बसई गांव की कृषि और आवासीन भूमि की जरूरत है। भूमि अधिग्रहण विभाग ने भले ही वर्तमान बाजार भाव के आधार पर मूल्यांकन का काम पूरा कर लिया हो, लेकिन कई जमीन मालिकों की तरफ से अभी तक सहमति नहीं मिलने के कारण जमीन खरीद प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई है।
सड़क परियोजनाओं का डिजाइन पर असर
उद्योग विहार फेज-छह में बनने वाला मेट्रो स्टेशन एक अलग तरह की समस्या का सामना कर रहा है। हीरो होंडा चौक से उमंग भारद्वाज चौक के बीच सड़क चौड़ीकरण और एलिवेटेड (उन्नत) सड़क निर्माण की परियोजना का अंतिम डिजाइन अभी तक फाइनल नहीं हो पाया है।
इस असमंजस का सीधा असर मेट्रो स्टेशन के डिजाइन पर पड़ रहा है। योजना के अनुसार, इस स्टेशन पर यात्रियों के सड़क पार करने के लिए एक फुट ओवर ब्रिज (FOB) का निर्माण किया जाना है। लेकिन सवाल यह है कि अगर यहां एलिवेटेड रोड बनता है, तो एफओबी का डिजाइन बदलकर उसे एलिवेटेड रोड के नीचे से गुजारना होगा। जब तक सड़क विभाग और एनएचएआई अपने डिजाइन को लेकर स्पष्ट नहीं होते, तब तक मेट्रो का निर्माण यहां शुरू नहीं हो सकता।
एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी और आगामी बैठक
पूरे मामले की सबसे दुखद बात यह है कि जीएमआरएल लगातार एनएचएआई और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर इन अड़चनों को दूर करने की गुहार लगा रहा है, लेकिन इन संबंधित एजेंसियों का रवैया अत्यंत उदासीन रहा है। किसी भी बड़ी बुनियादी ढांचे की परियोजना को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सबसे जरूरी होता है, जो यहां नजर नहीं आ रहा।
हालांकि, अब एक नई उम्मीद जगी है। हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में 13 अगस्त को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े सभी विवादों, बाधाओं और यूटिलिटी शिफ्टिंग के मसलों पर गहन चर्चा होने की संभावना है।
शहर के लाखों यात्रियों को इस बैठक से काफी उम्मीदें हैं। यदि 13 अगस्त को कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया और एजेंसियों को जवाबदेह नहीं बनाया गया, तो ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो का सपना लंबे समय तक कागजों में ही सीमित रहने के आसार हैं, जिससे गुरुग्राम की बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था पर और भारी दबाव पड़ेगा।


























