Find out where Delhi ranks among the worst cities: जब भी मानसून के मौसम में देश के बड़े शहरों में कुछ घंटों की तेज बारिश होती है, तो एक बार फिर से उसी पुरानी समस्या का सामना करना पड़ता है—’जलभराव’। हाल ही में दिल्ली में हुई भारी बारिश ने गर्मी से तो राहत दिलाई, लेकिन साथ ही राजधानी की बदहाल जल निकासी व्यवस्था को एक बार फिर बेनकाब कर दिया। सड़कें नदी में तब्दील हो गईं, ट्रैफिक जाम की स्थिति विकराल हो गई और कई इलाके तालाब जैसे दिखने लगे। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर भारत के किस शहर का ड्रेनेज सिस्टम सबसे ज्यादा खराब है? और इस लिस्ट में दिल्ली का क्या स्थान है?
क्या किसी शहर की आधिकारिक रैंकिंग मौजूद है?
सबसे पहले तो यह बात समझना जरूरी है कि ना तो भारत सरकार और ना ही कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था ड्रेनेज सिस्टम के आधार पर शहरों की कोई आधिकारिक रैंकिंग जारी करती है। हालांकि, शहरी योजनाकार और विशेषज्ञ बार-बार होने वाले जल भराव, बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता और बाढ़ प्रबंधन (Flood Management) के आधार पर शहरों का मूल्यांकन करते हैं।
ड्रेनेज सिस्टम के मामले में ‘टॉप’ कौन से शहर हैं?
अगर जल निकासी की समस्या के लिहाज से देखा जाए, तो भारत के कुछ बड़े महानगर इस मामले में काफी कमजोर नजर आते हैं। इस लिस्ट में गुरुग्राम, बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली के नाम सबसे ऊपर आते हैं।
- गुरुग्राम (दिल्ली-एनसीआर): दिल्ली-NCR क्षेत्र में गुरुग्राम को बाढ़ और जलभराव के सबसे ज्यादा खतरनाक शहर के तौर पर देखा जाता है। यहां की बारिश के पानी को निकालने की व्यवस्था इतनी बदहाल है कि थोड़ी सी बारिश से शहर पूरी तरह से बेहाल हो जाता है।
- बेंगलुरु: कर्नाटक की सिलिकॉन वैली एक समय पर अपनी झीलों के लिए मशहूर थी, लेकिन तेजी से हुए अवैध निर्माण ने यहां के प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते बंद कर दिए हैं।
- मुंबई: समुद्र तट से सटे होने के कारण मुंबई में हाई टाइड और भारी बारिश का दोहरा शिकार होना पड़ता है।
दिल्ली इस मामले में किस नंबर पर है?
अगर कुल मिलाकर देखा जाए तो दिल्ली इस लिस्ट में टॉप 3 से 4 के बीच आती है। दिल्ली-NCR में गुरुग्राम सबसे ज्यादा प्रभावित है, जबकि नोएडा का ड्रेनेज नेटवर्क इस पूरे इलाके में सबसे बेहतरीन और कुशल माना जाता है। दिल्ली बीच में आती है, जहां कुछ इलाकों की स्थिति बेहद खराब हो जाती है, तो कुछ नए इलाके इससे बचे रहते हैं।
दिल्ली का ड्रेनेज सिस्टम इतना खराब क्यों है? (5 बड़ी वजहें)
दिल्ली की जल निकासी व्यवस्था आजादी के बाद के दौर में बने ‘मास्टर प्लान’ पर आधारित है, जो लगभग पांच दशक पुराना हो चुका है। आइए जानते हैं उन 5 मुख्य कारणों को जिसने दिल्ली को ‘जलभराव’ का शिकार बना दिया:
1. 60 लाख के प्लान पर 2 करोड़ का बोझ
दिल्ली का ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर उस समय डिजाइन किया गया था जब शहर की आबादी महज 60 लाख थी। आज यह आबादी 2 करोड़ से भी अधिक हो गई है। पुराने सिस्टम पर इतना अधिक दबाव उसकी क्षमता से कहीं ज्यादा है।
2. बदलते मौसम और 50 मीमी का फॉर्मूला
राजधानी के ड्रेनेज नेटवर्क को रोजाना 50 मीमी बारिश को संभालने के लिए बनाया गया था। लेकिन क्लाइमेट चेंज के चलते मौसम का पैटर्न बदल गया है। अब कुछ ही घंटों में 100 मीमी से ज्यादा बारिश हो जाती है, जिसे यह सिस्टम सोख ही नहीं पाता।
3. 44 प्राकृतिक नालों की मौत
तेजी से हुए शहरीकरण और अवैध अतिक्रमणों ने दिल्ली की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शहर के 44 प्राकृतिक नाले अब पूरी तरह से गायब हो चुके हैं या उन पर अवैध कब्जे हो गए हैं।
4. सफाई का खेल और CAG रिपोर्ट
नालों की सफाई को लेकर नीतियों की कमी नहीं है, लेकिन कार्यान्वयन शून्य है। कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली के सिर्फ 40% नालों की ही रोजाना सफाई की जाती है। बाकी 60% नाले प्लास्टिक कचरे, मिट्टी और गाद से भरे पड़े हैं, जिससे पानी निकलने का रास्ता चौड़ा होने के बजाय सिकुड़ता जा रहा है।
5. एजेंसियों का ‘ब्यूरोक्रेटिक तमाशा’
दिल्ली में जल निकासी का काम एक ही विभाग के हाथ में नहीं है। PWD, MCD, DDA और दिल्ली जल बोर्ड—इन चारों बड़ी एजेंसियों के बीच जिम्मेदारियां बंटी हुई हैं। मानसून आने से पहले इन एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी और ठीकरा फोड़ने की राजनीति की वजह से बाढ़ से निपटने की तैयारी कभी पूरी तरह से नहीं हो पाती।
दिल्ली का ड्रेनेज सिस्टम सिर्फ नालों की सफाई से नहीं, बल्कि पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से अपग्रेड करने, प्राकृतिक जल निकासी मार्गों को फिर से खोलने और एक ही अधिकार केंद्रित एजेंसी बनाने की बहुत ज्यादा जरूरत है। जब तक ऐसा नहीं होता, हर मानसून में दिल्लीवासियों को ट्रैफिक जाम और डूबी हुई सड़कों का सामना करना पड़ेगा।
























