MCD के नोटिस पर पालम में दुकानदारों का विरोध

दिल्ली के पालम क्षेत्र में 25-30 दुकानों को MCD ने कथित तौर पर बिना कन्वर्जन शुल्क व्यावसायिक गतिविधियां चलाने के लिए नोटिस दिया है। दुकानदारों ने नोटिस की समय-सीमा और कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

दुकानदारों की मांग: पहले मिले कारोबार का विकल्प

HIGHLIGHTS

  • पालम में दुकानदारों को नोटिस, आखिर वजह क्या?
  • देर शाम चस्पा नोटिस, दुकानदारों ने उठाए सवाल
  • किराना और नाई की दुकानों पर MCD की कार्रवाई
  • कन्वर्जन शुल्क नहीं भरा तो बंद होगा कारोबार?

दिल्ली नगर निगम (MCD) ने दक्षिण-पश्चिम जोन के नजफगढ़ क्षेत्र में आने वाले पालम इलाके की करीब 25 से 30 दुकानों को नोटिस जारी किए हैं। निगम का कहना है कि संबंधित दुकानों में आवश्यक कन्वर्जन और मिसयूज शुल्क जमा किए बिना व्यावसायिक गतिविधियां की जा रही हैं। दुकानदारों को शुल्क जमा करने या व्यावसायिक गतिविधियां रोकने के लिए कहा गया है।

हालांकि, नोटिस जारी होने के तरीके और समय को लेकर स्थानीय दुकानदारों ने आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि नोटिस उन्हें समय-सीमा समाप्त होने के बाद दिया गया और पालन के लिए केवल तीन दिन का वक्त मिला। दुकानदारों का यह भी कहना है कि इलाके में किराना, नाई और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी छोटी दुकानें हैं, जिन पर कार्रवाई से स्थानीय निवासियों को परेशानी हो सकती है।

MCD ने दुकानदारों से क्या कहा?

नोटिस में कथित तौर पर दुकानदारों को निर्धारित कन्वर्जन शुल्क और मिसयूज शुल्क जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, शुल्क जमा न करने की स्थिति में व्यावसायिक गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाने को कहा गया है। निगम की कार्रवाई का आधार यह है कि निर्धारित नियमों के अनुसार जरूरी शुल्क के बिना किसी संपत्ति में व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

निगम अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली में नियमों के तहत व्यावसायिक गतिविधियां चलाने के लिए लागू कन्वर्जन शुल्क जमा करना आवश्यक है। अधिकारी यह भी कहते हैं कि निगम ऐसे मामलों पर निगरानी रखता है और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई करता है। उनका कहना है कि दुकानदारों से उचित बातचीत करके मामले का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।

दुकानदारों ने नोटिस की तारीख और समय पर उठाए सवाल

स्थानीय दुकानदारों का दावा है कि नोटिस पर 5 अक्टूबर की तारीख दर्ज थी, लेकिन उसे 7 अक्टूबर को शाम करीब चार बजे दुकानों पर चस्पा किया गया। दुकानदारों के मुताबिक, नोटिस में तीन दिन के भीतर शुल्क जमा करने या कारोबार रोकने की बात कही गई। उनका आरोप है कि नोटिस देर से मिलने के कारण उन्हें तैयारी करने और निगम से संपर्क करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला।

दुकानदारों ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि नोटिस किस नियम और प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं। साथ ही, वे यह जानना चाहते हैं कि शुल्क की गणना कैसे की गई है और भुगतान या आपत्ति दर्ज कराने के लिए उन्हें कितना समय दिया जाएगा। इस मामले में निगम की ओर से दुकानदारों के आरोपों पर विस्तृत सार्वजनिक जानकारी सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

छोटी जरूरतों की दुकानों पर कार्रवाई से स्थानीय चिंता

दुकानदारों के अनुसार, प्रभावित दुकानों में किराना, नाई और घरों में रोज इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की दुकानें शामिल हैं। उनका कहना है कि ये बड़े शोरूम या भारी व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं, बल्कि आसपास के निवासियों की बुनियादी जरूरतें पूरी करने वाले छोटे कारोबार हैं। ऐसे में अचानक कारोबार बंद होने की स्थिति में दुकानदारों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी परेशानी हो सकती है।

स्थानीय कारोबारियों ने प्रशासन और सरकार से इलाके में दुकानदारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। उनका सुझाव है कि करीब 100 से 150 दुकानों के लिए कोई कॉम्प्लेक्स बनाया जाए या कारोबार जारी रखने के लिए व्यवहारिक विकल्प उपलब्ध कराया जाए। दुकानदारों का कहना है कि समाधान ऐसा होना चाहिए जिससे नियमों का पालन भी हो और छोटे कारोबार पूरी तरह प्रभावित भी न हों।

चुनिंदा दुकानों पर कार्रवाई का आरोप

दुकानदारों ने यह सवाल भी उठाया है कि पालम के दूसरे हिस्सों में शोरूम और अन्य दुकानें चल रही हैं, लेकिन नोटिस केवल 25 से 30 दुकानों को दिए गए हैं। उनका आरोप है कि कार्रवाई समान रूप से नहीं की गई और कुछ दुकानों को ही निशाना बनाया गया। हालांकि, यह दुकानदारों का दावा है; निगम की ओर से कार्रवाई के दायरे और संबंधित संपत्तियों के चयन को लेकर अधिक विवरण सामने आना बाकी है।

इस तरह के मामलों में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि कौन-सी संपत्ति किस श्रेणी में आती है, उस पर कौन-से नियम लागू होते हैं और शुल्क की देनदारी कैसे तय की गई है। दुकानदारों का कहना है कि उन्हें दस्तावेजों और नियमों की जानकारी देकर अपनी बात रखने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।

Sandhya Samay News

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