सत्य ऋषी
सनातन धर्म में भगवान विष्णु की उपासना का विशेष महत्व माना गया है और इसके लिए एकादशी व्रत को पवित्रतम माना जाता है। हर महीने में दो और साल भर में कुल 24 एकादशी व्रत पड़ते हैं। फाल्गुन मास की पहली एकादशी, जिसे विजया एकादशी कहा जाता है, इस बार 13 फरवरी 2026, शुक्रवार को पड़ेगी। इस पवित्र व्रत का पारण अगले दिन 14 फरवरी 2026, शनिवार की सुबह 06:35 से 08:52 बजे तक किया जाएगा।
विजया एकादशी का धार्मिक महत्व
विजया एकादशी को जीवन में विजय और सफलता दिलाने वाला व्रत माना गया है। मान्यता है कि यह व्रत करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और करियर, शिक्षा और व्यवसाय में सफलता मिलती है। इसके साथ ही यह व्रत सभी पापों का नाश करता है और अक्षय पुण्यफल प्रदान करता है। व्रत का पुण्य प्रताप इतना बड़ा माना गया है कि इसे बड़े यज्ञ के समान फलदायी माना जाता है।
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विजया एकादशी की कथा
व्रत की कथा भगवान राम से जुड़ी हुई है। जब भगवान राम माता सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाने के लिए समुद्र पार करने पहुँचे, तब उन्हें बड़ी बाधा का सामना करना पड़ा। वकदालभ्य मुनि ने उन्हें फाल्गुन मास की कृष्णपक्ष की एकादशी के दिन व्रत करने की सलाह दी। भगवान राम ने विधि-विधान से एकादशी व्रत और पूजा कर इस बाधा को दूर किया और रावण का वध करके लंका पर विजय प्राप्त की। यही कारण है कि इसे विजया एकादशी कहा गया है।
व्रत की पूजा विधि
विजया एकादशी के दिन भक्त प्रातःकाल तन-मन से पवित्र होकर पूजा घर या मंदिर में श्री विष्णु की पूजा करें। इस व्रत में भगवान विष्णु को विशेष रूप से पीले रंग के पुष्प, पीला वस्त्र, पीला चंदन और पीले फल अर्पित करें।
- पूजा के दौरान धूप-दीप जलाएँ।
- व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करें।
- अंत में आरती करें।
- अगले दिन विधि-विधान से पारण करें।
विजया एकादशी व्रत जीवन में सफलता, विजय और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करने वालों के लिए विशेष रूप से फलदायी माना गया है।
























