UP News: मिर्जापुर के सीटी ब्लॉक अंतर्गत गोपालपुर ग्राम सभा में सड़क मरम्मत के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनदेखी का मामला सामने आया है, जिसने ग्रामीणों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। लगभग पाँच महीने पहले ही इस सड़क के पैचिंग कार्य के लिए बजट स्वीकृत किया गया था, लेकिन अभी तक न तो कार्य शुरू हुआ है और न ही कोई प्रगति नजर आ रही है। इसके चलते ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं और उनकी नाराजगी अब उभरकर सामने आ गई है।
सड़क की स्थिति और बजट का मामला
ग्राम सभा गोपालपुर की लगभग 200 मीटर लंबी सीसी रोड का जिक्र करते हुए ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क की मरम्मत के लिए सरकार ने लाखों रुपये का बजट मंजूर किया था। इस रकम का इस्तेमाल सड़क की सुधार के लिए होना था, ताकि आवागमन में सुविधा हो सके और सड़क टूट-फूट से बच सके। लेकिन अब पाँच महीने बीतने के बाद भी न तो सड़क का कार्य प्रारंभ हुआ है और न ही कोई ठोस कार्रवाई देखने को मिली है। इस स्थिति ने ग्रामीणों को परेशान कर दिया है, जो रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाली कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
आरोप और आरोपित
ग्राम सभा में मौजूद ग्रामीणों का आरोप है कि इस परियोजना में ग्राम प्रधान लालचंद मौर्य और सचिव की मिलीभगत से भारी पैसों की बंदरबांट की गई है। उनका आरोप है कि सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई भी कार्य नहीं हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान और सचिव ने मिलकर इस परियोजना के नाम पर करोड़ों रुपये का बंदरबांट किया है, और उनके स्वार्थ के चलते सड़क मरम्मत का काम अधूरा पड़ा है। इससे न केवल सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि जनता को भी इस भ्रष्टाचार का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
ग्राम सभा की चौपाल में हुई चेतावनी
कुछ दिन पूर्व ही ग्राम सभा में एक चौपाल का आयोजन हुआ, जिसमें ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच बैठक हुई। इस बैठक में बीडीओ (ब्लॉक विकास अधिकारी) ने गंभीरता से इस मामले को लिया और निर्देश दिया कि तीन दिनों के भीतर ही सड़क मरम्मत का कार्य शुरू किया जाए। बीडीओ ने यह भी कहा कि यदि कार्य शुरू नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अभी तक उस निर्देश का कोई प्रभाव देखने को नहीं मिला है, और स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की इस स्थिति से उनके जीवन स्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। आवागमन में कठिनाई, दुर्घटना का खतरा और सड़क की खराब हालत ने उनकी जिंदगी को और कठिन बना दिया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जल्द से जल्द कार्रवाई करने और भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सरकार का पैसा जनता के हित में खर्च होना चाहिए, न कि भ्रष्टाचार के माध्यम से लूट का जरिया बनना चाहिए।
जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की अपेक्षा
इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से कड़ी जांच और कार्रवाई की अपेक्षा की है। उन्होंने कहा है कि यदि जल्द ही इस भ्रष्टाचार का खुलासा नहीं हुआ और सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने पर मजबूर हो सकते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो और सरकारी धन का सदुपयोग सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, सड़क की स्थिति सुधारने के लिए त्वरित कार्यवाही की जाए ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
सरकार और स्थानीय प्रशासन की भूमिका
मिर्जापुर जिले के प्रशासनिक अधिकारी भी इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही, सड़क मरम्मत के कार्य को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया है। यह भी कहा गया है कि सरकार की योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है, और इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।





















