दिल्ली: आली गांव में मकान बचाने को लेकर बड़ा विरोध

साउथ ईस्ट दिल्ली के आली गांव में सैकड़ों परिवारों को मकान खाली करने के नोटिस मिले हैं। नोटिस में 26 सितंबर 2026 से कार्रवाई का जिक्र है। स्थानीय लोग घर बचाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं।

आली गांव में घर खाली करने का नोटिस, मचा हड़कंप

HIGHLIGHTS

  • दो दिन में घर खाली करने का आदेश, मचा बवाल
  • आली गांव में 2000 घरों पर संकट, लोग धरने पर
  • घर बचाने सड़कों पर उतरे लोग, प्रशासन से गुहार
  • 26 सितंबर से कार्रवाई का अलर्ट, आली गांव में तनाव

साउथ ईस्ट दिल्ली के आली गांव में मकान खाली करने के नोटिस से सैकड़ों परिवारों के सामने चिंता और अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई घरों पर चस्पा नोटिस में अदालत के आदेश का हवाला देते हुए कथित अवैध कब्जे और निर्माण हटाने की बात कही गई है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि लोग खुद निर्माण नहीं हटाते हैं, तो 26 सितंबर 2026 से पुलिस बल की मदद से कार्रवाई की जा सकती है।

नोटिस मिलने के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी अपने घरों को बचाने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनके परिवार कई दशकों से यहां रह रहे हैं और उन्हें घर खाली करने के लिए बहुत कम समय दिया गया है। उनका सवाल है कि इतने कम समय में वे अपने परिवार और सामान के साथ कहां जाएंगे।

कितने मकानों को मिला नोटिस?

स्थानीय लोगों का दावा है कि आली गांव में करीब 1,500 से 2,000 मकानों को नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, नोटिस पाने वाले मकानों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि संबंधित विभाग या प्रशासन की ओर से अभी सामने नहीं आई है।

निवासियों के अनुसार, कई परिवार इस इलाके में 70 से 100 साल या उससे भी अधिक समय से रह रहे हैं। उनका कहना है कि उनके पूर्वज भी यहीं रहते थे और मकान बनाते या खरीदते समय उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई कि जमीन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की है। अब विभाग की ओर से जमीन पर कब्जे का दावा किए जाने और अदालत के आदेश का हवाला दिए जाने के बाद लोगों को मकान खाली करने के लिए कहा गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से इस जमीन पर रह रहे हैं, इसलिए अचानक मिले नोटिस ने उनके सामने रहने की जगह और भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि किसी भी कार्रवाई से पहले उनकी स्थिति सुनी जाए और प्रभावित परिवारों के लिए रहने की व्यवस्था की जाए।

“दो दिन में घर कहां लेकर जाएं?”

धरने में शामिल महिला शकुंतला ने बताया कि उनके घर पर भी नोटिस चस्पा किया गया है। उनके मुताबिक, नोटिस 24 सितंबर को मिला और उसमें 26 सितंबर से कार्रवाई का जिक्र है। उन्होंने कहा कि लोगों को घर खाली करने के लिए बहुत कम समय दिया गया है। परिवारों के पास सामान समेटने और दूसरी जगह जाने की व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय नहीं है।

प्रदर्शन में शामिल सोमवती ने भी बच्चों और परिवारों की चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों के साथ घर छोड़ने को कहे जा रहे लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि वे कहां जाएंगे। उनकी मांग है कि मकानों को हटाने से पहले प्रभावित परिवारों के रहने की व्यवस्था की जाए।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि कार्रवाई की चेतावनी से बुजुर्गों, बच्चों और ऐसे परिवारों की परेशानी बढ़ गई है जिनके पास रहने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर नोटिस और प्रस्तावित कार्रवाई पर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है।

2003 में भी मिले थे नोटिस: प्रदर्शनकारी

धरने में शामिल विशाल ने दावा किया कि वर्ष 2003 में भी इलाके के कुछ लोगों को मकान खाली करने के नोटिस दिए गए थे। उनके मुताबिक, स्थानीय परिवार लंबे समय से यहां रह रहे हैं और अब अदालत के आदेश का हवाला देकर जमीन खाली करने को कहा जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों का सवाल है कि अगर जमीन पर कब्जा अवैध था, तो इतने वर्षों तक लोगों को मकान बनाने और वहां रहने से क्यों नहीं रोका गया। उनका कहना है कि कई परिवारों ने इसी इलाके में अपना जीवन बिताया है और उनके पास अचानक कहीं और जाने का विकल्प नहीं है।

हालांकि, जमीन के स्वामित्व, कब्जे और निर्माण की वैधता से जुड़े दावों पर संबंधित विभाग और प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है। इसलिए मामले के कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होने के लिए आधिकारिक जानकारी जरूरी होगी।

नोटिस में अदालत के आदेश और पुलिस कार्रवाई का उल्लेख

आली गांव में चस्पा नोटिस के मुताबिक, जिला न्यायालय, District Judge 07, SE/Saket, New Delhi के 31 जुलाई 2026 के आदेश के तहत संबंधित मामले में कब्जे की कार्रवाई के लिए Bailiff नियुक्त किया गया है। नोटिस में प्रभावित लोगों से कथित अवैध कब्जे और निर्माण स्वयं हटाने को कहा गया है।

नोटिस में यह भी लिखा है कि ऐसा नहीं किए जाने पर 26 सितंबर 2026 से पुलिस बल की सहायता से कब्जे और निर्माण हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। इस चेतावनी के बाद इलाके में तनाव और चिंता का माहौल है। बड़ी संख्या में लोग धरने पर बैठकर अपने घरों को बचाने की मांग कर रहे हैं।

प्रशासन के जवाब का इंतजार

फिलहाल आली गांव में प्रभावित परिवारों की मुख्य मांग है कि उन्हें पर्याप्त समय दिया जाए और पुनर्वास या रहने की वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाए। स्थानीय लोग यह भी चाहते हैं कि जमीन से जुड़े दावों और अदालत के आदेश की जानकारी उन्हें स्पष्ट रूप से दी जाए।

मामले में प्रशासन और उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही नोटिस की संख्या, प्रस्तावित कार्रवाई और प्रभावित परिवारों के लिए संभावित व्यवस्था को लेकर स्थिति साफ हो सकेगी। तब तक आली गांव के निवासी अपने घर बचाने की मांग के साथ धरने पर बैठे हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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