नोएडा मीडिया क्लब में ब्रह्माकुमारीज का अनूठा आयोजन

बी.के. सुशांत ने समाचारों के प्रभाव को समझाने के लिए एक बेहद ही प्रभावशाली उपमा प्रयोग की। उन्होंने कहा, "सूचना इंसान के विचारों का कच्चा माल है। जो भी खबरें मीडिया प्रसारित करता है, आम जनता उसे ब्लॉटिंग पेपर (सोखने वाला कागज) की तरह तुरंत अपने भीतर सोख लेती है।

ब्रह्माकुमारीज ने पत्रकारों को बताया राज

HIGHLIGHTS

  • पत्रकार अब सिर्फ खबर नहीं, समाज के मानसिक चिकित्सक बनेंगे
  • ब्लॉटिंग पेपर जैसी खबरें नहीं, जनता को चाहिए साफ सूचना
  • नोएडा में पत्रकारों ने सीखा तनाव मुक्ति का खास राजयोग
  • सच की मशाल लेकर बढ़े हर पत्रकार का कदम: ब्रह्माकुमारीज

Noida News: आज के दौर में न्यूज़ रूम की चुस्ती, ब्रेकिंग न्यूज़ का दबाव और 24 घंटे के कार्यसूची चक्र ने मीडिया कर्मियों के जीवन में तनाव और थकान का स्तर काफी बढ़ा दिया है। इसी कड़वी वास्तविकता के बीच 14 अगस्त 2026 को नोएडा सेक्टर-46 स्थित ब्रह्माकुमारीज सेवा केंद्र द्वारा एक विशेष और अनूठा आयोजन किया गया। नोएडा मीडिया क्लब के सहयोग से आयोजित इस परिचर्चा सम्मेलन का उद्देश्य पत्रकारों और संपादकों को उनकी व्यस्त दिनचर्या से कुछ पल निकालकर अपने आंतरिक ‘स्व’ से जोड़ना था।

शहर के प्रमुख अखबारों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल न्यूज़ पोर्टल्स से जुड़े कई वरिष्ठ पत्रकार इस आध्यात्मिक गोष्ठी में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत एक मौन ध्यान सत्र के साथ हुई, जिसने मीडिया जगत की भागदौड़ से निकलकर आए इन लोगों के मन में एक अलग ही शांति का संचार किया।

जानकारी देने वाले से लेकर समाज के मार्गदर्शक तक

इस आध्यात्मिक और पत्रकारिता सम्मेलन के मुख्य वक्ताओं में नोएडा सेक्टर-46 सेवा केंद्र की प्रभारी बी.के. लीना दीदी, ब्रह्माकुमारीज के राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक बी.के. सुशांत तथा वरिष्ठ भ्राता बी.के. राजकुमार शामिल थे। मंच संचालन की जिम्मेदारी भूतपूर्व निदेशक पंकज माथुर ने संभाली, जिन्होंने अपनी बातचीत के शुरुआती तौर पर ही पूरे माहौल को गंभीर और आध्यात्मिक बना दिया।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में एक बेहद गहरा बिंदु रखा। उन्होंने कहा कि आज का मीडिया सिर्फ समाचार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आम जनमानस की सोच को तराशने वाला सबसे शक्तिशाली उपकरण बन चुका है। जब पूरे विश्व में अशांति, भय और उद्वेग का वातावरण व्याप्त है, तब ऐसे समय में मीडिया की जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है।

‘ब्लॉटिंग पेपर’ और ‘सात्विक भोजन’ का अद्भुत उपमान

बी.के. सुशांत ने समाचारों के प्रभाव को समझाने के लिए एक बेहद ही प्रभावशाली उपमा प्रयोग की। उन्होंने कहा, “सूचना इंसान के विचारों का कच्चा माल है। जो भी खबरें मीडिया प्रसारित करता है, आम जनता उसे ब्लॉटिंग पेपर (सोखने वाला कागज) की तरह तुरंत अपने भीतर सोख लेती है। इसका सीधा असर उनके सोचने के ढंग, उनकी भावनाओं और अंततः उनके भाग्य पर पड़ता है।”

वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार मनुष्य के शरीर को विकास और स्वास्थ्य के लिए शुद्ध एवं पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है, उसी तरह मन को शांत रखने के लिए ‘सात्विक’ और शुद्ध सूचनाओं की जरूरत है। अगर मीडिया लगातार विषैली और नकारात्मक खबरें ही खिलाएगा, तो समाज का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ना तय है।

समाज के ‘हीलर’ (चिकित्सक) की भूमिका में

इस कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह था कि पत्रकारों को एक नई परिभाषा दी गई। बी.के. लीना दीदी ने कहा कि आज के दौर में मीडियाकर्मियों को खबरें लाने वाले एजेंट से अधिक ‘हीलर’ यानी समाज के मानसिक स्वास्थ्य के रक्षक के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कोई विवादित या रोमांचक खबर भी हो, तो उसे एक शांतिपूर्ण लहजे और ‘समाधान-ओरिएंटेड’ दृष्टिकोण के साथ परोसा जाना चाहिए, ताकि जनता में भय की बजाय उम्मीद जगे।

वक्ताओं ने ‘पॉजिटिव मीडिया’ यानी सकारात्मक पत्रकारिता की अवधारणा पर जोर दिया। उन्होंने काव्यात्मक भाषा में कहा कि जिस तरह अंधकार स्वयं चला जाता है जब कहीं पर प्रकाश की किरण आती है, ठीक उसी तरह मीडिया समाज के लिए वह दीपक बन सकता है जो सही रास्ते की ओर मार्गदर्शन करे। उन्होंने कहा, “देश का सच्चा विकास तभी संभव है, जब जनता का मन जागृत होगा और हर पत्रकार सच्चाई की मशाल लेकर आगे बढ़ेगा।”

आत्मिक शक्तिकरण से लेखनी में आती है शुद्धता

बी.के. राजकुमार ने व्यावहारिक पक्ष पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि मूल्य-आधारित पत्रकारिता के लिए सबसे पहले पत्रकार को खुद आत्मिक रूप से मजबूत होना होगा। जब तक एक लेखक या संपादक स्वयं तनावमुक्त नहीं होगा, तब तक वह समाज को शांति का संदेश नहीं दे सकता। उन्होंने राजयोग ध्यान को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उनका मानना था कि नियमित ध्यान से लेखनी में एक अलौकिक पवित्रता और सत्यता आती है, जो समाज में व्याप्त निराशा को दूर कर सकती है।

राखी बंधन और भाईचारे का अनोखा संदेश

कार्यक्रम के अंतिम चरण में एक भावनात्मक पल आया, जब ब्रह्माकुमारीज की बहनों ने उपस्थित सभी पत्रकारों और मीडिया कर्मियों के कलाई पर स्नेह और शुभकामनाओं के प्रतीक स्वरूप राखी बांधी। इस राखी का अर्थ केवल पारंपरिक रूप से सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से बहनों ने पत्रकारों के मन की शुद्धता, उनके स्वास्थ्य और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इसके साथ ही यह एक संदेश भी था कि मीडियाकर्मी समाज की रक्षा के लिए संकल्पित हैं।

इस यादगार आयोजन के अंतिम चरण में सभी आमंत्रित अतिथियों को स्मृति चिह्न (मोमेंटो) देकर सम्मानित किया गया। तत्पश्चात सात्विक (शुद्ध और हल्के) जलपान के साथ इस कार्यक्रम का समापन हुआ। इस दो घंटे के कार्यक्रम ने मीडिया जगत के लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया कि पत्रकारिता केवल कटु सत्य को उजागर करने का नाम नहीं है, बल्कि उस सत्य को इस तरह प्रस्तुत करना है जिससे समाज में बदलाव की उम्मीद की किरण जगे। ब्रह्माकुमारीज का यह प्रयास निश्चित रूप से ‘पॉजिटिव जर्नलिज्म’ की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जाएगा।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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