कांवड़ मेला 2026: आस्था का अनोखा सैलाब, 4.80 करोड़ शिवभक्त उठाए कांवड़ हरिद्वार

वर्ष 2026 का कांवड़ मेला आस्था, चुनौती और प्रबंधन का एक अनूठा मिश्रण रहा। एक ओर जहां भोलेनाथ के भक्तों ने 40 साल का इतिहास रचा, वहीं प्रशासन और नगर निगम ने इस महापर्व को सुचारु और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने में अपनी एक अलग ही क्षमता साबित की।

40 साल बाद टूटा रिकॉर्ड, 4.80 करोड़ लिए गंगा जल

HIGHLIGHTS

  • 4.80 करोड़ कांवड़ियों ने तोड़ा 40 साल का यह रिकॉर्ड
  • भोले की चाकरी, 4.80 करोड़ शिवभक्तों ने लिया गंगा जल
  • महज 13 दिन में 4.80 करोड़ लोगों ने उठाई कांवड़
  • रिकॉर्ड भीड़ के बीच पुलिस ने कैसे संभाला कांवड़ मेला?

Kanwar Mela 2026: सावन मास की पवित्र धारा में इस बार आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा, जिसने कई दशकों पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित हर की पैड़ी और अन्य गंगा घाटों पर इस वर्ष कांवड़ मेले के दौरान अब तक देखे गए सबसे बड़े जनसमुद्र के साक्षी बने। महज 13 दिनों के इस पवित्र यात्रा काल में 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार शिवभक्तों ने गंगा जल भरकर अपने-अपने गंतव्यों की ओर प्रस्थान किया।

यह आंकड़ा इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि पिछले चार दशकों (40 सालों) के लंबे इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब इतनी भारी संख्या में कांवड़िये एक ही मेले में हरिद्वार पहुंचे हैं। श्रद्धालुओं की इस अभूतपूर्व भीड़ ने राज्य सरकार, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के सामने बेहद कठिन चुनौतियां भी पेश कीं, जिसे बखूबी संभाला गया।

पिछले साल की तुलना में 28 लाख का भारी इजाफा

अगर हम ताजा आंकड़ों पर नजर डालें, तो वर्ष 2025 में लगभग 4 करोड़ 52 लाख शिवभक्त हरिद्वार से कांवड़ लेकर गए थे। इस लिहाज से इस साल के आंकड़ों में सीधा-सीधा करीब 28 लाख से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह वृद्धि साफ तौर पर इंगित करती है कि हर वर्ष भगवान भोलेनाथ की भक्ति में लोगों का जुड़ाव और गहरा होता जा रहा है। देशभर से आए हुए इन शिवभक्तों ने मंगलवार को अपने-अपने गांवों और शहरों में स्थित शिवालयों में जलाभिषेक कर इस पवित्र यात्रा को सफल बनाया।

कांवड़ यात्रा का सफर: 1986 से 2026 तक का संपूर्ण डेटा

पिछले कई दशकों से कांवड़ यात्रा का आकार लगातार बदलता रहा है। प्रशासन की ओर से जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों पर गौर करें, तो यह यात्रा किस तेजी से बढ़ी है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है:

  • 1986: महज 4 लाख श्रद्धालु
  • 1990: 10 लाख का आंकड़ा पार
  • 1995: संख्या बढ़कर 50 लाख हुई
  • 2000: पहली बार एक करोड़ का आंकड़ा छुआ
  • 2018: रिकॉर्ड 3.76 करोड़ कांवड़िये पहुंचे
  • 2019: लगभग 3.50 करोड़ शिवभक्त आए
  • 2020: कोरोना महामारी के चलते मेला पूरी तरह स्थगित
  • 2022: 3.80 करोड़ श्रद्धालुओं ने भाग लिया
  • 2023: आंकड़ा 4 करोड़ के करीब पहुंचा
  • 2024: 4.14 करोड़ शिवभक्तों ने गंगा जल लिया
  • 2025: 4.52 करोड़ नए रिकॉर्ड के साथ यात्रा संपन्न हुई
  • 2026: 4.80 करोड़ 40 हजार के साथ अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बना

भीड़ प्रबंधन ने बढ़ाई पुलिस की धड़कनें

हाईवे और शहरी सड़कों पर कांवड़ियों के उमड़ने से पुलिस और जिला प्रशासन के लिए स्थिति नियंत्रण में रखना मुश्किल हो गया था। लाखों लोगों के पैदल यात्रा करने और वाहनों के भारी दबाव के कारण ट्रैफिक मैनेजमेंट सबसे बड़ी परीक्षा साबित हुआ।

हालांकि, इस विशाल जनसमूह के बावजूद पुलिस बल ने पूरी तत्परता से अपनी ड्यूटी निभाई। एसएसपी (SSP) नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि पूरे 13 दिनों तक पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें मैदान में डटी रहीं। उन्होंने कांवड़ियों की सुरक्षा, भीड़ को शांतिपूर्ण तरीके से निकालने और यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए थे, जिसके चलते यह मेला बेहद सफल रहा।

सफाई अभियान: 7000 मीट्रिक टन कचरे की बड़ी चुनौती

जहां एक ओर आस्था का यह उत्सव देखने लायक था, वहीं दूसरी ओर इतनी अधिक भीड़ के कारण स्वच्छता पर भी भारी दबाव पड़ा। मेले के दौरान विभिन्न गंगा घाटों, कांवड़ पटरियों और शहरी क्षेत्रों में कुल 7000 मीट्रिक टन कचरे का ढेर लग गया।

नगर निगम की टीमों ने यात्रा की शुरुआत (30 जुलाई से 8 अगस्त तक) से ही लगातार सफाई अभियान चलाया और इस दौरान 5500 मीट्रिक टन से अधिक कचरा साफ किया गया। लेकिन, यात्रा के अंतिम दो दिनों में भीड़ इतनी अधिक बढ़ गई कि वाहनों के दबाव के चलते नगर निगम के कचरा उठाने वाले वाहन मेला क्षेत्र तक नहीं पहुंच पाए।

जैसे ही सोमवार की देर रात भीड़ का दबाव कम हुआ, नगर आयुक्त नंदन कुमार के निर्देश पर सफाई अभियान में तेजी ला दी गई। टीमों ने जमा हुए लगभग 1500 मीट्रिक टन अतिरिक्त कचरे को हर की पैड़ी और आसपास के इलाकों से निकाला। फिलहाल नगर निगम की टीमें पूरी ताकत के साथ मेला क्षेत्र को पूरी तरह साफ-सुथरा करने में जुटी हुई हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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