‘जेल भरो’ की चेतावनी, बांसडीह तहसील पर गोंड छात्रों का सत्याग्रह

प्रमुख सचिव के आदेशों की अवमानना का आरोप

UP News: प्रमुख सचिव समाज कल्याण के स्पष्ट शासनादेशों की धज्जियां उड़ाकर गोंड अनुसूचित जनजाति के प्रमाण-पत्र निर्गत करने में बाधा डालने के विरोध में ऑल गोंडवाना स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आगसा) के बैनर तले 4 अप्रैल को भी बांसडीह तहसील परिसर में कार्यालय अवधि का अनिश्चितकालीन सत्याग्रह धरना जारी रहा।

आक्रोशित गोंड छात्रों और नौजवानों ने तहसीलदार नितिन कुमार सिंह पर भारत के राष्ट्रपतीय राजपत्र, संविधान और शासनादेश की घोर अवमानना कर जनजाति के भविष्य से खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया।

यह है पूरा मामला और शासनादेश

उल्लेखनीय है कि प्रमुख सचिव, उ0प्र0 शासन, समाज कल्याण अनुभाग-3 लखनऊ द्वारा दिनांक 3 नवम्बर 2021 को शासनादेश संख्या-129/2021/3206/26-3-2021 जारी किया गया था। इस शासनादेश में स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि यदि आवेदनकर्ता के प्रमाणित भू-राजस्व अभिलेखों (1323, 1324, 1356, 1359 फसली) में से किसी एक में ‘गोंड’ अंकित है।

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अभिलेखागार के मूल रिकॉर्ड से इसकी पुष्टि हो जाती है, तो बिना किसी हिला-हवाली के तत्काल गोंड अनुसूचित जनजाति का प्रमाण-पत्र जारी कर दिया जाए। साथ ही, यदि आवेदनकर्ता भूमिहीन है, तो परिवार रजिस्टर की नकल, शैक्षणिक संस्थानों की टी.सी. और नजदीकी गोंड परिवारों से पूछताछ (जॉच-पड़ताल) के आधार पर भी प्रमाण-पत्र देने के निर्देश दिए गए थे।

तहसीलदार पर लगा उत्पीड़न का आरोप

धरना स्थल पर छात्रों ने बताया कि आजादी से पूर्व के जन्म-मृत्यु रजिस्टर (फौती) और भू-राजस्व अभिलेखों (1345, 1356, 1359 फसली) में स्पष्ट रूप से ‘गोंड’ लिखा होने के बावजूद तहसील और कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में सुरक्षित इन दस्तावेजों की तहसीलदार द्वारा अनदेखी की जा रही है। ऑनलाइन आवेदन करने पर तहसीलदार द्वारा बार-बार आवेदनों को अस्वीकृत/निरस्त किया जा रहा है।

छात्रों ने बताया कि जाति प्रमाण-पत्र के अभाव में उन्हें अगली कक्षा में प्रवेश लेने, छात्रवृत्ति का लाभ उठाने और सरकारी नौकरियों के फार्म भरने से वंचित होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि तहसीलदार की इस कार्यशैली से गोंड जनजाति के छात्र-नौजवानों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है और उन्हें जानबूझकर उत्पीड़ित किया जा रहा है।

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‘जेल भरो आंदोलन’ की चेतावनी

आगसा के बांसडीह तहसील इकाई के संयोजक बिट्टू कुमार गोंड ने चेतावनी देते हुए कहा, “यदि तहसील प्रशासन तत्काल गोंड अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र जारी करना प्रारंभ नहीं करता है, तो आंदोलन के अगले चरण में हम ‘जेल भरो आंदोलन’ करेंगे। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी बांसडीह तहसील प्रशासन की होगी।” उन्होंने साफ कहा कि जब तक सभी आवेदनकर्ताओं को प्रमाण-पत्र नहीं मिल जाता, यह सत्याग्रह धरना जारी रहेगा।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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