The dispute over Delhi’s O-Zone area: दिल्ली के राजधानी क्षेत्र में ओ-जोन को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन चुका है। यह इलाका, जो वजीराबाद से ओखला तक फैला हुआ है, दिल्ली के मास्टर प्लान 2021 के तहत यमुना के बाढ़ वाले इलाके (फ्लडप्लेन) में आता है। इस इलाके को लेकर सरकार, विपक्ष और अदालतों के बीच चल रही बहस ने इस मुद्दे को बेहद जटिल और संवेदनशील बना दिया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर यह ओ-जोन क्या है, यहां क्यों विवाद हो रहा है और इसके राजनीतिक, कानूनी और पर्यावरणीय पहलुओं को समझते हैं।
ओ-जोन क्या है? इसकी परिभाषा और महत्व
ओ-जोन का अर्थ है ‘ऑरिजनल जियो-ओकेशननल नॉर्म्स’ यानी भौगोलिक और पर्यावरणीय मानदंड। दिल्ली के संदर्भ में, यह क्षेत्र यमुना नदी के बाढ़ वाले इलाके या फ्लडप्लेन के रूप में जाना जाता है। मास्टर प्लान 2021 के तहत, इस इलाके को विशेष संरक्षण प्रदान किया गया है। यह इलाका नदी का संरक्षित तल है, जहां किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक जल प्रवाह, बाढ़ से सुरक्षा, और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित करना है। इस जमीन का उपयोग मुख्य रूप से जल संरक्षण, प्राकृतिक बाढ़ नियंत्रण और जैव विविधता के संरक्षण के लिए किया जाता है।
दिल्ली मास्टर प्लान 2021 और ओ-जोन का फैसला
दिल्ली मास्टर प्लान 2021 ने यमुना के बाढ़ वाले इलाकों को ‘ओ-जोन’ घोषित किया है। इसका मुख्य कारण यह है कि ये क्षेत्र नदी के प्राकृतिक प्रवाह और जल स्रोतों का हिस्सा हैं, जहां किसी भी तरह का अवैध निर्माण पर्यावरण और जल संसाधनों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इस योजना का उद्देश्य इन इलाकों को संरक्षित करना, नदी के प्रवाह में बाधा न डालना और प्राकृतिक वातावरण को बनाए रखना है।
कोर्ट का आदेश और अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई
मई महीने में दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकारी एजेंसियों को आदेश दिया था कि वे ओ-जोन इलाके में चल रहे अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को हटाएं। इस क्षेत्र में पिछले कुछ दशकों में लगभग 90 अवैध कॉलोनियां बस चुकी हैं, जिनमें लाखों लोग रहते हैं। कोर्ट का आदेश इन अवैध निर्माणों को हटाने का था, क्योंकि ये इलाके नदी के बाढ़ क्षेत्र में आते हैं और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबंधित हैं।
राजनीतिक बयानबाजी और सरकार का रुख
हालांकि, इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की राय भिन्न है। भाजपा सरकार ने साफ कर दिया है कि ओ-जोन में बने किसी भी घर को नहीं तोड़ा जाएगा। भाजपा ने विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (आप) पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। भाजपा के नेताओं ने कहा है कि ओ-जोन में लगभग 30 लाख से अधिक घर हैं, और इनमें से किसी को भी नहीं तोड़ा जाएगा। दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी आश्वासन दिया है कि इस इलाके में पहले से बने घरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
वहीं, ‘आप’ पार्टी का तर्क है कि इन कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। विधायक संजीव झा ने विधानसभा में कहा कि ये कॉलोनियां 2019 में केंद्र सरकार की PM-UDAY योजना के तहत कानूनी सुरक्षा प्राप्त कर चुकी हैं। इस योजना का उद्देश्य अनधिकृत कॉलोनियों को मालिकाना हक, ट्रांसफर और गिरवी रखने का अधिकार देना था। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें इस कानून का पालन नहीं कर रही हैं और इन कॉलोनियों को छोड़ दिया गया है।
PM-UDAY योजना और कानूनी सुरक्षा
PM-UDAY योजना दिल्ली की 1731 अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को मालिकाना हक, ट्रांसफर और गिरवी रखने के अधिकार देने के मकसद से शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य इन कॉलोनियों के निवासियों को कानूनी रूप से सुरक्षित अधिकार देना था और उन्हें मुख्यधारा में लाना था। लेकिन, ओ-जोन इलाके में अवैध निर्माण और अतिक्रमणों को लेकर सरकार का रुख अस्पष्ट रहा है।
संजीव झा ने सवाल किया है कि जब ये कॉलोनियां 2019 में कानूनी रूप से मान्य थीं, तो फिर इन्हें क्यों छोड़ दिया गया? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अब इन कॉलोनियों को गिराने की कोशिश कर रही है, जो कि लोगों के लिए चिंता का विषय है।
पर्यावरणीय और सामाजिक मुद्दे
ओ-जोन क्षेत्र का संरक्षण पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र नदी के बाढ़ नियंत्रण, जल संरक्षण और जैव विविधता के लिए जरूरी है। अवैध निर्माण और अतिक्रमण इन प्राकृतिक संसाधनों को खतरे में डालते हैं। वहीं, इन कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोग अपने घरों को लेकर चिंतित हैं। इन इलाकों में रहने वालों का भविष्य अधर में है, क्योंकि कोर्ट का आदेश और सरकारी कार्रवाई उनके जीवन को प्रभावित कर सकती है।

























