Ghaziabad News: गाजियाबाद जिले में आज रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र के साइट 4 स्थित एक कपड़े का धागा निर्माण फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी विकराल थी कि उसकी लपटें आसमान को छूती हुई दिखाई दे रही थीं और कई किलोमीटर की दूरी तक घना धुआं फैल गया। आग की तात्कालिक सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमों ने मोर्चा संभाला और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
घटना का विस्तृत विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला साहिबाबाद इंडस्ट्रियल एरिया स्थित साइट 4 का है। यहां प्लॉट संख्या 42/46 में ‘मेसर्स जरी क्रिएशन’ नाम की एक फैक्ट्री संचालित होती है, जहां पॉलिएस्टर धागे का निर्माण किया जाता है। रविवार दोपहर अचानक फैक्ट्री के एक हिस्से से धुआं उठना शुरू हुआ, जो देखते ही देखते विशाल आग का रूप धारण कर गया। चूंकि फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ (पॉलिएस्टर और रसायन) मौजूद थे, इसलिए आग ने कुछ ही पलों में पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया।
सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि आसपास के लोगों ने दूर-दूर तक धुएं का गुबार देखा। फैक्ट्री के अंदर रखे कच्चे माल और तैयार माल में आग ने तेजी से पैर पसारा, जिससे वहां मौजूद टीन शेड भी गिरने लगे।
दमकल विभाग की मुस्तैदी
घटना की सूचना फायर स्टेशन वैशाली को प्राप्त हुई। आग की गंभीरता को भांपते हुए अग्निशमन विभाग ने तत्काल अलर्ट जारी कर दिया। पहले चरण में फायर स्टेशन वैशाली, साहिबाबाद और लोनी से दमकल की गाड़ियों को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुंचकर दमकलकर्मियों ने देखा कि स्थिति बहुत नियंत्रण से बाहर है। आग तेजी से फैल रही थी और उसे बुझाने के लिए सामान्य संसाधन कम पड़ रहे थे।
इसके बाद आग की तीव्रता को देखते हुए मुख्य अग्निशमन अधिकारी के निर्देशन में फायर स्टेशन कोतवाली और पड़ोसी शहर नोएडा से भी अतिरिक्त दमकल वाहनों को मदद के लिए बुलाया गया। कुल मिलाकर, गाजियाबाद और नोएडा से 10 दमकल गाड़ियां (फायर टेंडर) राहत और बचाव कार्य में जुटी रहीं।
जेसीबी के सहारे पहुंचे अंदर
आग बुझाने का अभियान आसान नहीं था। दमकल विभाग के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती फैक्ट्री परिसर में मौजूद तीन क्षतिग्रस्त शेड थे। आग की भयावहता के कारण ये टीन शेड ढह गए थे या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके थे, जिससे दमकलकर्मी आग के मुख्य स्थान तक नहीं पहुंच पा रहे थे। दीवारों और मलबे के बीच फंसे आग पर पानी डालना बेकार साबित हो रहा था।
इस स्थिति से निपटने के लिए दमकल विभाग ने एक तकनीकी फैसला लिया। मौके पर एक जेसीबी मशीन को बुलाया गया। जेसीबी की मदद से आग से तपते और गिरे हुए टीन शेड को हटाया गया। जैसे ही रास्ता बना, दमकलकर्मियों ने हौज पाइप के माध्यम से चारों ओर से पानी की बौछार करनी शुरू कर दी। इस रणनीतिक कार्रवाई से आग पर काबू पाने में काफी मदद मिली।
अग्निशमन विभाग की टीम ने लगभग तीन घंटे तक लगातार काम किया। दमकलकर्मी पसीने से लथपथ हो गए लेकिन आग को बुझाने का प्रयास नहीं रुका। मुख्य अधिकारी के नेतृत्व में टीम ने चारों ओर से घेराबंदी करते हुए आग पर काबू पाया। देर शाम तक आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया, हालांकि ठंडा करने का काम (कूलिंग प्रोसेस) काफी देर तक चलता रहा ताकि आग फिर से भड़कने न पाए।
आग तेजी से फैलने का कारण
निरीक्षण और जांच के दौरान पता चला है कि फैक्ट्री में पॉलिएस्टर धागे का निर्माण किया जाता था। पॉलिएस्टर और सिंथेटिक धागे अत्यधिक संवेदनशील और ज्वलनशील होते हैं। एक बार जब इन पर आग लगती है, तो यह केमिकल की तरह तेजी से फैलती है और उसे बुझाना मुश्किल हो जाता है। फैक्ट्री में इसी प्रकार का बड़ा मात्रा में कच्चा माल और रखा हुआ था, जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया। यही कारण रहा कि छोटी सी चिंगारी ने कुछ ही समय में पूरी फैक्ट्री को अपनी लपटों में झोंक दिया।
इस भीषण आग के बावजूद एक बहुत बड़ी राहत की खबर यह है कि इस हादसे में किसी भी व्यक्ति की जान नहीं गई। चूंकि यह घटना रविवार को हुई, ऐसी संभावना जताई जा रही है कि फैक्ट्री में कम कर्मचारी मौजूद थे या फिर आग लगने से पहले ही सभी सुरक्षित बाहर निकल गए होंगे। हालांकि, फैक्ट्री को माल के रूप में लाखों रुपये का नुकसान हुआ है, लेकिन जीवन की क्षति न होना सबसे बड़ी सकारात्मक बात है।
अधिकारी का बयान और आगे की कार्रवाई
मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि समय रहते मिली सूचना और तत्काल की गई कार्रवाई के चलते आग को आसपास की अन्य औद्योगिक इकाइयों तक फैलने से रोक लिया गया। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद के चार अलग-अलग फायर स्टेशनों (वैशाली, साहिबाबाद, लोनी, कोतवाली) और नोएडा से कुल 10 फायर टेंडरों को मंगवाया गया था। उन्होंने दमकलकर्मियों के समर्पण और कड़ी मेहनत की सराहना की।
फिलहाल, आग लगने का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। यह स्पष्ट नहीं है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी या कोई अन्य तकनीकी कारण था। पुलिस और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम मामले की जांच कर रही है। मौके पर फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया जा सकता है ताकि आग लगने की वास्तविक वजह का पता चल सके। जांच के बाद ही यह सामने आएगा कि यह हादसा है या किसी प्रकार की लापरवाही शामिल है।























