Delhi News: दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) ने अपने ‘ओपन एक्सेस’ नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जो बिजली उपभोक्ताओं के लिए बिजली खरीदने के तरीके को प्रभावित कर सकते हैं। इन बदलावों का उद्देश्य बड़े उपभोक्ताओं को अधिक स्वतंत्रता और लचीलापन प्रदान करना है, ताकि वे सीधे बिजली उत्पादन कंपनियों से बिजली खरीद सकें, बिना मध्यस्थ वितरण कंपनियों के। इन नियमों में मुख्य रूप से एडिशनल सरचार्ज के लागू होने के तरीके और उसकी समाप्ति की प्रक्रिया को संशोधित किया गया है।
नए नियमों का उद्देश्य और प्रमुख बदलाव
डिस्कॉम्स (डिस्ट्रीब्यूशन कॉम्पनियों) और बड़े बिजली उपभोक्ताओं के बीच संबंधों को बेहतर बनाने के लिए, दिल्ली सरकार ने दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) के माध्यम से ‘ओपन एक्सेस’ नियमों में बदलाव किए हैं। इन संशोधनों का मकसद है कि बड़े उपभोक्ता जैसे उद्योग, मॉल, हाउसिंग सोसाइटी आदि, अब सीधे बिजली उत्पादक कंपनियों से बिजली खरीद सकें और इसके लिए उन्हें पहले की तरह अतिरिक्त सरचार्ज (एडिशनल सरचार्ज) का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।

एडिशनल सरचार्ज की समाप्ति का प्रावधान
नए नियमों के अनुसार, जो उपभोक्ता ‘ओपन एक्सेस’ के तहत बिजली खरीदते हैं, उन्हें हर साल धीरे-धीरे एडिशनल सरचार्ज में कमी का सामना करना पड़ेगा। यह प्रक्रिया चार साल में पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी। यानी, यदि कोई बड़ा ग्राहक अभी भी इस सुविधा का लाभ ले रहा है तो उसे हर साल इस सरचार्ज में कमी दिखाई देगी और चार साल के अंत तक यह शुल्क पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। यह कदम बड़े उद्योगों और कॉरपोरेट क्लाइंट्स को प्रोत्साहित करता है कि वे अपने बिजली स्रोत को विविधता दें और सीधे बिजली उत्पादन कंपनियों से बिजली खरीदें।
नियमों का कार्यान्वयन और शर्तें
यह बदलाव केवल उन्हीं उपभोक्ताओं पर लागू होगा जो संबंधित वितरण लाइसेंसधारी से जुड़े हैं या संबंधित रहे हैं। साथ ही, यह नियम जनरल नेटवर्क एक्सेस (GNA) और अस्थायी GNA की परिभाषाओं को केंद्रीय इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CERC) द्वारा तय किए गए मानकों के अनुरूप बनाते हैं। इस प्रक्रिया में, ग्राहकों को यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि मौजूदा नियमों के तहत पहले से लगाए गए या वसूले गए एडिशनल सरचार्ज के लिए वे कोई भी रिफंड, एडजस्टमेंट या रिकवरी का हकदार नहीं होंगे।
नियमों में संशोधन और उसकी समय सीमा
डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसधारी कंपनियों के साथ बनाए गए अनुबंधों में यदि कोई सीमा निर्धारित है, तो उस सीमा के भीतर ही सरचार्ज लागू रहेगा। यानी, यदि कोई ग्राहक लाइसेंसधारी के साथ अनुबंध में तय सीमा से अधिक बिजली का उपयोग कर रहा है, तो उस पर यह नियम लागू होगा।
हालांकि, संशोधनों के मुख्य हिस्से में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। पहले नोटिफिकेशन का लक्ष्य था कि यह नियम 19 मार्च, 2025 से लागू होगा, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 19 मार्च, 2026 कर दिया गया है। इस बदलाव का मकसद है कि सभी संबंधित पक्ष इन नियमों के साथ सहजता से तालमेल बिठा सकें और किसी भी तरह की असुविधा से बचा जा सके।
ओपन एक्सेस के लाभ और चुनौतियां
ओपन एक्सेस की व्यवस्था उन उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद है जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए अधिक लचीलापन और लागत कम करने का विकल्प चाहते हैं। इससे उद्योग, मॉल, और हाउसिंग सोसाइटी जैसे बड़े ग्राहक सीधे बिजली उत्पादन कंपनियों से बिजली खरीद सकते हैं, जिससे उनकी ऊर्जा लागत में कमी आ सकती है।
वहीं, इस व्यवस्था में कुछ चुनौतियां भी हैं। जैसे, यदि ग्राहक पहले से ही एडिशनल सरचार्ज का भुगतान कर चुका है, तो उसे उसके लिए कोई रिफंड नहीं मिलेगा। साथ ही, नए नियमों के तहत, ग्राहक को अपनी बिजली खरीद व्यवस्था को अच्छी तरह समझने और अपनी आवश्यकताओं के अनुसार योजना बनाने की जरूरत होगी।























