दुनिया के कई दूरदराज इलाकों के बारे में ऐसी कहानियां प्रचलित हैं, जिनमें लोकविश्वास और वास्तविक घटनाएं आपस में घुल-मिल जाती हैं। दक्षिणी मेक्सिको के ओक्साका राज्य में स्थित टिल्टेपेक गांव भी ऐसी ही एक कहानी के कारण चर्चा में रहा है। लंबे समय तक दावा किया जाता रहा कि गांव के लोग एक खास पेड़ को देखने के बाद अपनी आंखों की रोशनी खो देते हैं। कुछ कहानियों में तो यह भी कहा गया कि वहां के सभी लोग अंधे हैं।
लेकिन क्या टिल्टेपेक के हर निवासी के अंधे होने की बात सच है? उपलब्ध जानकारी इस दावे की पुष्टि नहीं करती। गांव से जुड़ी इस रहस्यमयी कथा के पीछे एक संक्रामक बीमारी और उससे जुड़ी स्थानीय मान्यताओं का उल्लेख मिलता है। इस बीमारी को ओन्कोसेर्सियासिस, यानी रिवर ब्लाइंडनेस, कहा जाता है।
रहस्यमयी पेड़ की कहानी कहां से आई?
टिल्टेपेक के निवासी जापोटेक समुदाय से जुड़े हैं। स्थानीय लोककथाओं में बाविनि या लावजेला नाम के एक पेड़ का जिक्र मिलता है। मान्यता थी कि इस पेड़ को देखने से व्यक्ति की आंखों की रोशनी जा सकती है। जब गांव में दृष्टि संबंधी समस्याओं के मामले सामने आए, तो पेड़ को लेकर बनी यह धारणा और मजबूत होती गई।
ऐसी मान्यताएं अक्सर उस समय जन्म लेती हैं, जब किसी बीमारी का कारण समझना मुश्किल हो। आंखों की रोशनी खोने जैसी गंभीर घटना का कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण न होने पर लोग उसे किसी परिचित चीज—जैसे पेड़, जगह या अलौकिक शक्ति—से जोड़ सकते हैं। इस तरह एक स्थानीय कहानी पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही।
हालांकि, वैज्ञानिक जांच में अंधेपन का कारण किसी पेड़ को देखना नहीं पाया गया। बीमारी के संभावित कारण के रूप में परजीवी संक्रमण की पहचान की गई।
रिवर ब्लाइंडनेस क्या है?
ओन्कोसेर्सियासिस एक परजीवी बीमारी है, जो Onchocerca volvulus नाम के कृमि से होती है। यह संक्रमण संक्रमित काली मक्खियों के काटने से फैल सकता है। ये मक्खियां आमतौर पर तेज बहने वाली नदियों और जलधाराओं के आसपास पनपती हैं। इसी कारण बीमारी को अंग्रेजी में river blindness कहा जाता है।
संक्रमित मक्खी के काटने पर परजीवी शरीर में प्रवेश कर सकता है। संक्रमण के बाद शरीर में इसके लार्वा विकसित हो सकते हैं। कुछ लोगों में त्वचा पर खुजली या अन्य त्वचा संबंधी परेशानियां दिख सकती हैं। गंभीर या लंबे समय तक बने संक्रमण में आंखें प्रभावित हो सकती हैं और दृष्टि को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
यह जरूरी नहीं कि हर संक्रमित व्यक्ति अंधा हो जाए। बीमारी का असर संक्रमण की गंभीरता और अन्य परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए रिवर ब्लाइंडनेस के बारे में जानकारी देते समय यह कहना सही नहीं होगा कि किसी गांव के सभी लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं या सभी की दृष्टि चली जाती है।

क्या टिल्टेपेक के बच्चे जन्म से अंधे होते हैं?
टिल्टेपेक से जुड़ी एक और प्रचलित बात यह है कि वहां बच्चे जन्म से ही अंधे पैदा होते हैं। इस दावे को भी प्रमाणित तथ्य की तरह पेश करना ठीक नहीं है। रिवर ब्लाइंडनेस जन्मजात अंधेपन का दूसरा नाम नहीं है। इस बीमारी का संक्रमण संक्रमित काली मक्खियों के काटने से होता है और इसके लक्षण बाद में सामने आ सकते हैं।
इसलिए किसी बच्चे के जन्म के समय दृष्टि सामान्य हो सकती है, जबकि बाद में संक्रमण या किसी अन्य आंखों की समस्या के कारण दृष्टि प्रभावित हो। किसी खास गांव में बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में ठोस निष्कर्ष देने के लिए विश्वसनीय चिकित्सा आंकड़ों की जरूरत होती है।
बीमारी और लोकविश्वास में फर्क समझना जरूरी
टिल्टेपेक की कहानी दिखाती है कि किसी बीमारी की वजह स्पष्ट न होने पर लोकविश्वास कैसे बन सकते हैं। स्थानीय पेड़ को दोष देने की धारणा गांव की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा हो सकती है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से पेड़ को देखने से अंधापन होने का कोई प्रमाण नहीं है। वहीं, ओन्कोसेर्सियासिस एक वास्तविक परजीवी संक्रमण है, जिसका फैलाव संक्रमित काली मक्खियों से जुड़ा है।
यह भी ध्यान रखना चाहिए कि टिल्टेपेक को “दुनिया का ऐसा गांव जहां सभी लोग अंधे हैं” कहना भ्रामक हो सकता है। किसी पूरे समुदाय के बारे में सनसनीखेज दावा करने के बजाय यह बताना बेहतर है कि गांव को अंधेपन और एक रहस्यमयी पेड़ से जुड़ी लोककथा के कारण पहचान मिली, जबकि बीमारी के पीछे संभावित वैज्ञानिक कारण परजीवी संक्रमण बताया गया।























