अरावली की हरियाली के बीच गुरुग्राम को एक नया आध्यात्मिक और पर्यावरणीय स्थल मिला है। जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) के गुरुग्राम चैप्टर फाउंडेशन ने पांच एकड़ में देश का पहला तीर्थंकर वनम् विकसित किया है। शनिवार को हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने इसका उद्घाटन किया और परिसर में पौधारोपण भी किया।
करीब दस महीने में तैयार हुए इस वनम् को जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों की स्मृति को समर्पित किया गया है। परिसर में 24 ध्यान स्थल बनाए गए हैं—हर स्थल एक तीर्थंकर के नाम पर है। प्रत्येक स्थल के पास तीन पौधे लगाए गए हैं, यानी पूरे परिसर में कुल 72 पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी भी इस पहल का अहम हिस्सा है। इसे विकसित करने में दो करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं।
24 तीर्थंकरों के नाम पर बने ध्यान स्थल
तीर्थंकर वनम् का मुख्य आकर्षण इसके 24 ध्यान स्थल हैं। इन्हें इस तरह विकसित किया गया है कि आगंतुक अरावली के प्राकृतिक वातावरण में कुछ समय शांति और ध्यान के साथ बिता सकें। जीतो के प्रवक्ता अभय जैन के अनुसार, हर स्थल जैन धर्म के एक तीर्थंकर को समर्पित है और उसके पास तीन पौधे लगाए गए हैं।
आयोजकों का कहना है कि यह परिसर धार्मिक स्मरण के साथ प्रकृति से जुड़ने का अवसर भी देगा। यहां आने वाले लोग ध्यान और योग कर सकेंगे। जानकारी के मुताबिक, इच्छुक व्यक्ति सूर्योदय से पहले भी यहां ध्यान-योग के लिए पहुंच सकते हैं। हालांकि, आगंतुकों को परिसर में प्रवेश और समय से जुड़ी स्थानीय व्यवस्था की जानकारी पहले लेनी चाहिए।
सरकारी वन भूमि पर विकसित हुआ वनम्
तीर्थंकर वनम् अरावली क्षेत्र में वन विभाग के साथ हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत आवंटित सरकारी वन भूमि पर विकसित किया गया है। उद्घाटन के दौरान मंत्री राव नरबीर सिंह ने परिसर का भ्रमण किया और पौधारोपण किया। उन्होंने इस पहल को पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिए सराहनीय प्रयास बताया।
मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि 24 ध्यान स्थलों वाला यह वनम् जैन समाज के तीर्थंकरों की स्मृति को समर्पित है और आध्यात्मिक चेतना के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। उन्होंने लोगों से पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़े प्रयासों में भाग लेने की अपील भी की।
यह पहल वन्यजीव सुरक्षा सप्ताह के दौरान शुरू हुई है। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य लोगों को अरावली के प्राकृतिक परिवेश से जोड़ना और वन संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। वन क्षेत्र में धार्मिक और ध्यान स्थल विकसित करने के साथ पौधों की देखभाल पर जोर देना इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पक्ष है।
पौधों का रखरखाव होगी बड़ी जिम्मेदारी
तीर्थंकर वनम् विकसित करना परियोजना का पहला चरण है; अब लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखना और उन्हें बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां देना जरूरी होगा। अभय जैन ने बताया कि हर ध्यान स्थल के पास तीन पौधे लगाए गए हैं। इतने बड़े परिसर में सभी पौधों का नियमित रखरखाव चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पौधों की सुरक्षा, पानी की उपलब्धता और उनकी नियमित निगरानी से ही यह पहल लंबे समय तक सफल रह सकेगी। आयोजकों ने वन प्रेमियों और आम नागरिकों से इसमें भागीदारी की अपील की है। स्थानीय लोगों की सहभागिता से पौधों की देखभाल और परिसर की स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
“यहां आने वालों को सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी”
जीतो गुरुग्राम चैप्टर के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा कि तीर्थंकर वनम् का नाम और इसका प्राकृतिक वातावरण लोगों में सकारात्मक भाव पैदा करने वाला है। उनके मुताबिक, अरावली की हरियाली के बीच यह प्रयोग लोगों को शांति और अच्छा अनुभव देगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आज बोया गया यह बीज समय के साथ बड़ा वृक्ष बनेगा और आने वाली पीढ़ियों को तीर्थंकरों की स्मृति के साथ प्रकृति के महत्व का भी एहसास कराएगा।
उद्घाटन कार्यक्रम में जीतो निदेशक रमन जैन, जीतो पर्यावरण अध्यक्ष आनंद चोरडिया, अमन फाउंडेशन के संस्थापक एवं जीतो नॉर्थ जोन के संयोजक अनिल जैन सहित कई लोग मौजूद रहे।
गुरुग्राम के लिए क्यों खास है तीर्थंकर वनम्?
तेजी से शहरीकरण के बीच अरावली क्षेत्र में बना यह वनम् ध्यान, पौधारोपण और पर्यावरण जागरूकता को एक साथ जोड़ने की कोशिश है। पांच एकड़ में फैले परिसर के 24 स्थल इसे धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशिष्ट बनाते हैं, जबकि पौधों की देखभाल और वन्यजीव संरक्षण का संदेश इसे पर्यावरणीय पहल का रूप देता है।
गुरुग्राम तीर्थंकर वनम् की दीर्घकालीन सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यहां लगाए गए पौधों का रखरखाव कितनी नियमितता से होता है और लोग इस प्रयास में कितनी भागीदारी निभाते हैं। फिलहाल, अरावली की गोद में विकसित यह स्थल गुरुग्राम में प्रकृति और आध्यात्मिकता को करीब लाने वाली एक नई पहल के रूप में सामने आया है।

























