ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण को आगे बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। हरियाणा सरकार ने बुधवार को इस चरण के टेंडर को मंजूरी दे दी। अब गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) अगले सप्ताह तक टेंडर जारी कर सकती है। प्रस्तावित परियोजना पर करीब 1,662 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
दूसरे चरण में सेक्टर-9 से दिल्ली-जयपुर हाईवे के पास स्थित डीएलएफ साइबर सिटी तक लगभग 15.3 किलोमीटर लंबा मेट्रो कॉरिडोर बनाया जाएगा। इस मार्ग पर 14 स्टेशन प्रस्तावित हैं। परियोजना पूरी होने पर पुराने गुरुग्राम के कई रिहायशी इलाकों, रेलवे स्टेशन और औद्योगिक क्षेत्रों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलेगी।

ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के दूसरे चरण में कहां बनेंगे स्टेशन?
जीएमआरएल की योजना के मुताबिक, दूसरे चरण के स्टेशन सेक्टर-7, सेक्टर-4, सेक्टर-5, रेलवे स्टेशन, अशोक विहार, सेक्टर-3, बजघेड़ा रोड, पालम विहार एक्सटेंशन, पालम विहार, सेक्टर-23ए, सेक्टर-22, सेक्टर-21, उद्योग विहार फेज-1 और डीएलएफ साइबर सिटी में होंगे।
इस कॉरिडोर से पुराने गुरुग्राम के उन इलाकों को सीधा फायदा मिल सकता है, जहां अभी मेट्रो की पहुंच सीमित है। रेलवे स्टेशन और उद्योग विहार जैसे प्रमुख स्थानों को जोड़ने से यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन के अधिक विकल्प मिलेंगे। हालांकि, स्टेशन और निर्माण की अंतिम योजना से जुड़ी जानकारी टेंडर और आगे की परियोजना प्रक्रिया में स्पष्ट होगी।
कुछ हिस्सों में बनेगा डबल डेकर मेट्रो कॉरिडोर
योजना के तहत सेक्टर-5 से शीतला माता रोड पर अंडरपास, बजघेड़ा रोड और सुशील ऐमा मार्ग से ओल्ड दिल्ली रोड की दिशा में डबल डेकर मेट्रो कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव है। इसमें मेट्रो लाइन के नीचे फ्लाईओवर बनाया जाएगा। इस तरह एक ही कॉरिडोर में मेट्रो और सड़क यातायात के लिए अलग-अलग स्तर उपलब्ध कराने की योजना है।
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना कुल 30.5 किलोमीटर लंबी बताई गई है, जिसमें 28 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इसका पहला चरण मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-9 तक करीब 15.2 किलोमीटर का है। दूसरे चरण के जुड़ने पर मेट्रो नेटवर्क डीएलएफ साइबर सिटी तक पहुंच सकेगा।
पहले चरण का निर्माण अभी शुरुआती दौर में
पहले चरण के निर्माण का ठेका दलीप बिल्डकॉन लिमिटेड और रंजीत बिल्डकॉन लिमिटेड को दिया गया है। पिछले वर्ष अगस्त में टेंडर आवंटित हुआ था। कंपनियों को मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-9 तक के कॉरिडोर का निर्माण दो साल के भीतर पूरा करना है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी पहले चरण का करीब 14 से 15 प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है। अब तक किसी मेट्रो स्टेशन की इमारत का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। परियोजना की रफ्तार और तय समयसीमा पर काम पूरा होना यात्रियों के लिए अहम रहेगा, क्योंकि दूसरे चरण की उपयोगिता भी पहले चरण के नेटवर्क से जुड़ने पर निर्भर करेगी।
यात्रियों को क्या होगा फायदा?
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के चालू होने पर शहर के भीतर और दिल्ली की ओर यात्रा करना आसान हो सकता है। फिलहाल एसईजेड, यूनिटेक साइबर पार्क और उद्योग विहार में काम करने वाले कई लोग मिलेनियम सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने के लिए ऑटो या ई-रिक्शा का इस्तेमाल करते हैं। नए स्टेशन बनने से इन क्षेत्रों के यात्रियों को अपने गंतव्य के करीब उतरने का विकल्प मिल सकता है।
मेट्रो नेटवर्क का विस्तार सड़क पर निजी वाहनों और फीडर सेवाओं पर निर्भरता घटाने में भी मदद कर सकता है। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि स्टेशन तक पहुंचने के लिए पैदल रास्ते, बस या अन्य फीडर सेवाएं कितनी सुविधाजनक बनाई जाती हैं।
गुरुग्राम-पटौदी-रेवाड़ी हाईवे
इसी बीच, गुरुग्राम-पटौदी-रेवाड़ी हाईवे पर गांव जनौला के पास 16 लेन का टोल प्लाजा प्रस्तावित है। द्वारका एक्सप्रेसवे से जनौला की दूरी करीब 19 किलोमीटर बताई गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने टोल प्लाजा की अधिसूचना जारी करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को पत्र लिखा है।
एनएचएआई के सर्वे के अनुसार, टोल प्लाजा शुरू होने के बाद सालाना करीब 57 करोड़ रुपये की आय का अनुमान है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक योगेश तिलक के मुताबिक, 46 किलोमीटर लंबे गुरुग्राम-पटौदी-रेवाड़ी हाईवे का निर्माण अंतिम चरण में है और इसे दो से तीन महीने में यातायात के लिए खोलने की योजना है।
























