आसमान में उड़ता विमान अक्सर रफ्तार, तकनीक और आधुनिकता का प्रतीक लगता है। लेकिन हर विमान का उड़ान भरने का दौर हमेशा नहीं चलता। समय के साथ उसकी मरम्मत महंगी हो सकती है, तकनीक पुरानी पड़ सकती है या सुरक्षा कारणों से उसे सेवा से हटाना पड़ सकता है। ऐसे में विमान को हमेशा सीधे कबाड़ में नहीं भेजा जाता। कई विमानों को सुरक्षित रखने के लिए खास भंडारण केंद्रों में ले जाया जाता है।
अमेरिका के एरिजोना में डेविस-मोंथन एयर फोर्स बेस के पास ऐसा ही एक विशाल केंद्र है, जिसे आम तौर पर ‘द बोनयार्ड’ कहा जाता है। यहां हजारों सैन्य विमान और एयरोस्पेस से जुड़े उपकरण रखे जाते हैं। दूर से देखने पर विमानों की कतारें किसी विशाल विमान कब्रिस्तान जैसी लग सकती हैं, लेकिन यह जगह केवल पुराने विमानों का ढेर नहीं है। यहां विमान सुरक्षित रखने, उनकी निगरानी करने और उपयोगी पुर्जों को दोबारा काम में लाने की व्यवस्था मौजूद है।
एरिजोना का ‘बोनयार्ड’ इतना खास क्यों है?
इस केंद्र का आधिकारिक नाम 309th Aerospace Maintenance and Regeneration Group (AMARG) है। यह अमेरिकी वायुसेना की देखरेख में काम करता है। अलग-अलग रिपोर्टों में यहां विमानों की संख्या में बदलाव बताया जाता है; यहां करीब 4,000 विमान होने का आंकड़ा भी अक्सर चर्चा में आता है। हर विमान की स्थिति और उपयोग की संभावना अलग होती है—कुछ लंबे समय तक स्टोरेज में रखे जाते हैं, जबकि कुछ के पुर्जे निकालकर दूसरे विमानों के काम में लाए जाते हैं।
इसलिए ‘विमान कब्रिस्तान’ नाम सुनकर यह मान लेना ठीक नहीं कि यहां मौजूद हर विमान बेकार हो चुका है। कुछ विमान भविष्य में फिर इस्तेमाल किए जा सकते हैं, कुछ प्रशिक्षण या दूसरे कामों के लिए रखे जाते हैं और कई विमानों के उपयोगी हिस्से निकाल लिए जाते हैं। अंतिम उपयोग विमान की हालत, जरूरत और संबंधित नियमों पर निर्भर करता है।
पुराने विमानों को यहां क्यों रखा जाता है?
एक विमान में इंजन, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, नियंत्रण उपकरण और कई महंगे पुर्जे होते हैं। विमान सेवा से हट जाए, तब भी इनमें से कुछ हिस्से काम के हो सकते हैं। उन्हें सुरक्षित रखकर दूसरे विमानों की मरम्मत या रखरखाव में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे नए पुर्जे बनाने या खरीदने की जरूरत कम हो सकती है।
विमान को स्टोरेज में रखने से पहले उसकी तैयारी भी की जाती है। मौसम और धूल से बचाने के लिए संवेदनशील हिस्सों को ढका जा सकता है और विमान को लंबे समय तक खड़ा रखने के लिए जरूरी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। इसका मकसद विमान को सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर उसकी स्थिति का आकलन करना होता है।
क्या विमानों की भी होती है एक्सपायरी डेट?
विमान की उम्र केवल इस बात से तय नहीं होती कि उसे बने कितने साल हो गए। उसकी उड़ान के घंटे, उड़ानों की संख्या, रखरखाव का इतिहास और ढांचे की स्थिति भी अहम होते हैं। विमान के अलग-अलग हिस्सों की नियमित जांच की जाती है। समय के साथ धातु में थकान, उपकरणों की खराबी या मरम्मत की बढ़ती लागत सेवा जारी रखना कठिन बना सकती है।
जब विमान सुरक्षा मानकों पर खरा न उतरे, उसकी मरम्मत बहुत महंगी हो जाए या उसे चलाना व्यावहारिक न रहे, तब उसे सेवा से हटाया जा सकता है। इसके बाद उसे संग्रहालय, प्रशिक्षण केंद्र, स्टोरेज सुविधा या पुर्जों के पुनः उपयोग के लिए भेजा जा सकता है। यानी हर विमान किसी तय उम्र पर अपने आप ‘एक्सपायर’ नहीं होता।

F-14 Tomcat से B-52 तक का इतिहास
‘बोनयार्ड’ में अमेरिकी सैन्य विमानन के इतिहास से जुड़े कई विमानों के नाम सामने आते रहे हैं। इनमें B-52 बमवर्षक और F-14 Tomcat जैसे चर्चित विमान शामिल हैं। F-14 को फिल्म Top Gun के कारण दुनिया भर में पहचान मिली। अमेरिकी नौसेना ने इसे 2006 में अपने बेड़े से हटा दिया था। सेवा से हटने के बाद ऐसे विमानों का आगे क्या होगा, यह उनकी हालत और उपयोगिता पर निर्भर करता है—कुछ संग्रहालयों तक पहुंचते हैं, जबकि कुछ स्टोरेज में रखे जा सकते हैं।
रेगिस्तानी मौसम क्यों है मददगार?
एरिजोना का गर्म और शुष्क मौसम विमानों के भंडारण के लिए अनुकूल माना जाता है। यहां नमी और बारिश अपेक्षाकृत कम होने से धातु के हिस्सों पर जंग लगने का खतरा कम हो सकता है। विशाल खुला क्षेत्र भी बड़ी संख्या में विमानों को व्यवस्थित रूप से रखने में मदद करता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब बड़ी संख्या में सैन्य विमान सेवा से बाहर हुए, तब ऐसे विमानों को रखने के लिए सुरक्षित और विस्तृत जगहों की जरूरत बढ़ी। एरिजोना का इलाका इस काम के लिए उपयोगी साबित हुआ।
क्या आम लोग विमान कब्रिस्तान देख सकते हैं?
यह कोई सामान्य पर्यटन स्थल नहीं है। सुरक्षा कारणों से AMARG के भीतर प्रवेश नियंत्रित है और आम लोग अपनी मर्जी से विमानों के बीच घूम नहीं सकते। इस केंद्र की गतिविधियों और विमानों की देखभाल के पीछे प्रशिक्षित कर्मचारी काम करते हैं। बाहर से देखने या तस्वीरों के जरिए ही अधिकतर लोगों को इस विशाल संग्रह का अंदाजा मिलता है।
‘बोनयार्ड’ की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां खड़ा हर विमान एक जैसी कहानी नहीं बताता। किसी विमान का सफर यहीं समाप्त हो सकता है, किसी के पुर्जे दूसरे विमान को सेवा में बनाए रखने में मदद कर सकते हैं और कोई लंबे समय तक सुरक्षित रखे जाने के बाद फिर उपयोग में आ सकता है। इसलिए यह जगह केवल विमानों का कब्रिस्तान नहीं, बल्कि विमानन इतिहास और संसाधनों के पुनः उपयोग का एक अनोखा केंद्र भी है।
























