80वें स्वतंत्रता दिवस: 13वीं बार लाल किले से मोदी ने क्या कहा जानिए

प्रधानमंत्री मोदी के इस भाषण का सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्छ हिस्सा महिला आरक्षण विधेयक को लेकर था। देश की आजादी के इतने लंबे समय बाद भी जब महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उनका सही हिस्सा नहीं मिल पा रहा है।

लाल किले से मोदी की हुंकार, महिलाओं को अधिकार कब

HIGHLIGHTS

  • 80वें स्वतंत्रता दिवस पर गूंजा वंदे मातरम, पीएम का संदेश
  • लाल किले से युवाओं को संदेश, विकसित भारत का सपना
  • पुराने कानून खत्म, लाल किले से मोदी का बड़ा ऐलान
  • बाढ़ प्रभावितों को पीएम का आश्वासन, पूरा देश है साथ

PM Modi Speech Message: दिल्ली के वह ऐतिहासिक लाल किला, जहां से देश की आजादी की नींव पर जमीं पहली ईंट रखी गई थी, एक बार फिर देशभक्ति और संकल्पों के नए रंग में रंग गया। 15 अगस्त का दिन भारतीय इतिहास में केवल एक तारीख नहीं, बल्कि एक ऐसा अध्याय है जो हर बार देश को नई ऊर्जा और नई दिशा देता है। इस वर्ष जब भारत अपने स्वतंत्रता दिवस का 80वां वर्षगांठ मना रहा था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वें अवसर पर राष्ट्र को संबोधित किया।

यह संबोधन किसी औपचारिकता से परे था। इसमें ‘विकसित भारत @2047’ की एक स्पष्ट रूपरेखा थी, युवाओं की अपार शक्ति का आह्वान था और देश की राजनीतिक व्यवस्था में लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण को लेकर एक ऐतिहासिक अपील भी शामिल थी। आइए, इस व्यापक और प्रभावशाली संबोधन की हर अहम बिंदु को विस्तार से समझते हैं।

महिला आरक्षण पर पीएम की सीधी अपील

प्रधानमंत्री मोदी के इस भाषण का सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्छ हिस्सा महिला आरक्षण विधेयक को लेकर था। देश की आजादी के इतने लंबे समय बाद भी जब महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उनका सही हिस्सा नहीं मिल पा रहा है, तो इसे लोकतंत्र की कमजोरी के रूप में देखा जाना चाहिए। पीएम ने इस मुद्दे को बेहद संवेदनशीलता और तीखेपन के साथ उठाया।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा पिछले कई दशकों से सिर्फ राजनीतिक अखाड़े में घूम रहा है। लाल किले की प्राचीर से उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को तिरंगे की शपथ के तहत चेतावनी देते हुए एक खुला प्रस्ताव रखा। उनका कहना था कि अगर कोई दल इस कानून को लागू कराने में सहयोग करता है, तो उसे इसका श्रेय जरूर मिलना चाहिए, लेकिन माताओं और बहनों को उनका अधिकार दिलाने में किसी भी तरह की रुकावट नहीं होनी चाहिए।

यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल ही में इसी वर्ष के शुरुआती महीनों (अप्रैल) में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को विपक्ष के विरोध के कारण पारित नहीं होने दिया गया था। पीएम ने यह संदेश देकर मूल रूप से यह स्पष्ट किया कि महिलाओं की भागीदारी सिर्फ किसी योजना का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह देश की नीति निर्माण प्रक्रिया को और अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए अनिवार्य है।

150वीं वर्षगांठ और देशभक्ति का जज्बा

अपने भाषण की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने जिस विषय को सबसे पहले स्थान दिया, वह था राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’। इस वर्ष बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस गीत की 150वीं जयंती है। पीएम ने कहा कि आजादी के 80वें साल में हर भारतीय के दिल में ‘वंदे मातरम्’ की धुन गूंज रही है।

उन्होंने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की तारीफ करते हुए कहा कि आज तिरंगा सिर्फ लकड़ी के खंभे पर नहीं, बल्कि हर नागरिक के मन में बसा है। इस तरह की भाषा का उपयोग करके उन्होंने सरकारी कार्यक्रमों को जनआंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने इस अवसर पर महात्मा गांधी सहित उन सभी अज्ञात और ज्ञात क्रांतिकारियों को नमन किया, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर इस देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराया।

संख्याओं में छिपा है भारत का आर्थिक और तकनीकी परिवर्तन

किसी भी देश की प्रगति का सबसे सटीक आधार उसके आर्थिक और बुनियादी आंकड़े होते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण के दौरान पिछले एक दशक (खासकर पिछले 12 वर्षों) में देश ने जो तरक्की की है, उसके चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने इन उपलब्धियों को ‘आजादी के बाद के इतिहास में पहली बार देखे गए बदलाव’ करार दिया। आइए इन संख्याओं पर एक नजर डालते हैं:

  • रक्षा और आत्मनिर्भरता: देश की सुरक्षा सबसे प्राथमिक है। पीएम ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत में रक्षा उत्पादन में चार गुना की वृद्धि हुई है। यह दर्शाता है कि भारत अब आयुध आयातक नहीं, बल्कि निर्यातक बनता जा रहा है।
  • पारंपरिक उद्योगों का आधुनिकीकरण: खादी और ग्रामोद्योगों का उत्पादन पांच गुना बढ़ा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का जीवंत प्रमाण है।
  • तकनीकी क्रांति: इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में सात गुना की छलांग लगी है। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा मोबाइल फोन उत्पादन का रहा, जो 33 गुना बढ़ गया है। यह भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण ग्राफ देने वाला आंकड़ा है।
  • डिजिटल भारत: प्रधानमंत्री ने डिजिटल लेनदेन में 100 गुना की वृद्धि का उल्लेख किया। यूपीआई (UPI) ने भारत की पहचान दुनिया में एक डिजिटल लीडर के रूप में स्थापित की है। इंटरनेट यूजर्स चार गुना हुए और पेटेंट ग्रांट्स में भी चार गुना की बढ़ोतरी बताती है कि भारत में इनोवेशन (नवप्रवर्तन) का माहौल तेजी से विकसित हो रहा है।
  • बुनियादी ढांचा और रेलवे: आधुनिक रेलवे कोचों का निर्माण 21 गुना बढ़ा है, जो यात्री सुविधाओं और मेक इन इंडिया दोनों को बढ़ावा देता है। मेट्रो नेटवर्क का विस्तार शहरी जनता के लिए एक बड़ी राहत है।

जन-कल्याण की नई गति

सिर्फ बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां लगाना ही विकास नहीं है, विकास तब सार्थक होता है जब गरीबों के घर तक सुविधाएं पहुंचें। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले एक दशक में सरकार ने जन-सुविधाओं को पहुंचाने की जो गति अपनाई है, वह पहले कभी नहीं देखी गई।

  • नल से जल योजना के तहत पानी के कनेक्शन देने की सालाना औसत गति पहले की तुलना में 15 गुना अधिक रही।
  • उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन देने की रफ्तार 6 गुना बढ़ाई गई, जिससे धुएं से ग्रस्त रसोईयों का दृश्य बदला।
  • शौचालय निर्माण की गति चार गुना की गई, जिसने ग्रामीण भारत की महिलाओं को सम्मानजनक जीवन दिया।
  • गरीबों को आवास (प्रधानमंत्री आवास योजना) उपलब्ध कराने की गति तीन गुना तेज हुई।

गवर्नेंस (शासन व्यवस्था) में आया आमूल-चूल परिवर्तन

प्रधानमंत्री ने एक बहुत ही महत्वपूर्छ बिंदु पर प्रकाश डाला—’गवर्नेंस’। उन्होंने कहा कि पिछली सदी के ब्रिटिश काल के कानूनों और नियमों के भरोसे 21वीं सदी में भारत को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। इसलिए सरकार ने हजारों अनावश्यक कम्प्लायंस (Compliances) को खत्म किया और सैकड़ों पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को रद्द कर दिया। इससे न सिर्फ भ्रष्टाचार कम हुआ, बल्कि व्यापार करने में भी आसानी हुई।

प्राकृतिक आपदा (बाढ़) पर संवेदनशीलता का प्रदर्शन

एक जिम्मेदार शासक के रूप में प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के दौरान उन राज्यों का भी जिक्र किया जहां पिछले दिनों भारी बाढ़ आई है। उन्होंने बाढ़ से प्रभावित परिवारों को आश्वासन दिया कि उनका दुख और नुकसान केवल वहीं के लोग नहीं बांट रहे, बल्कि पूरा भारत उनके साथ इस कठिन समय में खड़ा है। यह बयान केंद्र और राज्यों के बीच आपदा प्रबंधन में एकजुटता का संदेश देता है।

‘युवा शक्ति’: 2047 के सपने की नींव

इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस समारोह की सबसे बड़ी विशेषता उसका ‘युवा केंद्रित’ (Youth-Centric) होना था। समारोह में लगभग 5,000 विशेष अतिथियों को बुलाया गया था, जिनमें बड़ी संख्या में युवा, एनसीसी (NCC) कैडेट्स और ‘मेरा भारत’ (Mera Bharat) अभियान के स्वयंसेवक शामिल थे।

पीएम ने ‘Yuva Shakti for Viksit Bharat@2047’ के थीम को समझाते हुए एक बेहद प्रेरणादायक बात कही। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवा केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी (Beneficiaries) नहीं हैं, बल्कि वे इस विकास यात्रा के प्रमुख भागीदार (Key Partners) और इंजन हैं। युवाओं को लाल किले की दीवारों के पीछे नहीं, बल्कि देश की अग्रिम पंक्ति में खड़े देखकर सरकार ने एक नई परंपरा की शुरुआत की है।

विकसित भारत 2047

भाषण के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री ने 2047 के लक्ष्य पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि कोई भी राष्ट्र तब तक महान नहीं बन सकता, जब तक वह छोटे सपने देखता रहे। भारत को अब बड़े सपने देखने होंगे क्योंकि बड़े सपने सोच को विस्तार देते हैं।

प्रधानमंत्री ने दुनिया के सामने भारत के ‘साहस’ की पहचान को रेखांकित किया। उनका कहना था कि जब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश खुद को 2047 तक विकसित बनाने का संकल्प लेता है, तो वैश्विक समुदाय को भारत को एक अलग नजरिए से देखने पर मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ नागरिकों की मेहनत और दृढ़ संकल्प से यह लक्ष्य असंभव नहीं है। जब संकल्प दृढ़ होता है, तो कठिनाइयां और आपदाएं रास्ते बन जाती हैं।

लाल किले पर ध्वजारोहण से पहले प्रधानमंत्री ने राजघाट जाकर बापू को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने उनका स्वागत किया। सलामी गारद का निरीक्षण करने के बाद तिरंगा फहराया और 21 तोपों की गूंजती सलामी देश की गरिमा का प्रतीक बनी।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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