Bihar News: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में चर्चित ‘चोरनिया कांड’ के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई किया और गायघाट थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत पूरी छापेमारी टीम को निलंबित कर दिया है। वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) कांतेश कुमार मिश्रा ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिससे जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
जाने पूरा मामला?
बता दें कि घटना 17-18 मार्च की रात की है, जब गायघाट थाना क्षेत्र के चोरनिया गांव में पुलिस टीम पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के एक आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी के लिए पहुंची थी। बताया जाता है कि पुलिस टीम के पहुंचते ही आरोपियों ने शोर मचाकर ग्रामीणों को इकट्ठा कर लिया। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ गए और भीड़ ने पुलिस टीम पर पथराव, लाठी-डंडों और फायरिंग से हमला कर दिया। स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख तत्कालीन थानाध्यक्ष राजा सिंह को हवाई फायरिंग करनी पड़ी। इस अफरा-तफरी के दौरान एक ग्रामीण जगतवीर राय की गोली लगने से मौत हो गई, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
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जांच में सामने आई ये बड़ी चूक
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण एसपी राजेश कुमार ने जांच की और अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां उजागर कीं। जांच में सामने आया कि अपर्याप्त बल संवेदनशील इलाके में छापेमारी के लिए पर्याप्त पुलिस बल के साथ नहीं गया गया था। विवेकहीन निर्णय मौके पर हालात को संभालने में विवेकपूर्ण निर्णय नहीं लिया गया। लापरवाही स्थानीय चौकीदार द्वारा संभावित विरोध और भीड़ की भीड़ की जानकारी भी नहीं दी गई।
एयएसपी का बड़ा एक्शन
ग्रामीण एसपी की जांच रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने तत्कालीन थानाध्यक्ष राजा सिंह समेत कुल छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा छापेमारी में शामिल दो गृह रक्षकों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। कार्रवाई का मुख्य आधार काम में लापरवाही और विवेकपूर्ण निर्णय न लेना बताया गया है।
राजनीतिक उबाल और आगे की कार्रवाई
घटना के बाद मामला राजनीतिक रंग भी ले चुका है। नेता पप्पू यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव मृतक के घर पहुंचे और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, मामले की जांच अब मजिस्ट्रेट की देखरेख में चल रही है और एफएसएल (FSL) टीम भी साक्ष्य जुटा चुकी है। पुलिस विभाग की इस कड़े फैसले के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह कार्रवाई भविष्य में ऐसी लापरवाहियों पर विराम लगा पाएगी? अभी यह मामला मुजफ्फरपुर के पुलिस प्रशासन में गहरी चर्चा का विषय बना हुआ है।

























