उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के बहादुरपुर विकासखंड में स्थित कनैला खुर्द गांव ने पर्यावरण संरक्षण का एक नई मिसाल कायम की है। यहां स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ एक प्रभावशाली और अनूठा जन-जागरूकता अभियान आयोजित किया गया, जिसने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया।
इस अभियान की खास बात यह थी कि ग्रामीणों ने प्लास्टिक कचरे के खिलाफ एक प्रतीकात्मक ‘शव यात्रा’ निकाली, जो पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के साथ-साथ स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने का एक नया तरीका था।
प्लास्टिक की अंतिम यात्रा का उद्देश्य
यह अभियान प्लास्टिक के उपयोग और कचरे से होने वाले नुकसान को लेकर ग्रामीणों में जागरूकता फैलाने के साथ ही, सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति का संकल्प दिलाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इस अनूठी शव यात्रा का मुख्य मकसद था कि प्लास्टिक कचरे को एक प्रतीकात्मक शव के रूप में दिखाकर, इसे अंतःस्थापित किया जाए कि अब यह हमारे जीवन से पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है। यह यात्रा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति ग्रामीणों की प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गई।
पारंपरिक और अभिनव तरीके से बनाई गई अर्थी
इस अभियान की शुरुआत कनैला खुर्द के रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) से हुई, जहां पारंपरिक तरीके से प्लास्टिक से बनी एक शव की अर्थी तैयार की गई। इस अर्थी को सजाने-संवारने में ग्राम पंचायत के स्वच्छता कर्मी सूरज चक्रवर्ती का विशेष सहयोग रहा। यात्रा के दौरान, अर्थी के पीछे कचरा संग्रहण का प्रतीकात्मक ठेला भी चलाया गया, जो कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के संदेश को मजबूती प्रदान करता था। ग्रामीणों ने इस शव यात्रा में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों ने भी भाग लिया, जिससे यह अभियान सामूहिक प्रयास का उदाहरण बन गया।
गांव की गलियों में निकाली गई शव यात्रा
यह शव यात्रा पूरे गांव में पांच प्रमुख स्थानों और चौराहों पर पहुंच कर समाप्त हुई। हर पड़ाव पर ग्रामीणों ने बारी-बारी से अर्थी को कंधा दिया, जबकि स्वच्छता कर्मी और सामाजिक कार्यकर्ता प्रतीकात्मक रूप से विलाप और रोकर प्लास्टिक के पर्यावरण पर पड़ने वाले नुकसान को दर्शाते रहे। इस दौरान, बच्चों ने कार्डबोर्ड से तैयार स्लोगन बोर्ड और तख्तियां लेकर स्वच्छता का संदेश फैलाया। बच्चों की सहभागिता ने इस अभियान को और भावपूर्ण और प्रेरणादायक बना दिया, जिससे युवा पीढ़ी भी इसमें सक्रिय भागीदारी कर सके।
डिजिटल और वित्तीय पारदर्शिता का प्रयोग
इस अनूठी शव यात्रा में डिजिटल तकनीक का भी समावेश हुआ। यात्रा के साथ चल रहे कचरा ठेले पर QR कोड और ऑनलाइन पेमेंट गूगल पे जैसे डिजिटल माध्यम लगाए गए, जिनके माध्यम से ग्रामीणों ने स्वेच्छा से अपने स्वच्छता योगदान के रूप में पंचायत निधि में आर्थिक सहायता दी। यह पहल ग्रामीणों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता और तकनीक का उपयोग कर सही जानकारी पहुंचाने का भी उदाहरण बनी।
ग्रामीणों में जागरूकता और भागीदारी का संदेश
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक ट्री इनिशिएटिव्स सोसाइटी के अध्यक्ष प्रभाकर ने कहा कि इस तरह की पहल का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता और प्लास्टिक मुक्ति के अभियान को सिर्फ कागजों या भाषणों तक सीमित नहीं रखना, बल्कि हर ग्रामीण की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपने गांव को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने की जिम्मेदारी पूरे समाज की है। छोटे-छोटे बदलाव कर, हम सिंगल यूज प्लास्टिक पर अपनी निर्भरता को स्थायी रूप से समाप्त कर सकते हैं।
कचरा प्रबंधन और स्वच्छता जागरूकता
ग्राम पंचायत के स्वच्छता कर्मी सूरज चक्रवर्ती ने ग्रामीणों को घर-घर से निकलने वाले कचरे के सही प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे कचरे को सड़क या नालियों में फेंकने के बजाय, पंचायत द्वारा निर्धारित व्यवस्था का पालन करें। स्वच्छता के प्रति नागरिकों की नियमित और सक्रिय भागीदारी को आवश्यक बताते हुए, उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह अपने आस-पास स्वच्छता बनाए रखें।
सामूहिक जिम्मेदारी और स्वच्छ भारत का संकल्प
इस अभियान का अंतिम मकसद था कि कनैला खुर्द के निवासियों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प जागरूकता के साथ मजबूत हो। ग्रामीणों ने मिलकर यह संदेश दिया कि उनकी गांव, उनकी जिम्मेदारी है और उन्हें सिंगल यूज प्लास्टिक से पूरी तरह मुक्ति पानी है। यह अभियान ग्रामीण समुदाय के बीच जागरूकता फैलाने, कचरा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझाने का एक प्रभावशाली माध्यम साबित हुआ।
कुल मिलाकर, कनैला खुर्द का यह प्लास्टिक के खिलाफ अनूठा अभियान, नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह दिखाता है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं, यदि समाज का हर वर्ग इसमें सक्रिय भागीदारी करे। स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के इस अनूठे संदेश ने न सिर्फ गांव को स्वच्छ बनाने का संकल्प दिलाया है, बल्कि यह हमारे देश को भी प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


























