राम नवमी 2026: जाने राम नवमी के तीनों प्रकार के व्रतों का महत्व और शुभ समय

पंचांग के अनुसार करें पूजा, यहां जानें सटीक मध्याह्न क्षण (फाइल फोटो)

The Midday Moment of Ram Navami: सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि अत्यंत पावन मानी जाती है। इसी शुभ तिथि को भगवान श्री राम का जन्म हुआ था, इसलिए इसे ‘राम नवमी’ के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में भी इस पावन पर्व को लेकर भक्तों का उत्साह चरम पर है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, भगवान राम का जन्म ‘मध्याह्न काल’ (दोपहर के मध्य) में हुआ था, और इसीलिए इस समय को पूजा-अनुष्ठान के लिए सबसे अधिक शुभ माना जाता है।

क्या है ‘मध्याह्न काल’ का महत्व?

पारंपरिक हिन्दू काल गणना के अनुसार, मध्याह्न काल लगभग छह घटी (करीब 2 घंटे 24 मिनट) का होता है। यह वह समय होता है जब दिन का सूर्य अपने चरम पर होता है। मान्यता है कि मध्याह्न के ठीक मध्य का क्षण भगवान राम के जन्म का समय था। आधुनिक समय में पश्चिमी घड़ी और ग्रेगोरियन कैलेंडर के प्रभाव के कारण अधिकांश लोग दोपहर के ठीक 12 बजे को ही मध्याह्न मान लेते हैं। यदि सूर्योदय और सूर्यास्त क्रमशः सुबह और शाम 6 बजे होते, तो यह समय सही होता। किंतु, भारत के विभिन्न नगरों में सूर्योदय और सूर्यास्त का समय भिन्न-भिन्न होता है। इसलिए, शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार अधिकांश भारतीय शहरों में जन्मोत्सव मनाने का सर्वोत्तम समय सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच आता है। द्रिक पंचांग के अनुसार अपने शहर के विशिष्ट मध्याह्न क्षण का पता लगाकर ही भगवान का जन्मोत्सव मनाना श्रेयस्कर है।

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अयोध्या में विशेष आयोजन

बता दें कि भगवान श्री राम का जन्मस्थान अयोध्या इस अवसर पर देखने लायक दृश्य पेश करता है। 2026 के राम नवमी समारोह में दूर-दूर से आए श्रद्धालु पवित्र सरयू नदी में स्नान करने के पश्चात् राम मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए उमड़ पड़ेंगे। मंदिरों में इस दिन भगवान श्री राम के नाम का जाप और जन्मोत्सव अपने चरम पर होता है, जहाँ विशेष श्रृंगार और भंडारे का आयोजन किया जाता है।

व्रत और पूजा विधि

राम नवमी के दिन ‘आठ प्रहर’ का व्रत रखने का विधान है, जिसका अर्थ है सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक व्रत पालन करना। शास्त्रों में इस व्रत को तीन प्रकार से मनाने का उल्लेख मिलता है:

  1.  नैमित्तिक: जिसे बिना किसी विशेष कारण के केवल व्रत के नियम के अनुसार किया जाता है।
  2.  नित्य: जिसे जीवन पर्यंत बिना किसी कामना या इच्छा के नियमित रूप से किया जाता है।
  3. काम्य: जिसे किसी विशेष मनोरथ या मन्नत पूरी होने की इच्छा से किया जाता है।

धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस दिन उपवास, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। भक्तगण मध्याह्न काल में भगवान राम के जन्म क्षण की स्तुति करते हुए इस पावन त्योहार को अपने घरों और मंदिरों में समाहित करते हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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