आयुर्वेद में छिपा है डायबिटीज का अचूक इलाज: जानिए कैसे करें शुगर कंट्रोल

A 'Holistic Ayurvedic Formula' to Control Diabetes: डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि मधुमेह केवल एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर की धातुओं (रस, रक्त, मांस, मेद, मज्जा और ओज) को प्रभावित कर रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को ध्वस्त कर देता है। अगर समय रहते इस पर कंट्रोल नहीं किया गया।

आयुर्वेद में छिपा डायबिटीज़ का ‘अचूक इलाज’: जानिए कैसे खान-पान और देसी नुस्खे करेंगे शुगर कंट्रोल

HIGHLIGHTS

  • 20-25 की उम्र में बढ़ रहा डायबिटीज का खतरा
  • आयुर्वेद दे रहा युवाओं को नई संजीवनी
  • शुगर कंट्रोल के रामबाण इलाज
  • डायबिटीज की दवाई से ज्यादा जरूरी है आपकी 'थाली'
  • आयुर्वेदिक डॉक्टर्स का चेतावनी भरा संदेश

A ‘Holistic Ayurvedic Formula’ to Control Diabetes: देश-दुनिया में डायबिटीज (मधुमेह) को जड़ से खत्म करना चुनौती भले ही हो, लेकिन सही जागरूकता और आयुर्वेद के संगम से इसे घुटने टेकने पर मजबूर किया जा सकता है। श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के डायबिटीज एक्सपर्ट्स ने मीडिया से बात पर कहा कि कैसे खान-पान में छोटे बदलाव और कुछ अचूक देसी नुस्खे न सिर्फ शुगर लेवल को कंट्रोल करते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी इस खतरनाक बीमारी से सुरक्षित रख सकते हैं। आज के भागदौड़ भरे जीवन में आयुर्वेद का यह खजाना खासकर युवाओं के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। आइए जानते हैं आयुर्वेद के उस अनूठे दृष्टिकोण के बारे में:

चौंकाने वाला आंकड़ा: अब 20-25 की उम्र में डायबिटीज

बता दें कि एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर ने चेतावनी देते हुए बताया कि लगभग 10 साल पहले यह बीमारी 40 की उम्र के बाद देखने को मिलती थी, लेकिन पिछले 5-7 सालों में यह आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है। अब 20 से 25 साल के युवाओं में भी मधुमेह के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। WHO की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में 42 से 45 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रस्त हैं और आने वाले कुछ सालों में ये संख्या चार गुना होने का अनुमान है।

आयुर्वेद की नजर में मधुमेह और उसके कारण

आयुर्वेद में डायबिटीज को ‘प्रमेह’ कहा जाता है कि बताया कि ये रोग प्रारंभ में कफ दोष की वृद्धि से शुरू होकर धीरे-धीरे वात प्रधान और जटिल रूप ले लेता है। इसके प्रमुख कारण हैं:

  • ज्यादा मिठाई और भारी या स्निग्ध (तैलीय) भोजन का सेवन
  • शारीरिक गतिविधि की कमी और आलसी दिनचर्या
  • दिन में सोने की आदत

इन लक्षणों को करें गंभीरता से लें:

बार-बार और अधिक मात्रा में पेशाब आना, मूत्र का मीठा या चिपचिपा होना, अत्यधिक प्यास और भूख लगना, शरीर में असामान्य कमजोरी, थकान और बिना किसी वजह से वजन घटना।

डायबिटीज सिर्फ बीमारी नहीं, अन्य रोगों की जड़

डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि मधुमेह केवल एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर की धातुओं (रस, रक्त, मांस, मेद, मज्जा और ओज) को प्रभावित कर रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को ध्वस्त कर देता है। अगर समय रहते इस पर कंट्रोल नहीं किया गया, तो यह निम्न बीमारियों को जन्म दे सकता है:

  • चोट के घाव का देर से भरना
  • त्वचा संक्रमण
  • आंखों की रोशनी कमजोर होना (डायबिटिक रेटिनोपैथी)
  • नर्व (स्नायु) संबंधी समस्याएं
  • किडनी डैमेज और हृदय रोग का बढ़ता खतरा

शुगर कंट्रोल के ‘अचूक’ आयुर्वेदिक नुस्खे

आयुर्वेद में मधुमेह का उपचार सिर्फ दवाइयों तक सीमित नहीं है, बल्कि आहार, विहार (जीवनशैली) और औषधि के संतुलन पर आधारित है। विशेषज्ञों ने इन औषधियों को शुगर कंट्रोल के लिए ‘अचूक’ बताया:

  • निशामलकी चूर्ण
  • चंद्रप्रभा वटी
  • त्रिफला चूर्ण
  • गुग्गुलु योग

ये औषधियां रक्त शर्करा नियंत्रण, मेटाबॉलिज्म सुधार और शरीर की धातुओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

डायट में करें ये बदलाव

स्वस्थ आहार शरीर पर सबसे गहरा असर डालता है। डॉक्टर ने बताया कि मधुमेह के मरीजों को अपनी प्लेट में इन चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए:

  • जादुई पत्ते: नीम, जामुन के पत्ते और गुड़मार (मेथी आदि)।
  • हरी सब्जियां:लौकी, तोरी, पालक, करेला, खीरा और अन्य मौसमी हरी सब्जियां।

ये सभी चीजें शरीर में शर्करा का संतुलन बनाए रखने और पाचन तंत्र को बेहतर करने में मदद करती हैं।

पंचकर्म चिकित्सा: बदलाव का असली अनुभव

श्री कृष्णा आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला ने बताया कि मधुमेह के रोगियों के लिए ‘पंचकर्म चिकित्सा’ के अंतर्गत ‘बस्ती’ देना अत्यंत लाभदायक साबित हुआ है। अस्पताल में 180 बेड की सुविधा और 7 क्लीनिकल ओपीडी के माध्यम से रोगियों को आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 17-18 साल के बच्चों में डायबिटीज की पुष्टि होना सबसे चिंताजनक पहलू है।

कुलपति का संदेश: “औषधियां सहायक हैं, बचाव आपके हाथ में”

श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर वैद्य करतार सिंह धीमान ने ईटीवी भारत की इस मुहिम की सराहना करते हुए एक बेहद गंभीर बात कही। उन्होंने कहा कि मधुमेह पूर्णतः साध्य रोग नहीं है, इसलिए इसे खत्म नहीं किया जा सकता, केवल नियंत्रित किया जा सकता है। औषधियां केवल रोग को कंट्रोल करने में सहायक होती हैं, लेकिन रोग से बचाव व्यक्ति के अपने हाथ में है।

उन्होंने बताया कि आर्थिक स्थिति बेहतर होने के बाद लोगों ने आरामतलब जीवनशैली और अतिभोजन को अपना लिया है, जो घातक साबित हो रहा है। भारतीय पारंपरिक जीवनशैली ‘श्रम और संतुलन’ पर आधारित थी। कुलपति ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली, नियमित शारीरिक गतिविधि और अनुशासित दिनचर्या के प्रति जागरूक करें।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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