गुरुग्राम के रिहायशी सेक्टरों में घरों का इस्तेमाल नियमों के विरुद्ध व्यावसायिक गतिविधियों के लिए करने वाले मकान मालिकों पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्राधिकरण के संपदा कार्यालय-एक और संपदा कार्यालय-दो की सर्वे टीमों ने अब तक करीब 500 मकान मालिकों को कारण बताओ और जब्ती से जुड़े नोटिस जारी किए हैं। यह कदम रिहायशी इलाकों में बिना अनुमति चल रहे कारोबार और नियमों के विपरीत निर्माण की पहचान के लिए चलाए जा रहे सर्वेक्षण के बाद उठाया गया है।
कार्रवाई में उन मकानों को चिह्नित किया जा रहा है जहां आवासीय उपयोग के बजाय क्लीनिक, कार्यालय, दुकान, बुटीक और पेइंग गेस्ट (PG) आवास जैसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सर्वेक्षण का उद्देश्य HSVP के नियमों का उल्लंघन कर रही गतिविधियों की पहचान करना और संबंधित आवंटियों को नियमों का पालन करने के लिए बाध्य करना है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई
रिहायशी क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के 22 सितंबर के आदेश के बाद HSVP और स्थानीय प्रशासन ने कार्रवाई तेज की है। प्राधिकरण की टीमों को उल्लंघनों की पहचान कर नियमानुसार कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने मकान मालिकों को चेतावनी दी है कि नोटिस के बावजूद यदि नियमों के विरुद्ध चल रही गतिविधियां बंद नहीं की गईं, तो आगे कठोर कार्रवाई हो सकती है। इसमें आवंटन रद्द करने जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।
नोटिस जारी होने का अर्थ यह है कि संबंधित मकान मालिकों को प्राधिकरण के सामने अपना पक्ष रखने और कथित उल्लंघन पर जवाब देने का अवसर दिया जा रहा है। इसके बाद मामले की जांच और लागू नियमों के आधार पर अगली कार्रवाई तय होगी।
संपदा कार्यालय-एक के क्षेत्र में करीब 100 नोटिस
संपदा कार्यालय-एक के अधिकार क्षेत्र में किए गए सर्वेक्षण के दौरान लगभग 100 मकान मालिकों को HSVP अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें करीब 100 कारण बताओ नोटिस शामिल बताए गए हैं। प्राधिकरण की टीमें संपदा कार्यालय-दो के क्षेत्र में भी सर्वे और जांच कर रही हैं। दोनों कार्यालयों के आंकड़ों को मिलाकर गुरुग्राम में नोटिस पाने वाले मकान मालिकों की संख्या लगभग 500 बताई गई है।
जांच में यह देखा जा रहा है कि मकान का उपयोग स्वीकृत उद्देश्य के अनुरूप हो रहा है या नहीं। यदि किसी आवासीय संपत्ति में बिना आवश्यक अनुमति के व्यावसायिक गतिविधि चल रही है, तो संबंधित आवंटी को नोटिस देकर जवाब मांगा जा सकता है। प्राधिकरण की कार्रवाई का दायरा केवल चल रहे कारोबार तक सीमित नहीं है; निर्माण के नियमों की भी जांच की जा रही है।
निर्माणाधीन मकानों की भी जांच
HSVP की सर्वे टीमें निर्माणाधीन मकानों का निरीक्षण कर रही हैं। इस दौरान स्वीकृत भवन नक्शे और मौके पर हो रहे निर्माण का मिलान किया जा रहा है। टीम यह भी जांच रही है कि निर्माण निर्धारित फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) और अन्य स्वीकृत मानकों के भीतर है या नहीं।
यदि निर्माण स्वीकृत नक्शे से अलग पाया जाता है या तय सीमा से अधिक निर्माण किया जा रहा है, तो काम रोकने के निर्देश दिए जा सकते हैं। नियमों के विपरीत बने हिस्से को हटाने या गिराने की चेतावनी भी दी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण के दौरान नियमों का पालन करना मकान मालिक की जिम्मेदारी है। इसलिए घर बनवाने से पहले स्वीकृत नक्शे और लागू मानकों की जानकारी लेना जरूरी है।
किन गतिविधियों पर है HSVP की नजर?
सर्वेक्षण के दौरान रिहायशी मकानों में चल रही ऐसी गतिविधियों पर ध्यान दिया जा रहा है जिनके लिए अनुमति या भूमि-उपयोग में बदलाव की जरूरत हो सकती है। इनमें शामिल हैं:
- बिना अनुमति चलाए जा रहे क्लीनिक और कार्यालय
- दुकानें और बुटीक
- पेइंग गेस्ट (PG) आवास
- अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान
- स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण
- निर्धारित FAR से अधिक निर्माण
किसी गतिविधि पर कार्रवाई का फैसला संबंधित नियमों, संपत्ति की स्वीकृत स्थिति और मामले के तथ्यों के आधार पर किया जाएगा। नोटिस मिलने पर मकान मालिकों को उसमें दी गई समय-सीमा और निर्देश ध्यान से पढ़ने चाहिए तथा समय पर अपना जवाब देना चाहिए।
नियमों का पालन करने की अपील
HSVP अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि रिहायशी सेक्टरों में आवासीय उपयोग के नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मकान मालिकों से अपील की गई है कि वे बिना अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां न चलाएं और निर्माण को स्वीकृत नक्शे के अनुसार ही पूरा करें। यदि किसी संपत्ति को व्यावसायिक उद्देश्य से इस्तेमाल करने की अनुमति चाहिए, तो संबंधित प्राधिकरण से पहले नियमों और प्रक्रिया की जानकारी लेना उचित होगा।
गुरुग्राम में करीब 500 मकान मालिकों को जारी नोटिस शहर के रिहायशी सेक्टरों में नियमों के पालन को लेकर HSVP की बढ़ती सख्ती का संकेत हैं। सर्वेक्षण और जांच आगे भी जारी रहने की संभावना है। जिन लोगों को नोटिस मिला है, उन्हें मामले को नजरअंदाज करने के बजाय तय समय में जवाब देना चाहिए और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने चाहिए। अंतिम कार्रवाई प्राधिकरण की जांच और लागू नियमों के अनुसार तय होगी।
























