अमेरिका में डीजल की कीमतें 5 डॉलर के पार, करीबी सलाहकार के इस्तीफे से सरकार में हलचल

आर्थिक मंदी और सहयोगियों के त्याग ने बढ़ाई मुश्किलें

संध्या समय न्यूज


US Iran War: पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जारी तनाव और युद्ध की स्थिति अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी सियासी और आर्थिक चुनौती बन गई है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही रोकने के बाद पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित किया है। इसके चलते अमेरिका में डीजल की कीमतें 5 डॉलर प्रति गैलन के पार पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। जानकारों के मुताबिक, इस स्थिति का सीधा असर आगामी चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

होर्मुज जलमार्ग की अहमियत

बता दें कि ईरान और ओमान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम केंद्र है। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया का लगभग 20-22% कच्चा तेल और 20-25% लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) इसी मार्ग से होकर गुजरता है। भले ही अमेरिका सीधे तौर पर यहां से बहुत अधिक तेल आयात न करता हो, लेकिन इस मार्ग में रुकावट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि होती है, जिसका असर अमेरिका पर भी पड़ता है।

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ट्रंप को नहीं थी ईरान की पलटवार की उम्मीद

डोनाल्ड ट्रंप अपने हाल के बयानों में स्वीकार कर चुके हैं कि उन्हें ईरान की ओर से इस तरह की पलटवार की उम्मीद नहीं थी। उनका यह बयान तब सवालों के घेरे में आ रहा है, जबकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने पहले ही ईरान की संभावित प्रतिक्रिया को लेकर चेतावनी दी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने पहले से मिसाइलें तैनात कर रखी थीं और हमले की स्थिति में कतार, सऊदी अरब, यूएई और बहरीन जैसे खाड़ी देशों को निशाना बनाने की तैयारी कर ली थी। ईरान के इन हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है।

नाटो सहयोगियों ने किया इनकार

इस संकट के बीच डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही सहयोगियों से निराशा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने ब्रिटेन, फ्रांस समेत नाटो सहयोगियों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने के लिए अपने युद्धपोतों और नौसैनिकों की तैनाती करने की अपील की, लेकिन ज्यादातर नाटो देशों ने युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दिया। सहयोगियों ने तनाव कम करने के लिए कूटनीति और बातचीत का रास्ता अख्तियार करने की सलाह दी है।

इस पर नाराज डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो को ‘एकतरफा व्यवस्था’ बताते हुए कहा कि अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा पर अरबों डॉलर खर्च करता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे साथ नहीं देते। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर भी निशाना साधा और कहा कि वह जल्द ही सत्ता से बाहर हो सकते हैं। हालांकि, ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत खत्म हो चुकी है और अमेरिका अकेले ही हालात संभाल सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत ईरान की क्षमता को लेकर अलग ही संकेत दे रही है।

करीबी सलाहकार जो केंट का इस्तीफा

प्रशासन के लिए एक और झटका तब लगा जब नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर और ट्रंप की कोर टीम के सदस्य जो केंट ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। केंट ने ईरान पर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि ट्रंप ने इजरायल के दबाव में आकर यह फैसला लिया था, जबकि ईरान से अमेरिका को कोई खतरा नहीं था। इस पर ट्रंप ने कहा कि उनका इस्तीफा होना ‘अच्छी बात’ है। ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका फिलहाल इस युद्ध से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।

Sandhya Samay News

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