Delhi News: त्योहारों और बदलते मौसम के साथ आसमान में उड़ती पतंगें अक्सर बच्चों की खुशियों का प्रतीक मानी जाती हैं, लेकिन जब यह खुशी जानलेवा साबित हो जाए, तो सिर्फ दुख ही दुख बचता है। पूर्वी दिल्ली से एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां मात्र 17 साल का एक मासूम बच्चा पतंग उड़ाने के शौक में अपनी जान से बाल-बाल बचा। घटना इतनी भयावह थी कि मांझे को खींचते ही लड़के का पूरा शरीर आग का गोला बन गया।
कैसे घटी दर्दनाक घटना?
यह पूरा मामला थाना गाजीपुर क्षेत्र के पुराना कुंडली इलाके का है। बताया जा रहा है कि किशोर अपने घर की छत पर खड़ा होकर पतंग उड़ा रहा था। तभी अचानक पतंग तेज हवा के चलते आसमान में लगी हाई-टेंशन इलेक्ट्रिक वायर की चपेट में आ गई। मकान मालिक और मौके पर मौजूद गवाहों के अनुसार, जैसे ही लड़के ने पतंग को निकालने के लिए मांझे को जोर से खींचा, तारों से टकराव के कारण तेज करंट का झटका उसके शरीर में दौड़ गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस भयानक वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे अचानक से चिंगारी निकलती है और लड़का आग की लपटों में घिर जाता है।
इलाज और वर्तमान स्थिति
हादसे के बाद आसपास के इलाके में अफरातफरी मच गई। लोगों ने तुरंत बच्चे को आग बुझाकर नजदीकी लाल बहादुर शास्त्री (LBS) अस्पताल में भर्ती कराया। वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत देखते हुए तुरंत प्राथमिक उपचार दिया और बेहतर इलाज के लिए उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया। सफदरजंग अस्पताल में भर्ती होने के बाद डॉक्टरों की टीम ने लगातार प्रयास किए, जिसके बाद अब उसकी हालत को खतरे से बाहर बताया जा रहा है। हालांकि, इस दर्दनाक घटना ने लड़के के शरीर पर गहरे जख्म छोड़े हैं जो कभी नहीं भरेंगे।
विज्ञान और जांच का सवाल
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा और तार्किक सवाल उस मांझे की प्रकृति को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि बच्चे ने जिस मांझे का इस्तेमाल किया था, वह ‘चाइनीज मांझा’ था। अगर यह साधारण प्लास्टिक या नायलॉन का धागा था, तो विज्ञान के अनुसार वह बिजली का कंडक्टर (सुचालक) नहीं होता। फिर आखिर करंट उस लड़के तक कैसे पहुंचा?
इसके दो मुख्य कारण हो सकते हैं। पहला- बाजार में बिकने वाले अधिकांश अवैध चाइनीज मांझों पर उन्हें मजबूत और तीखा बनाने के लिए कांच या धातु के कणों का कोटिंग (Coating) किया जाता है, जो बिजली को आसानी से अपनी तरफ खींचता है। दूसरा- दिल्ली की नमी और प्रदूषण के कारण मांझे पर जमा पानी की बूंदें भी करंट को ले जाने का काम करती हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन इसी पहलू की जांच में जुटा है कि आखिर मांझे में करंट आने की असल वजह क्या थी।
सड़कों से लेकर आसमान तक खतरा
बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली-एनसीआर में मांझे ने खून बहाया है। हर साल इस खतरनाक धागे के शिकार हजारों लोग होते हैं। तेज रफ्तार बाइक या स्कूटी चला रहे लोगों की गर्दन पर अचानक से फंसे इस तारने वाले मांझे से गहरे जख्म आते हैं, कई बार गर्दन कटने से मौत भी हो जाती है।
हाई-टेंशन तारों पर फंसे मांझों के कारण शॉर्ट-सर्किट होता है, जिससे बड़े-बड़े इलाकों की बिजली गुल हो जाती है और सरकारी संपत्ति का भारी नुकसान होता है। पतंग उड़ाने का यह खेल पक्षियों के लिए सबसे बड़ा काल बनकर आता है। हजारों पक्षी इस अदृश्य जाल में उलझकर बेहाल होकर दम तोड़ देते हैं।
कानून क्यों बना कागज का मोर?
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और दिल्ली सरकार ने चाइनीज मांझे की बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल पर पहले ही पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है। कानूनन इसे रखना या बेचना एक दंडनीय अपराध है, लेकिन फिर भी यह धंधा चल रहा है। कारण है प्रशासन की नाकामी और अंधाधुंध भेदभाव।
स्थानीय थानों की पुलिस अक्सर इसे एक ‘मामूली मामला’ मानकर छोड़ देती है। दुकानदार इसे अंदरुनी कमरों में छिपाकर बेचते हैं और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर तो इसकी बिक्री खुलेआम ‘फाइबर थ्रेड’ या ‘किटिंग स्ट्रिंग’ के नाम से हो रही है। जब तक पुलिस और बिजली विभाग मिलकर इन अवैध कारखानों और डीलर्स पर सख्त कार्रवाई नहीं करेंगे, यह हादसे रुकने का नाम नहीं लेंगे।
समाज और अभिभावकों की जिम्मेदारी
सरकार और प्रशासन के साथ-साथ इस मामले में अभिभावकों और समाज की भी बड़ी जिम्मेदारी है। बच्चों को छतों पर, बालकनियों में या खुले मैदानों में बिजली के तारों के पास पतंग उड़ाने की इजाजत बिल्कुल नहीं देनी चाहिए। उन्हें इस खतरनाक खेल के परिणामों से अवगत कराना होगा।

























