वाराणसी से बड़ा उभार, हंसराज विश्वकर्मा बने चर्चा का केंद्र

Varanasi News: वाराणसी में भाजपा के पास कार्यकर्ताओं की एक विशाल फौज है। 2014 के बाद जुड़े ऊर्जावान युवाओं से लेकर वरिष्ठ कार्यकर्ताओं तक ने विपक्ष को वाराणसी में एक सीट जीतने तक के लिए तरसा रखा है।

हंसराज की एंट्री से बदलते राजनीतिक संकेत

HIGHLIGHTS

  • योगी कैबिनेट विस्तार, 6 नए मंत्रियों ने ली शपथ
  • पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र को मिली नई राजनीतिक ताकत
  • 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की बड़ी चाल
  • काशी से चौथे मंत्री के रूप में हंसराज की एंट्री
  • वाराणसी का बढ़ता राजनीतिक दबदबा योगी सरकार में

UP News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में 6 नए नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, जिसमें सबसे चर्चित नाम वाराणसी का रहा है और पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र के जिलाध्यक्ष और एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा को कैबिनेट में जगह मिलना सिर्फ एक विस्तार नहीं, बल्कि आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा की एक बड़ी रणनीतिक चाल मानी जा रही है।

सोशल मीडिया से लेकर काशी की गलियों तक हंसराज के मंत्री बनने की चर्चाएं तेज हैं। आइए समझते हैं कि वाराणसी जैसे भाजपा के मजबूत गढ़ में एक ही नेते पर इतनी ‘मेहरबानी’ क्यों और 2027 के लिए यह कदम कितना अहम है।

2027 के लिए बड़ी जिम्मेदारी और जातीय समीकरण

वाराणसी में भाजपा के पास कार्यकर्ताओं की एक विशाल फौज है। 2014 के बाद जुड़े ऊर्जावान युवाओं से लेकर वरिष्ठ कार्यकर्ताओं तक ने विपक्ष को वाराणसी में एक सीट जीतने तक के लिए तरसा रखा है। ऐसे में संगठन से लेकर मंत्रिमंडल तक पहुंच की होड़ स्वाभाविक है।

ऐसे में हंसराज विश्वकर्मा के पास जिलाध्यक्ष, एमएलसी और अब मंत्री पद का तिहरा दायित्व है। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे सिर्फ उनकी काबलियत का नतीजा नहीं, बल्कि जातीय समीकरणों और 2027 के चुनाव की तैयारी का हिस्सा मान रहे हैं। हंसराज के मंत्री बनने से भाजपा ने पूर्वांचल के एक बड़े वर्ग को सीधे संदेश दिया है।

कार्यकर्ताओं के चहेते, पीएम मोदी के भी प्रिय

हंसराज विश्वकर्मा अपनी मिलनसारिता और आम कार्यकर्ताओं से सीधा जुड़ाव रखने के लिए जाने जाते हैं। बीते विधानसभा चुनावों में वाराणसी में भाजपा की शानदार जीत का श्रेय बड़े पैमाने पर उनकी संगठनात्मक क्षमता को दिया जाता है।

उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका काशी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीब होना है। पीएम मोदी के काशी प्रवास के दौरान हंसराज की भूमिका हमेशा अहम रहती है, जो उनकी पार्टी में स्वीकार्यता को दर्शाता है। अप्रैल 2023 से एमएलसी रहे हंसराज लगातार तीसरी बार वाराणसी के जिलाध्यक्ष के पद पर भी काबिज हैं।

वाराणसी का बढ़ा दबदबा- कैबिनेट में चौथा मंत्री

हंसराज विश्वकर्मा के मंत्री बनने से वाराणसी जनपद का सरकार में दबदबा और बढ़ गया है। मौजूदा मंत्रियों अनिल राजभर, रविंद्र जायसवाल और दयाशंकर मिश्र दयालु के बाद वह वाराणसी से चौथे मंत्री के रूप में योगी सरकार में अपना दायित्व निभाएंगे।

कुल मिलाकर, 2027 के लिए भाजपा ने अपने सबसे मजबूत गढ़ काशी के कमांडर को सत्ता की कुर्सी पर बैठाकर एक स्पष्ट संदेश दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हंसराज के इस उभार से पूर्वांचल और वाराणसी का राजनीतिक समीकरण 2027 तक किस तरह ढरता है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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