फेफड़ों की सेहत की बात आते ही अक्सर बाहर के वायु प्रदूषण और धूम्रपान का ख्याल आता है। लेकिन घर के भीतर की हवा भी सांस की सेहत पर असर डाल सकती है। खाना पकाने का धुआं, अगरबत्ती, सफाई के उत्पाद, धूल और खराब वेंटिलेशन जैसी रोज़मर्रा की चीजें घर के अंदर प्रदूषक बढ़ा सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, खराब हवा सांस से जुड़ी सेहत और फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है।
इसका मतलब यह नहीं कि हर घर में ये चीजें बीमारी का कारण बनेंगी। हालांकि, बंद कमरे में धुआं या रसायन जमा हों और लंबे समय तक संपर्क बना रहे, तो संवेदनशील लोगों—जैसे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी वाले लोगों—को परेशानी हो सकती है। जानिए घर के अंदर के वायु प्रदूषण के छह आम स्रोत और उनसे बचाव के आसान तरीके।
1. अगरबत्ती और धूप का धुआं
पूजा-पाठ के दौरान अगरबत्ती या धूप जलाना कई घरों की नियमित आदत है। किसी भी चीज़ के जलने पर धुआं और हवा में फैलने वाले छोटे कण पैदा हो सकते हैं। बंद कमरे या कम वेंटिलेशन वाली जगह में ये कण ज्यादा देर तक बने रह सकते हैं।
क्या करें: अगरबत्ती या धूप का इस्तेमाल सीमित रखें। जलाते समय खिड़की खोलें या हवा आने-जाने की व्यवस्था करें। धुआं सीधे सांस में लेने से बचें और बच्चों या सांस की समस्या वाले लोगों को धुएं से दूर रखें।
2. खाना पकाते समय उठने वाला धुआं
खाना पकाने के दौरान, खासकर तलने या तेज आंच पर पकाने से, धुआं और सूक्ष्म कण हवा में फैल सकते हैं। गैस पर खाना बनाते समय भी प्रदूषक निकल सकते हैं। रसोई में हवा का निकास ठीक न हो, तो ये प्रदूषक घर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकते हैं।
क्या करें: खाना बनाते समय एग्जॉस्ट फैन या चिमनी चलाएं। संभव हो तो खिड़की खोलें और खाना पकाने के बाद भी कुछ देर हवा का आवागमन बनाए रखें। चिमनी और फिल्टर की नियमित सफाई करना भी उपयोगी है।
3. सफाई के केमिकल और स्प्रे
फर्श, बाथरूम और किचन साफ करने वाले कुछ उत्पादों में ऐसे रसायन हो सकते हैं जो हवा में फैलते हैं। EPA के अनुसार, कुछ घरेलू उत्पादों से निकलने वाले रसायन आंख, नाक और गले में जलन या सांस से जुड़ी परेशानी पैदा कर सकते हैं। एयर फ्रेशनर और स्प्रे का अधिक इस्तेमाल भी घर की हवा में अतिरिक्त पदार्थ छोड़ सकता है।
क्या करें: उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करें और सफाई करते समय खिड़की-दरवाजे खोलें। जरूरत से ज्यादा उत्पाद इस्तेमाल न करें। अलग-अलग क्लीनिंग प्रोडक्ट्स को कभी न मिलाएं—कुछ मिश्रण जहरीली गैस बना सकते हैं। स्प्रे की जगह, जहां संभव हो, कम धुआं या कम गंध वाले विकल्प चुनें।
4. घर की धूल और एलर्जेन
फर्नीचर, पर्दों, कारपेट, गद्दों और दूसरे कपड़ों में धूल जमा हो सकती है। धूल में मौजूद छोटे कण और एलर्जेन सफाई के दौरान हवा में उड़ सकते हैं। कुछ लोगों में इससे छींक, नाक में जलन या सांस की परेशानी बढ़ सकती है।
क्या करें: नियमित रूप से सतहों की धूल साफ करें। धूल को हवा में उड़ाने के बजाय नम कपड़े से पोंछें और फर्श को गीले पोछे से साफ करें। कारपेट और कपड़ों की समय-समय पर सफाई करें। सफाई के दौरान संवेदनशील व्यक्ति कमरे से बाहर रह सकते हैं।
5. खराब वेंटिलेशन और नमी
घर साफ रखना जरूरी है, लेकिन हवा का आना-जाना भी उतना ही अहम है। बंद कमरे में खाना पकाने, सफाई करने या धुआं पैदा करने वाली चीजों के इस्तेमाल से प्रदूषक जमा हो सकते हैं। पानी का रिसाव या लगातार नमी रहने से मोल्ड (फफूंद) बढ़ सकता है, जो कुछ लोगों में एलर्जी या सांस की तकलीफ से जुड़ा हो सकता है।
क्या करें: मौसम और बाहरी हवा की स्थिति अनुकूल हो तो खिड़कियां खोलकर हवा आने-जाने दें। बाथरूम और रसोई में एग्जॉस्ट का इस्तेमाल करें। रिसाव और नमी की समस्या को जल्द ठीक कराएं। एयर फिल्टर या एयर क्लीनर इस्तेमाल करते हैं, तो निर्माता के निर्देशों के अनुसार उसका रखरखाव करें।
6. घर के अंदर धूम्रपान
घर या बंद कमरे में सिगरेट और तंबाकू का धुआं केवल धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को ही नहीं, आसपास के लोगों को भी प्रभावित कर सकता है। दूसरे व्यक्ति के धुएं के संपर्क को सेकेंड हैंड स्मोक कहा जाता है। घर के अंदर धूम्रपान से धुआं और उसके कण कमरे की हवा में फैलते हैं।
क्या करें: घर और कार को धूम्रपान-मुक्त रखें। केवल खिड़की खोलना या दूसरे कमरे में धूम्रपान करना पर्याप्त बचाव नहीं है, क्योंकि धुआं घर के भीतर फैल सकता है। तंबाकू छोड़ने में मदद के लिए डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
घर के अंदर की हवा बेहतर रखने के लिए क्या करें?
घर के अंदर का वायु प्रदूषण कम करने के लिए धुएं और तेज गंध वाले उत्पादों का इस्तेमाल सीमित करें, खाना बनाते और सफाई करते समय वेंटिलेशन रखें और धूल नियमित रूप से साफ करें। नमी या पानी के रिसाव को नजरअंदाज न करें। घर में बच्चों, बुजुर्गों या अस्थमा जैसी सांस की समस्या वाले लोग हों, तो धुएं के स्रोतों को कम करना खास तौर पर उपयोगी हो सकता है।
लगातार खांसी, सांस फूलना, सीने में जकड़न या सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज को केवल घर की हवा का असर मानकर न टालें। ऐसे लक्षण बने रहें या बढ़ें, तो डॉक्टर से सलाह लें। यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है; यह चिकित्सकीय जांच या इलाज का विकल्प नहीं है।

























