Uttam Nagar–Mohan Garden News: दिल्ली को विश्व स्तरीय शहर बनाने के दावे हों या स्मार्ट सिटी की बात हो, लेकिन उत्तम नगर और मोहन गार्डन जैसे इलाकों की हकीकत कुछ और ही कहानी सुनाती है। यहाँ की सड़कें आज ऐसी स्थिति में पहुँच चुकी हैं कि ये विकास की परिभाषा पर ही सवाल खड़े कर रही हैं। बुध बाजार, गांधी चौक, जैन रोड और मोहन गार्डन पुलिस चौकी रोड सहित कई मुख्य मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। ये सिर्फ सड़कें नहीं, बल्कि आम जनता के लिए रोज़ का सफर जहन्नुम बन चुकी हैं।
गड्ढों में फंसा विकास
उत्तम नगर और मोहन गार्डन की सड़कों की हालत देखकर लगता नहीं है कि यहाँ कभि सड़क बनी थी। पिछले कई महीनों से इन इलाकों में सड़कें खराब होने की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। बारिश के मौसम में तो ये गड्ढे छुपे हुए खतरा बन जाते हैं, लेकिन गर्मी में धूल और ट्रैफिक जाम ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इन सड़कों को लेकर संवेदनशील नहीं दिख रहे हैं।
बुध बाजार और गांधी चौक: जाम का नया अड्डा
बुध बाजार और गांधी चौक इस क्षेत्र के सबसे व्यस्त व्यावसायिक केंद्र हैं। यहाँ दिन भर भारी भीड़ रहती है। सड़कों के टूटने के कारण यहाँ ट्रैफिक की गति न के बराबर हो गई है। छोटे से गड्ढे के कारण पूरी सड़क पर लंबा जाम लग जाता है। गांधी चौक पर तो स्थिति ऐसी है कि वाहन चालकों को संतुलन बनाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ये गड्डे अब दुर्घटनाओं का कारण बनते जा रहे हैं, फिर चाहे वो पैदल यात्री हों या बड़े वाहन।
जैन रोड और पुलिस चौकी रोड: सुरक्षा के ठिकाने के पास बेहद असुरक्षित सड़कें
मोहन गार्डन पुलिस चौकी के सामने से गुजरने वाली सड़क की हालत तो सबसे चौंकाने वाली है। एक ऐसी जगह जहाँ कानून व्यवस्था को बनाए रखने वाली संस्था मौजूद है, वहाँ की सड़क खस्ताहाल होना सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। पुलिस चौकी रोड और आसपास का जैन रोड लगातार खराब होते जा रहे हैं। यहाँ गड्ढे इतने गहरे हो गए हैं कि छोटे वाहनों का पहिया फंसना आम बात हो गई है। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस चौकी के सामने की सड़क की स्थिति ऐसी है, तो आम इलाकों का क्या हाल होगा, यह समझना मुश्किल नहीं है।
ई-रिक्शा और बाइक सवारों के लिए दर्दनाक सफर
इन सड़कों का सबसे बुरा असर ई-रिक्शा चालकों और बाइक सवारों पर पड़ रहा है। ई-रिक्शा इन इलाकों की जीवन रेखा हैं, क्योंकि यहाँ निजी वाहनों के लिए जगह कम और भीड़ ज्यादा है। लेकिन टूटी सड़कों पर ई-रिक्शा चलाना एक चुनौती बन गया है। बैटरी से चलने वाले इन वाहनों की सस्पेंशन सिस्टम ऐसी झटकों को बर्दाश्त नहीं कर पाती, जिससे वाहन जल्दी खराब हो जाते हैं और यात्रियों को चोटें भी लगती हैं।
वहीं, बाइक सवारों के लिए तो ये सड़कें खतरनाक साबित हो रही हैं। अनियंत्रित रूप से फैले गड्ढों में बाइक का पहिया फंसने से अक्सर बाइक गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। बारिश के बाद इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता और दुर्घटनाएं हो जाती हैं। आम जनता का आरोप है कि सफर के दौरान उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर हमेशा डर बना रहता है।
शिकायतों का अभाव नहीं, समाधान का है अभाव
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने इस मामले में कई बार शिकायतें की हैं। जन प्रतिनिधियों से लेकर नगर निगम अधिकारियों तक इसकी शिकायत पहुँचाई जा चुकी है। लेकिन हर बार नतीजा वही रहता है—बयानबाजी और आश्वासन। कभी-कभी निगम के कर्मचारी आते हैं, गड्ढों में ढेर लगा देते हैं और चले जाते हैं। यह काम इतना अस्थायी होता है कि अगले ही दिन या एक बारिश में वह ढेर उखड़ जाता है और सड़क फिर से पहले जैसी खराब हो जाती है।
आए दिन होने वाला यह ‘पैचवर्क’ (Patchwork) यानी टुकड़ों में मरम्मत का काम लोगों की परेशानी का समाधान नहीं है। जब तक सड़क को पूरी तरह से उखाड़कर नई तकनीक से नहीं बनाया जाएगा, तब तक समस्या बनी रहेगी। लोगों का गुस्सा इस बात पर है कि जो काम एक बार में पूरा किया जा सकता है और होना भी चाहिए, उसे आए दिन टाला जा रहा है। इस आधा-अधूरे काम में सरकारी धन की बर्बादी तो हो रही है, साथ ही जनता का पैसा और समय भी बर्बाद हो रहा है।
जनता की मांग
उत्तम नगर और मोहन गार्डन के निवासियों की मांग साफ है कि बुध बाजार, गांधी चौक, जैन रोड और पुलिस चौकी रोड सहित सभी मुख्य मार्गों का त्वरित और स्थायी समाधान किया जाए। आधा-अधूरे ढेर लगाने से काम नहीं चलेगा। प्रशासन को इस बात का ध्यान रखना होगा कि ये सड़कें हजारों लोगों के आने-जाने का एकमात्र जरिया हैं।
सड़कें सुविधा नहीं, बल्कि लोगों की बुनियादी जरूरत हैं। जब तक इन गड्ढों को भरा नहीं जाता और सड़कों को चकाचक नहीं बनाया जाता, तब तक यहाँ रहने वाले लोगों का परेशान रहना तय है। अब समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी अपनी आँखें खोलें और आम जनता की इस पीड़ा को समझें। ई-रिक्शा चालक से लेकर बाइक सवार तक सभी चाहते हैं कि उनके आने-जाने का रास्ता सुरक्षित और सहज हो।





















