दिल्ली में आज सोमवार को छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। कांग्रेस की छात्र शाखा नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के मुख्यालय का घेराव करते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया और प्रदर्शनकारियों के साथ सुरक्षाबलों की भिड़ंत हो गई। NSUI की ओर से पुलिस पर बर्बरता के आरोप लगाए गए हैं, जबकि पुलिस का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
पुलिस-कार्यकर्ताओं के बीच झड़प, एक व्यक्ति अस्पताल में भर्ती
प्रदर्शन के दौरान जमीनी स्तर पर तनाव चरम पर पहुंच गया। NSUI ने एक आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया है कि एजेंसी दफ्तर के बाहर विरोध जता रहे उनके कार्यकर्ता दीपक चौधरी के साथ पुलिसकर्मियों ने बेहद क्रूरता से मारपीट की। गंभीर चोटें आने के कारण दीपक को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। संगठन के अनुसार, उन्हें सांस लेने में भारी परेशानी हो रही है। सोशल मीडिया पर NSUI ने एक पोस्ट शेयर करते हुए सरकार और प्रशासन को चुनौती दी है- “हम आपकी पुलिस से नहीं डरते।”

क्यों उग्र हुए छात्र? UGC-NET 2026 की परेशानियां
इस पूरे विरोध का मूल कारण UGC-NET जून 2026 परीक्षा में सामने आई कवायदी चूक है। 22 जून से 30 जून के बीच आयोजित इस परीक्षा में कुल 87 विषय शामिल थे। लेकिन परीक्षा समाप्त होने के बाद अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों के प्रश्नपत्रों को लेकर छात्रों की भारी नाराजगी देखने को मिली। शिकायतों का दरवाजा खुलते ही NTA को घेरना पड़ा।
NTA ने स्वीकार कीं अपनी गलतियां, दी री-एग्जाम की तारीख
जब मामला बढ़ा, तो NTA ने इस मुद्दे की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया। समिति की रिपोर्ट आने के बाद एजेंसी को अपनी गलतियां माननी पड़ीं। NTA ने स्पष्ट किया कि इन तीनों विषयों के पेपर में कई स्तरीय चूकें थीं। इनमें तथ्यात्मक भूलें, टाइपिंग की गलतियां, खराब अनुवाद, किताबों और महत्वपूर्ण विशेषज्ञों के नामों की गलत स्पेलिंग और व्याकरण संबंधी भारी भूलें शामिल थीं। सबसे बड़ी बात यह रही कि पहले के सत्रों में पूछे जा चुके कई सवालों को दोबारा से कॉपी करके पेपर में लगा दिया गया था। जांच के बाद NTA ने इन तीनों विषयों की परीक्षा रद्द करते हुए दोबारा कराने का फैसला लिया है। नए शेड्यूल के अनुसार, 9 सितंबर को अंग्रेजी और कॉमर्स, जबकि 10 सितंबर को सोशियोलॉजी की परीक्षा होगी।
NTA की लापरवाही का सजा क्यों भुगत रहे हजारों छात्र?
हालांकि NTA ने री-एग्जाम की घोषणा कर दी है, लेकिन छात्रों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा। NSUI का तर्क है कि पेपर में गलतियां एजेंसी की ओर से हुई हैं, तो इसकी सजा छात्रों को क्यों भुगतनी पड़ रही है? लाखों छात्रों ने महीनों की मेहनत, तनाव और संसाधनों का इस्तेमाल कर परीक्षा दी थी। अब अचानक से दोबारा एग्जाम की खबर उनके मानसिक तौर पर सिमट रही है। छात्र संगठन का सवाल है कि क्या किसी सरकारी मशीनरी की ढील का खामियाजा हमेशा आम छात्रों को उठाना पड़ेगा?
NTA को खत्म करो, अध्यक्ष को दो इस्तीफा
इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने साफ शब्दों में कहा कि अब NTA की विश्वसनीयता पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही धांधलियों और लापरवाहियों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। NSUI ने अपनी मुख्य मांगों में NTA को पूरी तरह से भंग करने और एजेंसी के अध्यक्ष को तत्काल अपने पद से इस्तीफा देने की बात कही है।
क्या पेपर लीक हुआ था?
सिर्फ गलतियां ही नहीं, NSUI ने एक बड़ा सवालिया निशान भी लगाया है। संगठन ने पूछा है कि क्या इन तीनों विषयों के प्रश्नपत्रों के साथ परीक्षा से पहले ही लीक की बात सच है? NSUI ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की एक उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और जो भी अधिकारी इसमें लापरवाही या सांठगांठ में शामिल रहा हो, उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए।
दिल्ली में पुलिस बल और कार्यकर्ताओं के बीच की झड़प ने इस मुद्दे को एक नए राजनीतिक और छात्र आंदोलन का रूप दे दिया है। विनोद जाखड़ ने साफ कर दिया है कि जब तक NTA को बंद नहीं किया जाता और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता व जवाबदेही नहीं आती, तब तक NSUI का यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा मंत्रालय इस बढ़ते हुए छात्र आक्रोश को कैसे संभालता है और क्या NTA पर सख्त कार्रवाई का रास्ता अपनाता है।























