समझौते की कगार पर थे ईरान-अमेरिका, फिर अचानक छिड़ा युद्ध

ओमान के विदेश मंत्री बद्र और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी (फाइल फोटो)

ईरान और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक परमाणु समझौता होने को था, लेकिन आधिकारिक घोषणा से सिर्फ कुछ घंटे पहले इजराइल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य हमले ने मध्य पूर्व की शांति को तहस-नहस कर दिया। ओमान की मध्यस्थता में जिस समझौते पर लगभग मोहर लग चुकी थी, वह युद्ध की आग में जलकर रह गया।

समझौते से युद्ध तक का सफर

ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने संघर्ष शुरू होने से लगभग सात घंटे पहले एक सकारात्मक संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच डील “लगभग तय” है। उनके अनुसार, ईरान परमाणु हथियार बनाने लायक सामग्री जमा न करने, न तो परमाणु बम बनाने और पूर्ण अंतरराष्ट्रीय निगरानी को लेकर राजी हो चुका था। एक स्थायी शांति समझौते की राह साफ दिख रही थी।

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लेकिन तस्वीर अचानक बदल गई। इजराइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू कर दिया। इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की कि अमेरिका ने भी ईरान में एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है। ट्रंप ने कहा, “यह कदम अमेरिकी लोगों की सुरक्षा और ईरानी शासन से पैदा खतरे को खत्म करने के लिए उठाया गया है।” इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे अमेरिका-इजराइल का ‘जॉइंट ऑपरेशन’ बताया, जिसका उद्देश्य ईरान से पैदा होने वाले अस्तित्व के खतरे को समाप्त करना है।

ओमान की निराशा और चेतावनी

जिस ओमान ने दोनों देशों के बीच सेतु का काम किया था, हमलों के बाद उसकी मेहनत चापलूस निकली। जिनेवा में गुरुवार को ही वार्ता का एक नया दौर समाप्त हुआ था। हालात बिगड़ने के बाद ओमान के विदेश मंत्री ने गहरी निराशा जताई। उन्होंने कहा, “मैं बेहद दुखी हूं। गंभीर और सक्रिय वार्ताओं को एक बार फिर कमजोर कर दिया गया है। इससे न अमेरिका के हित पूरे होंगे और न ही वैश्विक शांति को फायदा होगा।” उन्होंने अमेरिका से अपील की, “वह इस जंग में और न फंसे। यह आपकी लड़ाई नहीं है।” ओमान ने चेतावनी दी कि यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है।

रूस का बड़ा आरोप- ‘इजराइल ने किया धोखा’

इस बीच रूस ने इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने दावा किया कि इजराइल ने मास्को को गलत संकेत दिए और ईरान के साथ सैन्य टकराव में कोई दिलचस्पी न होने के बारे में झूठ बोला। लावरोव ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के साथ फोन पर बातचीत के दौरान इस हमले को “बिना उकसावे का सशस्त्र हमला” बताया।
रूस ने कहा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में शांति समाधान तलाशने और तत्काल हमले रोकने की मांग की है। जवाब में, ईरान ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की योजना बनाई है। जानकारी के मुताबिक, इससे पहले पिछले साल जून में 12 दिन की जंग के दौरान भी अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, जिससे क्षेत्र में तनाव पहले से चरम पर है।

Sandhya Samay News

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