बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर क्या किसी राजनीतिक दल या उसके कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो सकता है? इसका जवाब परिस्थितियों पर निर्भर करता है। भारत में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और एकत्र होने का अधिकार संविधान देता है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन करने के लिए स्थानीय प्रशासन की शर्तों और वैध आदेशों का पालन करना पड़ सकता है। नियमों की अवहेलना, रास्ता रोकने, हिंसा या सरकारी काम में बाधा डालने जैसी स्थिति में पुलिस कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
10 अक्टूबर 2026 को कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। पुलिस के अनुसार, आयोजकों ने 7 अक्टूबर को आवेदन दिया था, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत कम से कम 10 दिन पहले सूचना देना आवश्यक था। पुलिस ने पिछले प्रदर्शन के दौरान निर्देशों और शर्तों के कथित उल्लंघन का भी हवाला दिया।
CJP नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की खबर
रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) नेता अभीजीत दीपके, सौरव दाम और आशुतोष रांका सहित 150 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। यूट्यूबर ध्रुव राठी को गुरुग्राम के सेक्टर-56 से हिरासत में लिए जाने की भी खबर है। बताया गया कि मुंबई से दिल्ली पहुंचने के बाद पुलिस विमान के भीतर गई और कुछ नेताओं को हिरासत में लिया। जंतर-मंतर तथा दिल्ली की सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ाई गई। प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे कई समर्थकों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।
हिरासत में लिया जाना और मुकदमा दर्ज होना एक ही बात नहीं है। पुलिस किसी व्यक्ति को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अस्थायी रूप से रोक सकती है, लेकिन आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करती है कि कोई संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं, और संबंधित कानूनों के तहत क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है। किसी खास मामले में कार्रवाई की वैधता तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तय होती है।
संविधान प्रदर्शन का अधिकार देता है, लेकिन यह असीमित नहीं
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्वक और बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है। ये अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति जताने और सार्वजनिक मुद्दों पर आवाज उठाने के लिए अहम हैं।
हालांकि, इन अधिकारों का इस्तेमाल सार्वजनिक व्यवस्था और दूसरों के अधिकारों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 19(2) और 19(3) के तहत सरकार अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा पर उचित प्रतिबंध लगा सकती है। मसलन, यातायात, सुरक्षा, सार्वजनिक शांति या किसी संवेदनशील स्थान की व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन प्रदर्शन का स्थान, समय, मार्ग और शर्तें तय कर सकता है।
इसका मतलब यह नहीं कि हर प्रदर्शन के लिए पूरे देश में एक जैसा अनुमति नियम लागू है। प्रक्रिया राज्य, शहर, स्थान और स्थानीय पुलिस या प्रशासन के आदेशों के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए आयोजकों को संबंधित क्षेत्र में लागू नियमों और अनुमति प्रक्रिया की पुष्टि करनी चाहिए।
किन हालात में दर्ज हो सकता है मुकदमा?
सिर्फ अनुमति न मिलने के बावजूद प्रदर्शन करने से हर मामले में अपने-आप एक ही तरह का मुकदमा दर्ज नहीं होता। पुलिस को देखना होता है कि प्रदर्शन के दौरान कौन-सा कानून टूटा और किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी। कार्रवाई की वजह बन सकने वाली परिस्थितियों में शामिल हैं:
- वैध आदेश की अवहेलना: प्रशासन या पुलिस ने कानून के तहत कोई स्पष्ट आदेश जारी किया हो और प्रदर्शनकारी जानबूझकर उसका उल्लंघन करें। भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 223 लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी आदेश की अवज्ञा से जुड़े मामलों में लागू हो सकती है। इसका इस्तेमाल तथ्यों और कानूनी शर्तों के आधार पर होता है।
- गैरकानूनी जमाव: किसी सभा का उद्देश्य या उसका आचरण कानून में तय शर्तों के अंतर्गत गैरकानूनी जमाव बनता हो, तो BNS के संबंधित प्रावधान लागू हो सकते हैं। केवल लोगों का एक जगह इकट्ठा होना अपने-आप अपराध नहीं है; जमाव का उद्देश्य और परिस्थितियां महत्वपूर्ण हैं।
- रास्ता रोकना या काम में बाधा: प्रदर्शन के कारण सार्वजनिक रास्ता अवरुद्ध हो, लोगों की आवाजाही बाधित हो या सरकारी कर्मचारियों को उनके वैध कर्तव्य से रोका जाए, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
- हिंसा या संपत्ति को नुकसान: तोड़फोड़, मारपीट, आगजनी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर सामान्य आपराधिक कानून के साथ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े विशेष कानून भी लागू हो सकते हैं।
किसी अपराध का आरोप लगने पर पुलिस जांच कर सकती है और कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है। लेकिन किस व्यक्ति पर कौन-सा आरोप लागू होगा, यह उसकी भूमिका, सबूत और घटना के विवरण पर निर्भर करता है। किसी प्रदर्शन में मौजूद हर व्यक्ति के खिलाफ एक जैसी कार्रवाई होना जरूरी नहीं।
आयोजकों और प्रतिभागियों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
प्रदर्शन आयोजित करने से पहले आयोजकों को अनुमति या सूचना देने की स्थानीय प्रक्रिया, आवेदन की समय-सीमा, तय स्थान और पुलिस की शर्तें जांचनी चाहिए। यदि अनुमति अस्वीकार हो जाए, तो आदेश की वजह समझकर प्रशासन से स्पष्टीकरण या उपलब्ध कानूनी उपाय पर विचार किया जा सकता है। प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण रहना, हथियार न ले जाना, रास्ते और आपात सेवाएं बाधित न करना तथा पुलिस के वैध निर्देशों का पालन करना चाहिए।



























