कॉकरोच जनता पार्टी चींटी जनता पार्टी
---Advertisement---

नीम करौली बाबा की दिव्य गाथा अब बड़े पर्दे पर

इस फिल्म की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसका दायरा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। नीम करोली बाबा का प्रभाव ऐसा था कि दुनिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी दिग्गज उनके चरणों में शीश नवाते थे। एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक (मेटा) के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग जैसी हस्तियां बाबा के भक्त रहे हैं।

‘श्री बाबा नीब करौरी महाराज’ ने युवाओं को फिर जोड़ा आध्यात्मिक विरासत से

HIGHLIGHTS

  • जब सिनेमा बना आध्यात्मिकता का माध्यम
  • एक संत, करोड़ों भक्त और प्रेरणा की अमर कथा
  • सुबोध भावे ने पर्दे पर उतारा बाबा का दिव्य व्यक्तित्व
  • सिर्फ फिल्म नहीं, श्रद्धा और विश्वास की एक यात्रा
  • रीयल लोकेशन पर फिल्माई गई बाबा की अद्भुत जीवनगाथा

The Film ‘Shri Baba Neem Karoli Maharaj’News: सिनेमा जगत में धार्मिक और आध्यात्मिक फिल्मों की एक अलग ही गंध होती है। कई वर्षों तक सिनेमाघरों में ऐसी कोई बड़ी फिल्म रिलीज नहीं हुई थी जो दर्शकों को उनकी जड़ों से जोड़े। शायद फिल्म इंडस्ट्री के नामी मेकर अब यह समझ बैठे है कि जेन जेड सिर्फ एक्शन और रोमांस एक्शन वाली फिल्में ही पसंद करते है लेकिन जय बाबा नीम करौली पर बनी फिल्म के प्रेस शोज और प्रिव्यू शोज में 60 फीसदी के करीब युवाओं की मौजूदगी साबित करती है कि युवा वर्ग अपनी प्राचीन विरासत और साधु संतों पर बनी फिल्मों को देखना चाहता है।

एक दिव्य अवतार की कहानी

इस शुक्रवार देश भर में रिलीज हुई यह फिल्म धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी के अवतार माने जाने वाले नीम करोली बाबा की जीवनी का एक पहलू पेश करती है। बाबा के भक्तों में देश और विदेश के लोग शामिल हैं। बाबा के भक्तों में स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग जैसी नामी हस्तियां शामिल हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक साधारण से दिखने वाले फकीर ने अपनी असीम शक्ति और करुणा से न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व में लाखों लोगों का दिल जीत लिया। बाबा के भक्तों की सूची में आम आदमी से लेकर दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोग शामिल हैं।

बाबा के वैश्विक भक्त

इस फिल्म की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसका दायरा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। नीम करोली बाबा का प्रभाव ऐसा था कि दुनिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी दिग्गज उनके चरणों में शीश नवाते थे। एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक (मेटा) के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग जैसी हस्तियां बाबा के भक्त रहे हैं। स्टीव जॉब्स अपने जीवन में जब संकट या भटकाव महसूस करते थे, तो वे भारत आकर बाबा की शरण में आते थे। यह कहानी भारत की आध्यात्मिक गौरव को दर्शाती है कि कैसे एक भारतीय संत ने पश्चिम के बुद्धिजीवियों को प्रभावित किया।

भारत में भी बाबा के चरणों में कई बड़ी हस्तियां आती रही हैं। बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री अनुष्का शर्मा और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले विराट कोहली भी बाबा के आशीर्वाद से प्रेरित रहे हैं। फिल्म इस बात को भी उजागर करती है कि आध्यात्मिकता का कोई धर्म या सीमा नहीं होती; यह तो सिर्फ श्रद्धा और प्रेम का विषय है।

निर्माता की अदम्य साधना और चार साल की रिसर्च

फिल्म के निर्माता शरद सिंह ठाकुर के लिए यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक तीर्थ यात्रा जैसा था। उन्होंने बाबा के जीवन पर कई वर्षों तक गहरा शोध किया। शरद सिंह ठाकुर खुद नीम करोली बाबा के एक बड़े भक्त हैं, जो एक अभिनेता, लेखक, निर्माता और निर्देशक भी हैं। उनका मानना है कि इस फिल्म का उद्देश्य बाबा की शिक्षाओं और उनकी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

इस फिल्म के निर्माता शरद सिंह ठाकुर ने कई वर्षो तक नीम करोली बाबा ‘श्री बाबा नीब करोरी महाराज’ जिंदगी पर काफी रिसर्च की । इस फिल्म का उद्देश्य बाबा की शिक्षाओं और विरासत से युवा पीढ़ी का परिचय कराना है। आज बाबा के भक्त भारत और विश्व भर में फैले हुए हैं। 1973 में नीम करोली बाबा के निधन के दशकों बाद आज भी उनके लाखों अनुयायी उनसे प्रेरणा लेने आश्रम आते रहते हैं।

सुबोध भावे की दमदार एक्टिंग और रीयल लोकेशन

फिल्म में बाबा का किरदार निभाने वाले मराठी अभिनेता सुबोध भावे ने अपने अभिनय से सबको हैरान कर दिया है। उन्होंने नीम करोली बाबा के अंदाज, उनकी मुस्कान और उनके आध्यात्मिक भाव को इतनी बारीकी से पेश किया है कि दर्शकों को लगता है जैसे बाबा स्वयं सामने खड़े हों। फिल्म को रीयल लोकेशन पर शूट किया गया है, जो इसे दूसरी फिल्मों से अलग करता है। बाबा के आश्रमों और उन जगहों के दृश्य जहां बाबा ने अपना जीवन बिताया, कैमरे में कैद हुए हैं, जो फिल्म को एक विश्वसनीयता प्रदान करते हैं।

दर्शकों के लिए संदेश

‘श्री बाबा नीब करौरी महाराज’ फिल्म सिर्फ उन भक्तों के लिए नहीं है जो बाबा को जानते हैं, बल्कि यह हर उस दर्शक के लिए है जो धार्मिक फिल्मों में अच्छी कहानियों की तलाश में है। अगर आप चाहते हैं कि सिनेमा में ऐसी अच्छी और संस्कारी फिल्में आगे भी बनती रहें, तो आपको इसे अपने परिवार के साथ जरूर देखना चाहिए। यह फिल्म न सिर्फ मनोरंजन करती है, बल्कि जीवन जीने की सही कला को भी सिखाती है। फिल्म की सफलता यह संदेश देगी कि दर्शक व्यावसायिक मनोरंजन के साथ-साथ सांस्कृतिक कहानियों को भी सराहते हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now