खाटूश्यामजी नगरपालिका चुनाव की नई तारीख की घोषणा हो चुकी है। राजस्थान निर्वाचन आयोग ने ताजा आदेश जारी कर कहा है कि खाटूश्यामजी नगरपालिका में अध्यक्ष पद का चुनाव अब 25 सितंबर को आयोजित किया जाएगा।
मतदान के तुरंत बाद मतगणना और परिणामों की घोषणा कर दी जाएगी। वहीं, उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव 26 सितंबर को कराया जाएगा, जिसमें नामांकन, समीक्षा, नाम वापसी और आवश्यकतानुसार मतदान व परिणाम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस नए कार्यक्रम का उद्देश्य पारदर्शिता और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को सुनिश्चित करना है।
खाटूश्यामजी नगरपालिका चुनाव प्रक्रिया
राजस्थान की चुनाव व्यवस्था के अनुसार, खाटूश्यामजी नगरपालिका का चुनाव अब दो चरणों में संपन्न होगा। सबसे पहले, 25 सितंबर को अध्यक्ष पद के लिए मतदान होगा। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद मतगणना शुरू कर दी जाएगी, जिससे परिणाम भी उसी दिन घोषित किए जाएंगे।
इससे पहले, 21 सितंबर को चुनाव की शुरुआत हुई थी, लेकिन कांग्रेस पार्टी के पार्षद के मतदाता केंद्र न पहुंचने के कारण चुनाव को रोक दिया गया था। आयोग ने इस स्थिति में चुनाव को ‘आगामी आदेश तक’ स्थगित कर दिया था, ताकि चुनाव प्रक्रिया को पूरी निष्पक्षता के साथ पूरा किया जा सके।
वहीं, उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव 26 सितंबर को होगा। इस दिन नामांकन, उसकी समीक्षा, नाम वापसी और यदि आवश्यक हो तो मतदान और परिणाम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत पूरी की जाएगी, ताकि निर्वाचन प्रक्रिया में कोई भी बाधा ना आए।
चुनाव के दौरान हुई प्रमुख घटनाएं और विवाद
खाटूश्यामजी नगरपालिका चुनाव के दौरान एक प्रमुख विवाद तब सामने आया जब वार्ड 10 की कांग्रेस पार्षद लक्ष्मी देवी मतदान स्थल पर नहीं पहुंच पाई। इसके चलते मतदान प्रक्रिया रुकी रही। पार्षद के न पहुंचने के कारण रिटर्निंग ऑफिसर ने मतपेटियों को सील कर दिया और चुनाव को स्थगित कर दिया।
बाद में, पुलिस ने लक्ष्मी देवी को दस्तयाब कर न्यायालय में पेश किया। पुलिस ने पार्षद को न्यायालय में पेश करने के बाद कानूनी कार्रवाई की और उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया। लेकिन, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पार्षद के मतदान केंद्र पर न पहुंचने का ठोस कारण क्या था।
पुलिस ने पार्षद का किया पता
पुलिस ने लक्ष्मी देवी को दस्तयाब कर न्यायालय में पेश किया और फिर कानूनी कार्रवाई कर उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया। इस घटना ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया और निर्वाचन आयोग को नई तारीख का ऐलान करने पर मजबूर किया। पार्षद के न पहुंचने के कारण मतदान रोकना पड़ा और चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए नई तारीख तय करनी पड़ी।

























