Changes in digital payments: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अपनी प्रमुख डिजिटल पेमेंट प्रणाली, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), पर नए बदलाव लाने का कदम उठाया है। यह कदम विशेष रूप से व्यापारियों से शुल्क वसूलने के उद्देश्य से है, जिससे डिजिटल भुगतान को और अधिक स्थिर और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हाल ही में, संसद में भुगताना कानूनों में प्रस्तावित संशोधन पेश किए गए हैं, जिनसे यह संभावना और भी स्पष्ट हो गई है कि अब व्यापारियों से इस प्रणाली पर ट्रांजैक्शन शुल्क लिया जाएगा। हालांकि यह शुल्क ग्राहकों पर लागू नहीं होगा, फिर भी इसका प्रभाव डिजिटल भुगतान के व्यापक प्रयोग और उसकी लागत पर पड़ सकता है।
प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य और विकल्प
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इस दिशा में दो मुख्य विकल्पों पर विचार कर रही है। पहला विकल्प यह है कि एक निश्चित सीमा से ऊपर होने वाले लेनदेन पर Merchant Discount Rate (MDR) लगाया जाए। दूसरे विकल्प में यह है कि व्यापारी के वार्षिक कारोबार के आधार पर शुल्क तय किया जाए। सूत्रों के मुताबिक, एक प्रस्ताव के तहत उन व्यापारियों से ही शुल्क लिया जाएगा जिनका सालाना कारोबार 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है। इन व्यापारियों के 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 0.3% से 0.5% की दर से MDR लगाई जा सकती है।
किन व्यापारियों पर लगेगा शुल्क?
यह भी जानकारी मिली है कि सरकार का यह कदम केवल बड़े व्यापारियों पर ही लागू होगा, जबकि छोटे व्यवसाय और उपभोक्ता इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छोटे व्यापारियों और ग्राहकों को कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। इस योजना के तहत, यदि कोई व्यापारी 1.5 करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक कारोबार करता है और उसकी किसी ट्रांजैक्शन की राशि 2,000 रुपये से अधिक है, तो उसे इस पर शुल्क देना होगा। यह कदम डिजिटल भुगतान के लागत को नियंत्रित करने और भुगतान सेवा प्रदाताओं को निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अनुमानित शुल्क कितना हो सकता है?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यदि यह योजना लागू होती है तो सालाना 1.5 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाले व्यापारियों को 2,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर 0.3% से 0.5% का MDR देना पड़ सकता है। जफरीज रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी ट्रांजैक्शनों की संख्या कुल लेनदेन का केवल 4% है, लेकिन इन ट्रांजैक्शनों का मूल्य लगभग 67% है। इसका मतलब है कि अधिकांश लेनदेन छोटे हैं, लेकिन बड़े लेनदेन सिस्टम में अधिक मूल्यवान हैं। इससे स्पष्ट होता है कि यह बदलाव बड़े व्यापारियों के लिए अधिक प्रभावी हो सकता है।
क्यों हो रहा है यह बदलाव?
वित्त मंत्रालय ने इस विषय में विवादित प्रस्ताव को मंजूरी दी है ताकि डिजिटल भुगतान के दायरे में स्थिरता लाई जा सके। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिससे यह संशोधन कानूनी तौर पर संभव हो सके। उद्योग और नियामक सूत्रों का मानना है कि बिना शुल्क के UPI का विकास जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा है, क्योंकि पेमेंट कंपनियों को लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं मिल रहा है। इससे उनके निवेश की क्षमता सीमित हो जाती है और वे नए सेवाओं का विस्तार नहीं कर पाते हैं।
UPI का वर्तमान परिदृश्य
UPI भारत में सबसे बड़ा रियल-टाइम भुगतान नेटवर्क माना जाता है। जुलाई में, इस प्रणाली के जरिए 23.6 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल कीमत 29.9 लाख करोड़ रुपये थी। इस प्रणाली पर हावी कंपनियों में वॉलमार्ट की फोनपे और गूगल पे मुख्य हैं। यह प्रणाली तेज, सुरक्षित और आसान होने के कारण देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुकी है। लेकिन, अभी भी इस पर कोई शुल्क नहीं लगने के कारण भुगतान कंपनियों को लाभ कम होता है, और इससे उनके निवेश और विस्तार में बाधाएं आती हैं।
MDR का अर्थ है Merchant Discount Rate, यानी वह शुल्क जो व्यापारी बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता को डिजिटल ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने के लिए देना पड़ता है। क्रेडिट कार्ड पर आमतौर पर लगभग 1.5% MDR लगता है, जबकि डेबिट कार्ड पर यह लगभग 0.9% तक हो सकता है। लेकिन, UPI लेनदेन पर अभी तक कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। यदि सरकार इसे लागू करने का निर्णय लेती है, तो यह डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में नई दिशा तय करेगा।



























