सेवा भारती नोएडा महानगर में मनाई भगिनी निवेदिता जन्म जयंती

संदिप कुमार गर्ग


नोएडा। सेक्टर 12 सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय परिसर में सेवा भारती नोएडा महानगर द्वारा भगिनी निवेदिता जन्म जयंती समारोह का आयोजन किया गया जिसमें सेवा भारती की प्रांत सह किशोरी विकास प्रमुख सुरभि सिंह, प्रांत सामाजिक आयाम प्रमुख अनिता सिंह, सेवा भारती नोएडा महानगर अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश गुप्ता, सेवा भारती महानगर नोएडा के मंत्री अमृतपाल सिंगला, सरस्वती शिशु मंदिर प्रधानाचार्य प्रकाश वीर जी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सेवा प्रमुख सुन्दर जी एवं अतिथियों के रूप में उपस्थित रहे।

सेवा भारती की प्रांत सह किशोरी विकास प्रमुख सुरभि सिंह ने बताया कि 28 अक्टूबर 1867 को जन्मीं निवेदिता का वास्तविक नाम ‘मार्गरेट एलिजाबेथ नोबल’ था। एक अंग्रेजी-आइरिश सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक, शिक्षक एवं स्वामी विवेकानन्द की शिष्या- मार्गरेट ने 30 साल की उम्र में भारत को ही अपना घर बना लिया, मात्र 10 साल की उम्र में अपने पिता को खोने के बाद उनका जीवन गरीबी में बीता। उनकी शिक्षा इंग्लैंड के एक चैरिटेबल बोर्डिंग स्कूल में हुई। सिर्फ 17 साल की उम्र में अपनी पढाई पूरी करने के बाद उन्होंने शिक्षक की नौकरी कर ली। 25 साल की उम्र में उन्होंने अपना भी एक स्कूल खोला और वह उस समय शिक्षा में अलग-अलग प्रयोग करने के लिए मशहूर थीं। इसके अलावा वे ज़िन्दगी का सच्चा सार जानना और समझना चाहती थीं और इसीलिए उन्हें महान विचारकों और सुधारकों की संगत बेहद पसंद थी। साल 1895 में मार्गरेट के जीवन में सबसे बड़ा बदलाव आया। दरअसल, उन्हें एक निजी संगठन द्वारा एक ‘हिन्दू योगी’ का भाषण सुनने के लिए बुलाया गया था। यह योगी कोई और नहीं बल्कि स्वामी विवेकानंद थे। वह स्वामी जी के भाषण से इतना प्रभावित हुई की उन्होंने भारत आने का फैसला कर लिया। जब विवेकानंद मार्गरेट से मिले तो उन्हें भी समझ में आ गया कि मार्गरेट भारतीय महिलाओं के उत्थान में योगदान कर सकती हैं। मार्गरेट ने उसी पल यह मान लिया कि भारत ही उनकी कर्मभूमि है। इसके तीन साल बाद, जनवरी, 1898 में मार्गरेट भारत आ गयीं। स्वामी विवेकानंद ने उनको 25 मार्च 1898 को दीक्षा देकर भगवान बुद्ध के करुणा के पथ पर चलने की प्रेरणा दी। दीक्षा के समय स्वामी विवेकानंद ने उन्हें नया नाम ‘निवेदिता’ दिया, जिसका अर्थ है ‘समर्पित’ और बाद में वह पूरे देश में इसी नाम से विख्यात हुईं।

सेवा भारती नोएडा महानगर के मंत्री अमृत पाल सिंगला ने बताया कि निवेदिता दीक्षा प्राप्त करने के बाद कोलकाता के बागबाज़ार में बस गयीं थी। यहाँ पर उन्होंने लड़कियों के लिए एक स्कूल शुरू किया। जहाँ पर वह लडकियों के माता-पिता को उन्हें पढ़ने भेजने के लिए प्रेरित करती थी। निवेदिता स्कूल का उद्घाटन रामकृष्ण परमहंस की पत्नी मां शारदा ने किया था। निवेदिता ने माँ शारदा के साथ बहुत समय बिताया। उस समय बाल-विवाह की प्रथा प्रचलित थी और स्त्रियों के अधिकारों के बारे में तो कोई बात ही नहीं करता था। पर निवेदिता को पता था कि केवल शिक्षा ही इन कुरूतियों से लड़ने में मददगार हो सकती है। उन्होंने भारत मे स्त्री शिक्षा, और भारतीय संस्कृति के उत्थान और कल्याण के लिए कार्य किया. शिक्षा, स्वास्थ्य, राष्ट्रीयता पर बहुत योगदान दिया।

Sandhya Samay News

संध्या समय न्यूज़ – आपके विश्वास की आवाज़ संध्या समय न्यूज़ की स्थापना वर्ष 2018 में की गई, जो कि MSME में विधिवत रूप से पंजीकृत है। हमारा उद्देश्य समाज तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद समाचार पहुँचाना है। हम देश-प्रदेश की ताज़ा खबरों, सामाजिक मुद्दों, और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को आपके सामने सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करते हैं। हम अपने सभी दर्शकों और पाठकों का दिल से आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हमें लगातार देखा, समझा और अपना विश्वास बनाए रखा। आपकी यही सराहना और समर्थन हमें और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। संध्या समय न्यूज़ हमेशा सत्य, निष्पक्षता और जनसेवा के मूल्यों पर कार्य करता रहेगा।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now