Delhi News: 2028 तक यमुना नदी की सफाई और कायाकल्प का संकल्प पूरे देशवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज सोमवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में इस प्रोजेक्ट की दिशा में बड़े और निर्णायक फैसले लिए हैं। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जिन्होंने यमुना नदी के पुनरुद्धार के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
बैठक के दौरान अमित शाह ने स्पष्ट किया कि यमुना की स्वच्छता का लक्ष्य जल्द से जल्द प्राप्त करने के लिए सभी संबंधित मंत्रालयों और सरकारों को टीम भावना के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कार्य केवल टुकड़ों में नहीं, बल्कि समग्र दृष्टिकोण और समर्पित प्रयासों से ही संभव है। इस दिशा में किए गए प्रयासों का फोकस है कि 2028 तक यमुना पूरी तरह से साफ हो जाए।
यमुना की सफाई का विस्तृत प्लान
इस बैठक में यमुना नदी को स्वच्छ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं और रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि जनवरी 2028 तक यमुना नदी का पूर्ण रूप से स्वच्छ कर दिया जाएगा। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि 8 जून 2028 तक पाकिस्तान को सिंधु नदी के जल की एक भी बूंद नहीं मिलेगी, जो इस परियोजना की महत्वाकांक्षा और राष्ट्रीय महत्व को दर्शाता है।
डेयरी वेस्टेज का वैज्ञानिक प्रबंधन
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि दिल्ली एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच एक समझौता (MoU) साइन किया जाएगा। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य है कि दिल्ली की डेयरियों से निकलने वाला वेस्टेज, खासकर गोबर, को गोबर गैस और खाद में परिवर्तित किया जाए। यह प्रक्रिया न केवल यमुना में वेस्टेज के प्रवाह को नियंत्रित करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करेगी। NDDB मॉडल के तहत डेयरी और गौशालाओं का गोबर सीधे गैस और खाद प्लांट तक पहुंचेगा, जिससे कूड़ा-करकट का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन संभव होगा।
नालों की डीसिल्टिंग और गाद का उपयोग
यमुना नदी में पहुंचने वाले नालों की सफाई और गाद निकासी पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान में, इस वर्ष 28.57 लाख टन गाद में से 97 प्रतिशत यानी करीब 27.7 लाख टन गाद निकाल ली गई है। शेष गाद को 15 जून तक पूरी तरह से निकालने का लक्ष्य है। शाह ने निर्देश दिया है कि निकाली गई गाद का उपयोग विभिन्न विनिर्माण परियोजनाओं में किया जाए, ताकि बारिश के दौरान यह गाद यमुना में वापस न जाए और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की स्थापना
यमुना नदी की सफाई में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले उपकरण हैं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP)। अब तक, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कुल 129 STP बनाए जा चुके हैं। 2027 तक, इन क्षेत्रों में और 59 नए STP स्थापित किए जाएंगे। इन प्लांट्स का उद्देश्य है कि औद्योगिक वेस्टेज और घरेलू सीवेज का प्रभावी तरीके से उपचार किया जाए और इनका डिस्चार्ज यमुना में सुरक्षित रूप से पहुंचे। इसके साथ ही, शाह ने निर्देश दिया है कि सभी नालों और औद्योगिक वेस्टेज के डिस्चार्ज को नियमित रूप से मॉनिटर किया जाए, ताकि कोई भी अनियमितता या प्रदूषण का स्रोत न रह सके।
नियमित समीक्षा और निगरानी
यमुना नदी के कायाकल्प के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रगति की निगरानी भी महत्वपूर्ण है। गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना की सफलता के लिए हर 20 दिन में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में प्रोजेक्ट्स की प्रगति, कार्यशैली और चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। इस तरह की नियमित समीक्षा से कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित होगी, और यदि कहीं भी देरी या समस्या हो, तो उसे तुरंत हल किया जाएगा।
यमुना नदी का स्वच्छता अभियान एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य है कि 2028 तक यह नदी पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त हो जाए। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर कई बड़े कदम उठा रही हैं। डेयरी वेस्टेज का वैज्ञानिक प्रबंधन, गाद का उपयोग, नए STP की स्थापना और नियमित निगरानी इन प्रयासों के मुख्य स्तंभ हैं। अमित शाह ने इस दिशा में गंभीरता और प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्य न केवल एक परियोजना है, बल्कि एक सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी है।
यमुना की सफाई का यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा बल्कि इससे नदी के किनारे बसे समुदायों का जीवनस्तर भी बेहतर होगा। यह संकल्प हमारे राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन का हिस्सा है, जो हमें एक स्वच्छ और स्वस्थ भविष्य की दिशा में ले जाएगा।





















