जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले आप पार्टी (AAP) की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आंदोलन से जुड़े संगठनों को तैयारी मजबूत रखने की सलाह दी है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के खिलाफ होने वाले इस प्रदर्शन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हो सकती है। भारद्वाज ने संगठनों से कहा कि वे केवल अपने शीर्ष नेतृत्व पर निर्भर न रहें, बल्कि दूसरी और तीसरी पंक्ति के नेताओं को भी जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार रखें।
उनकी अपील का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि किसी भी संभावित कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शन का संचालन और आपसी समन्वय बाधित न हो। उन्होंने कहा कि अगर किसी संगठन के प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिया जाता है, तो अगली पंक्ति के पदाधिकारियों को तुरंत जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। साथ ही, प्रदर्शनकारियों तक जरूरी संदेश पहुंचाने और संगठन के भीतर संपर्क बनाए रखने की योजना पहले से तय होनी चाहिए।

गिरफ्तारी की स्थिति के लिए वैकल्पिक नेतृत्व की तैयारी
सौरभ भारद्वाज ने आशंका जताई कि कार्रवाई केवल बड़े नेताओं तक सीमित नहीं रह सकती। उनके मुताबिक, मिडिल और निचले स्तर के पदाधिकारियों को भी हिरासत में लिए जाने की स्थिति बन सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन से एक दिन पहले, यानी 9 अक्टूबर को जिला या विधानसभा स्तर के नेताओं को हिरासत में लिया जा सकता है। यह उनका दावा है; पुलिस कार्रवाई को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई पुष्टि इस जानकारी में शामिल नहीं है।
ऐसी परिस्थिति में संगठन के कामकाज को जारी रखने के लिए नेतृत्व की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी होगी। भारद्वाज ने संगठनों से अपील की कि वे पहले से तय करें कि किसी नेता की अनुपस्थिति में कौन जिम्मेदारी संभालेगा। पहली पंक्ति के बाद दूसरी और फिर तीसरी पंक्ति के पदाधिकारियों को भी भूमिकाओं की जानकारी होनी चाहिए, ताकि अचानक नेतृत्व संकट पैदा न हो।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रखने पर जोर
आप पार्टी (AAP) नेता ने कहा कि किसी भी प्रदर्शन में नेताओं की मौजूदगी भीड़ को दिशा देने और माहौल शांतिपूर्ण बनाए रखने में मदद कर सकती है। अगर प्रमुख नेतृत्व को हिरासत में लिया जाता है, तो प्रदर्शन को अनुशासित बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी वजह से उन्होंने वैकल्पिक नेतृत्व तैयार रखने को जरूरी बताया।
हालांकि, भारद्वाज ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में आंदोलन का स्वरूप लोकतांत्रिक, संवैधानिक, कानूनी और शांतिपूर्ण रहना चाहिए। उनकी अपील का आशय यह था कि नेतृत्व या संचार में बाधा आने पर भी प्रदर्शनकारी तय नियमों और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें। संगठनों के लिए यह जरूरी होगा कि वे अपने कार्यकर्ताओं को पहले से स्पष्ट निर्देश दें और किसी भी तनावपूर्ण स्थिति में संयम बनाए रखने को कहें।
व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम के विकल्प पर विचार
प्रदर्शन की तैयारी के दौरान संचार व्यवस्था को लेकर भी भारद्वाज ने संगठनों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अगर व्हाट्सऐप या इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर रोक लगती है, या किसी वजह से उनका इस्तेमाल संभव नहीं रहता, तो संगठनों के पास संपर्क का दूसरा तरीका होना चाहिए।
Sources – Leaders of Organizations supporting Jantar Mantar 2.0 will be arrested soon in false cases
10 Oct Peaceful Protest must go on inspite of arrests.
Leaders & organisations must create back up leadership
There must be plan B for communication.
The movement is bigger than any person, organisation or political party.
— Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) October 5, 2026
उन्होंने संगठनों से पहले ही यह तय करने को कहा कि मुख्य सोशल मीडिया माध्यम काम न करने की स्थिति में कौन-सा विकल्प अपनाया जाएगा। प्रदर्शन से जुड़े संदेश, बदलाव और जरूरी सूचनाएं कार्यकर्ताओं तक कैसे पहुंचेंगी—इसकी योजना पहले से बनाना जरूरी है। हालांकि, उन्होंने किसी खास वैकल्पिक ऐप या माध्यम का नाम नहीं बताया। इसलिए संगठनों को अपनी जरूरत और उपलब्ध साधनों के अनुसार सुरक्षित और भरोसेमंद संचार व्यवस्था तय करनी होगी।
प्लान B और प्लान C तैयार रखने की अपील
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मौजूदा हालात में किसी संगठन को केवल एक ही योजना पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने नेतृत्व और संचार—दोनों के लिए प्लान B और प्लान C तैयार रखने पर जोर दिया। इसका मतलब है कि पहली व्यवस्था बाधित होने पर संगठन के पास तुरंत लागू किया जा सकने वाला दूसरा रास्ता हो और जरूरत पड़ने पर तीसरा विकल्प भी मौजूद हो।
नेतृत्व के स्तर पर वैकल्पिक जिम्मेदारियां तय करने के साथ-साथ संगठनों को यह भी स्पष्ट करना होगा कि किस परिस्थिति में कौन निर्णय लेगा। इसी तरह, संचार के लिए भी एक से अधिक माध्यम तय रखने से जरूरी सूचनाएं कार्यकर्ताओं तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले संगठनों के सामने तैयारी की चुनौती
भारद्वाज की अपील ऐसे समय आई है, जब जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन प्रस्तावित है। उनके बयान में पुलिस कार्रवाई और संभावित हिरासत को लेकर चिंता जताई गई है, लेकिन ये आशंकाएं उनके दावे के तौर पर ही सामने आई हैं। प्रदर्शन से पहले संगठनों के लिए प्रमुख चुनौती यह होगी कि वे अपनी तैयारी को शांतिपूर्ण और कानूनी दायरे में रखते हुए नेतृत्व, समन्वय और संचार के वैकल्पिक इंतजाम स्पष्ट करें।
कुल मिलाकर, सौरभ भारद्वाज ने आंदोलन से जुड़े संगठनों को किसी भी संभावित बाधा के लिए पहले से तैयार रहने का संदेश दिया है। उनकी अपील में तीन बातें प्रमुख हैं—वैकल्पिक नेतृत्व, भरोसेमंद संचार व्यवस्था और शांतिपूर्ण प्रदर्शन। 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले संगठन इन व्यवस्थाओं को किस तरह लागू करते हैं, इस पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।






















